पाली जिला

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पाली जिला

पाली जिला भारत के राजस्थान प्रान्त का एक जिला है जिसकी पूर्वी सीमाएं अरावली पर्वत श्रृंखला से जुड़ी हैं। इसी सीमाएं उत्तर में नागौर और पश्चिम में जालौर से मिलती हैं। पाली शहर पालीवाल ब्राह्मणों का निवास स्थान था जब मुगलों ने कत्लेआम मचा दिया तो उन्हें यह शहर छोड़ कर जाना पड़ा। वीर योद्धा महाराणा प्रताप का जन्म भी यहीं पर अपने ननिहाल में हुआ था। यह नगर तीन बार उजड़ा और बसा। यहां के प्रसिद्ध जैन मंदिर भक्तों के साथ-साथ इतिहासवेत्ताओं को भी आकर्षित करते हैं।

इतिहास[संपादित करें]

पाली जिला के मारवाड तहसील के अन्‍तर्गत धनला गांव का इतिहास बहुत पुराना है स्‍थानीय गांव के अन्‍तर्गत शोभा कोट नामक पहाडी है जंहा पर राव रीडमल रहते थे राव रीडमल के 29 पुत्र थे जिसमें पांचवे पुत्र राव जोधा थे जिन्‍होने जोधपुर की स्‍थापना की को राव के 23 वे पुत्र राव सायरसिंह उर्फ शेरसिहं थे जो कारण वश ध्‍ानला की एक नाडी मे डुबने से देवलोकगमन हो गये तथा ग्रामीणो ने उनका भव्‍य मंदिर बनाया जो आज सारजी महाराज उर्फ भुरा राठौड के नाम से प्रसिद्व है इस गांव का इतिहास बहुत बडा है इस गांव मे ग्राम पंचायत,सनीयर सैकडरी सहित पांच विघालय है गामीण बैक एक सरकारी व 2 निजी अस्‍पताल है तथा राजनीती मे कांबिना मंत्री नरेन्‍द्र कंवर व विधायक केसाराम चौधरी इस गांव के है व युवा नेता जीपी धनला भी इसी गांव के रहने वाले है

जनसांख्यिकी[संपादित करें]

एक धारणा के अनुसार पाली का नाम पालीवाल ब्राहम्‍णों के कारण ही पाली पडा है। इतिहास के कुछ अंशों से पता चलता है कि पालीवालों ने विदेशी आक्रांताओं से अपनी मातृभूमि को बचानें के लिये घोर संघर्ष एवं विरोध किया लेकिन विशाल सेना द्वारा उनके इस विरोध को दबा दिया गया और कई लोग मारे गये। कहा जाता है कि नरसंहार का वह दिन श्रावण पूर्णिमा अर्थात रक्षाबंधन का था। इसीलिए आज भी पालीवाल ब्राह्मण राखी का त्योहार नहीं मनाते हैं। वर्तमान में धोला चौतरा नामक स्‍थान पर पालीवाल समाज के व्‍यक्तियों की जनेउ व उनकी पत्नियों के स्‍वेत चूडों का ढेर सा लग गया था। जिसे धोला चबूतरा नामक स्‍थान से जाना गया था।

शिक्षा[संपादित करें]

सिनला ग्राम मेँ

संदर्भ[संपादित करें]

बाह्य सूत्र[संपादित करें]