कोटा, राजस्थान
| कोटा | |||||
| — शहर — | |||||
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| समय मंडल: आईएसटी (यूटीसी+५:३०) | |||||
| देश | |||||
| राज्य | राजस्थान | ||||
| ज़िला | कोटा | ||||
| जनसंख्या • घनत्व |
695,899 (2001 के अनुसार [update]) • 288 /कि.मी.२ (746 /वर्ग मी.) |
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| क्षेत्रफल • ऊँचाई (AMSL) |
• 271 मीटर (889 फी॰) |
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विभिन्न कोड
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| आधिकारिक जालस्थल: kota.nic.in | |||||
निर्देशांक: कोटा राजस्थान का एक प्रमुख औद्योगिक एवं शैक्षणिक शहर है । यह चम्बल नदी के तट पर बसा हुआ है । राजधानी जयपुर से लगभग २४० किलोमीटर दूर सडक एवं रेलमार्ग से । जयपुर-जबलपुर राष्ट्रीय राजमार्ग १२ पर स्थित ।दक्षिण राजस्थान में चंबल नदी के पूर्वी किनारे पर स्थित कोटा उन शहरों में है जहां औद्योगीकरण बड़े पैमाने पर हुआ है। कोटा अनेक किलों, महलों, संग्रहालयों, मंदिरों और बगीचों के लिए लोकप्रिय है। यह शहर नवीनता और प्राचीनता का अनूठा मिश्रण है। जहां एक तरफ शहर के स्मारक प्राचीनता का बोध कराते हैं वहीं चंबल नदी पर बना हाइड्रो इलेक्ट्रिक प्लान्ट और न्यूक्लियर पावर प्लान्ट आधुनिकता का एहसास कराता है।
प्रारंभ में कोटा बूंदी राज्य का एक हिस्सा था। मुगल शासक जहांगीर ने जब बूंदी के शासकों को पराजित किया तो बूंदी 1624 ई. में एक स्वतंत्र राज्य के रूप में स्थापित हुआ। राव माधो सिंह यहां के प्रथम स्वतंत्र शासक के रूप में गद्दी पर बैठे। 1818 ई. में कोटा ब्रिटिश साम्राज्य के अधीन हो गया।
अनुक्रम |
भूगोल [संपादित करें]
कोटा चम्बल नदी के पूर्वी तट पर स्थित है। यह [[राजस्थान] के दक्षिणी भाग में आता है। यहां का भूगोलिक निर्देशांक है .[1]। यहां का क्षेत्रफल है 12,436 कि.मी.² (राजस्थान राज्य का 3.63 % भूभाग).[2] यहां की औसत ऊंचाई है 271 मीटर (889 फीट).
परिधान [संपादित करें]
कोटा की विशेष सूती साड़ियां प्रसिद्ध हैं।
रजवाड़ा [संपादित करें]
| Princely City: कोटा | |
| क्षेत्र | हाड़ौती |
| ध्वज 19वीं शती | |
| स्वतंत्र: | बूंदी राज्य |
| रियासत का अस्तित्व: | 1579-1949 |
| राजवंश | राजपूत चौहान हाड़ा |
| राजधानी | कोटा |
प्रमुख आकर्षण [संपादित करें]
सिटी फोर्ट पैलेस [संपादित करें]
चंबल नदी के पूर्वी तट पर 17 वीं शताब्दी में बना यह किला कोटा का मुख्य आकर्षण है। इस किले का परिसर राजस्थान के सबसे विशाल किले परिसरों में है। 17 वीं शताब्दी में बना हाथी पोल किले में प्रवेश का खूबसूरत प्रवेश द्वार है। किले के बुर्ज, बालकनी, गुम्बद, परकोटे बेहद आकर्षक ह
राव माधो सिंह संग्रहालय [संपादित करें]
यह संग्रहालय पुराने महल में स्थित है और इसे राजस्थान के सबसे बेहतरीन संग्रहालयों में माना जाता है। कोटा राज्य के प्रथम शासक राव माधो सिंह के नाम पर संग्रहालय का नाम रखा गया है। संग्रहालय में कोटा की खूबसूरत पेटिन्ग, मूर्तियों, तस्वीरें, हथियार और शाही वंश से संबंधित अनेक वस्तुएं देखी जा सकती हैं।
जगमंदिर महल [संपादित करें]
यह महल कोटा की एक रानी द्वारा 1740 ई. में बनवाया गया था। खूबसूरत किशोर सागर झील के मध्य बना यह महल राजाओं के आमोद प्रमोद का स्थान था। झील के पारदर्शी जल में महल का प्रतिबिम्ब बेहद सुन्दर लगता है। किशोर सागर झील बूंदी के राजकुमार धी देह ने 1346 ई. में बनवाई थी। झील में नौकायन का आनन्द भी लिया जा सकता है।
सरकारी संग्रहालय [संपादित करें]
किशोर सागर झील के समीप किशोर बाग में बने ब्रिजविलास महल में यह संग्रहालय स्थित है। संग्रहालय में दुर्लभ सिक्कों, हस्तलिपियों और चुनिन्दा हडोटी मूर्तियों का विस्तृत संग्रह है। यहां बरोली के मंदिरों से कुछ आकर्षक और ऐतिहासिक मूर्तियां लाकर रखी गई हैं। शुक्रवार और राष्ट्रीय अवकाश के दिन संग्रहालय बन्द रहता है।
चम्बल गार्डन [संपादित करें]
यह एक खूबसूरत पिकनिक स्पॉट है और यहां मगरमच्छों का तालाब देखा जा सकता है। यह गार्डन चम्बल नदी और अमर निवास के समीप स्थित है।
देवताजी की हवेली [संपादित करें]
देवताजी की हवेली राजस्थान के सबसे सुन्दर भवनों में है। कोटा की यह हवेली अनोखे भित्तिचित्रों और चित्रकारी के लिए प्रसिद्ध है।
निकटवर्ती स्थल [संपादित करें]
दर्राह वन्य जीव अभ्यारण्य [संपादित करें]
कोटा से 50 किमी. दूर राष्ट्रीय चम्बल वन्य जीव अभ्यारण्य है जो घड़ियालों और पतले मुंह वाले मगरमच्छों के लिए बहुत लोकप्रिय है। यहां चीते, वाइल्डबोर, तेंदुए और हिरन पाए जाते हैं। बहुत कम जगह दिखाई देने वाला दुर्लभ कराकल यहां देखा जा सकता है।
केशोराय-पाटन [संपादित करें]
श्री केशव राय जी हडोती और हाडा के शासकों के इष्टदेव हैं। केशोरईपाटन भगवान श्री केशव का निवास स्थल है। श्री केशव का मध्यकालीन मंदिर चंबल नदी के किनार स्थित है। नदी की ओर वाली मंदिर की दीवार किले की दीवार के समान है। कार्तिक माह में आयोजित होने वाले मेले में यहां श्रद्धालु बड़ी संख्या में आते हैं। इस अवसर पर भक्तजन चम्बल नदी में डुबकी लगाते हैं और श्री कृष्ण के आशीर्वाद की कामना करते हैं। केशोरईपाटन कोटा से 22 किमी. दूर उत्तर पूर्व में स्थित है।
गेपरनाथ मंदिर [संपादित करें]
कोटा से 22 किमी. दूर दक्षिण पश्चिम में शिव को समर्पित गेपरनाथ मंदिर चम्बल नदी के किनारे पर स्थित है। यह मंदिर 1569 ई. में बना था। यह स्थान प्राचीन काल से शिवभक्तों का प्रमुख तीर्थस्थल रहा है। यहां कुछ प्राचीन अभिलेख प्राप्त हुए हैं जो इस तथ्य की पुष्टि करते हैं। सन् 2008 मे एक बङी ही विस्मयी घटना ने समस्त कोटा वासीयो का दिल दहला दिया। करीब 250 व्यक्ति जो कि शिव मन्दिर मे दर्शन करने वास्ते गये थे वो सीढिया टुट जाने बाबत् अन्दर ही फस गये। प्रशासन ने 2 दिन मे कङी मेहनत कर उन्हे बाहर निकाला।गेपरनाथ मे करीब 470 सीढिया है। करीब 350मीटर की गहरी खाई है।
बाड़ोली [संपादित करें]
यहां 9 वीं और 12 वीं शताब्दी के बीच बने अनेक प्राचीन मंदिर है। यह स्थान कदम, आम, जामुन और पीपल के पेड़ों से घिरा हिन्दुओं का पवित्र धार्मिक स्थल है। घाटेश्वर यहां का मुख्य मंदिर है जो भगवान शिव को समर्पित है। मंदिर के सभा मंडप विशेषकर स्तम्भों में आकर्षक नक्काशियां की गई हैं। महिषासुरमर्दिनी और त्रिदेव मंदिर अन्य दो प्रमुख मंदिर है। इन मंदिरों की कुछ प्रतिमाएं कोटा के सरकारी संग्रहालय में रखी र्गइ हैं।
आवागमन [संपादित करें]
- वायु मार्ग
नजदीकी एयरपोर्ट जयपुर का सांगानेर विमानक्षेत्र है जो कोटा से 240 किमी. दूर है। भारत के महानगरों से संगनेर के लिए प्रतिदिन उड़ानों की व्यवस्था है। वैसे कोटा में भी हवाईअड़ा है , किंतु वहां हाल में कोई उड़ानें उपलब्ध नहीं हैं। इसे पुनह आरम्भ करने के लिए प्रयास किये जा रहे है।
- रेल मार्ग
कोटा जंक्शन निजामुद्दीन-उदयपुर एक्सप्रेस के माध्यम से दिल्ली से जुड़ा हुआ है। मुम्बई अगस्त क्रान्ति और त्रिवेन्द्रम राजधानी सुपरफास्ट ट्रेनों से भी कोटा पहुंचा जा सकता है। जयपुर से जयपुर-कोटा फास्ट पेसेन्जर और जयपुर- बॉम्बे सेन्ट्रल सुपरफास्ट ट्रैनों से कोटा जाया जा सकता है।
- सड़क मार्ग
जयपुर से राष्ट्रीय राजमार्ग 12 से टोंक, देवली और बूंदी होते हुए कोटा पहुंचा जा सकता है। मुम्बई से राष्ट्रीय राजमार्ग 8 और 76 से चित्तौड़गढ़, भातेश्वर, भदौरा, बिचोर और बिलोजियां होते हुए कोटा पहुंचा जा सकता है।
नागेश जी यहा के प्रसिद्ध राजा हुये है । इन्का इतिहास बहुत प्राच्हीन है। तथा यहा के मुगल कालीन सम्रात् सद्दाम चोध् री जी भी अति वीर सम्राट रहे है।
बाहरी सूत्र [संपादित करें]
- कोटा जिले की आधिकारिक जालस्थल
मुखपृष्ठ विकियात्रा से Kota हेतु यात्रा गाइड।
- राजस्थान पर्यटन।
- Kota Detailed Information with Map
- Kota Information
- एक पर्यटक द्वारा कोटा का वर्णन।
संदर्ब [संपादित करें]
विस्तृत पठन [संपादित करें]
- Tod James Annals and Antiquities of Rajasthan: Or, The Central and Western Rajpoot States of India Published 2001 Asian Educational Services ISBN 81-206-1289-2 pp. 407-690
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