सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन 'अज्ञेय'

विकिपीडिया, एक मुक्त ज्ञानकोष से

(अज्ञेय से अनुप्रेषित)
यहां जाईयें: नेविगेशन, ख़ोज

सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन "अज्ञेय" (१९११-१९८७) का जन्म ७ मार्च १९११ को उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के कुशीनगर नामक ऐतिहासिक स्थान में हुआ था। बचपन लखनऊ, कश्मीर, बिहार और मद्रास में बीता। बी.एस.सी. करके अंग्रेजी में एम.ए. करते समय क्रांतिकारी आन्दोलन से जुड़कर फरार हुए और १९३० ई. के अन्त में इन्हें पकड़ लिया गया। अज्ञेय प्रयोगवादी कवि हैं। अनेक जापानी हाइकु कविताओं का अनुवाद अज्ञेय ने किया। वे बहुआयामी व्यक्तित्व के एकान्तमुखी प्रखर कवि हैं।


अनुक्रम

[संपादित करें] शिक्षा

प्रारंभिक शिक्षा-दीक्षा पिता की देख रेख में घर पर ही संस्कृत, फारसी, अंग्रेजी, और बांग्ला भाषा व साहित्य के अध्ययन के साथ। १९२५ में पंजाब से एंट्रेंस की परीक्षा पास की और उसके बाद मद्रास क्रिस्चन कॉलेज में दाखिल हुए। वहाँ से विज्ञान में इंटर की पढ़ाई पूरी कर १९२७ में वे बी ए़स स़ी क़रने के लिए लाहौर के फॅरमन कॉलेज के छात्र बने।१९२९ में बी ए़स स़ी करने के बाद एम ए़ म़ें उन्होंने अंग्रेजी विषय रखा; पर क्रांतिकारी गतिविधियों में हिस्सा लेने के कारण पढ़ाई पूरी न हो सकी।

[संपादित करें] कार्यक्षेत्र

१९३० से १९३६ तक विभिन्न जेलों में कटे। १९३६-३७ में सैनिक और विशाल भारत नामक पत्रिकाओं का संपादन किया। १९४३ से १९४६ तक ब्रिटिश सेना में रहे; इसके बाद इलाहाबाद से प्रतीक नामक पत्रिका निकाली और ऑल इंडिया रेडियो की नौकरी स्वीकार की। देश-विदेश की यात्राएं कीं। जिसमें उन्होंने कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय से लेकर जोधपुर विश्वविद्यालय तक में अध्यापन का काम किया। दिल्ली लौटे और दिनमान साप्ताहिक, नवभारत टाइम्स, अंग्रेजी पत्र वाक् और एवरीमैंस जैसी प्रसिद्ध पत्र-पत्रिकाओं का संपादन किया। १९८० में उन्होंने वत्सलनिधि नामक एक न्यास की स्थापना की जिसका उद्देश्य साहित्य और संस्कृति के क्षेत्र में कार्य करना था। दिल्ली में ही ४ अप्रैल १९८७ को उनकी मृत्यु हुई। १९६४ में आँगन के पार द्वार पर उन्हें साहित्य अकादमी का पुरस्कार प्राप्त हुआ और १९७९ में कितनी नावों में कितनी बार पर भारतीय ज्ञानपीठ पुरस्कार

[संपादित करें] प्रमुख कृतियां

  • कविता संग्रह भग्नदूत, इत्यलम, हरी घास पर क्षण भर, बावरा अहेरी, इंद्र धनु रौंदे हुए ये, अरी ओ करूणा प्रभामय, आंगन के पार द्वार, कितनी नावों में कितनी बार, क्योंकि मैं उसे जानता हूँ, सागर-मुद्रा, महावृक्ष के नीचे, और ऐसा कोई घर आपने देखा है।
  • कहानी-संग्रह : विपथगा, परंपरा, कोठरी की बात, शरणार्थी, जयदोल, ये तेरे प्रतिरूप |
  • उपन्यास: शेखर: एक जीवनी, नदी के द्वीप, अपने अपने अजनबी।
  • यात्रा वृत्तांत: अरे यायावर रहेगा याद, एक बूंद सहसा उछली।
  • निबंध संग्रह : सबरंग, त्रिशंकु, आत्मनेपद, आधुनिक साहित्य: एक आधुनिक परिदृश्य, आलवाल,
  • संस्मरण :स्मृति लेखा
  • डायरियां : भवंती, अंतरा और शाश्वती।
  • विचार गद्य :संवत्‍सर

उनका लगभग समग्र काव्य सदानीरा (दो खंड) नाम से संकलित हुआ है तथा अन्यान्य विषयों पर लिखे गए सारे निबंध केंद्र और परिधि नामक ग्रंथ में संकलित हुए हैं।

विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं के संपादन के साथ-साथ अज्ञेय ने तारसप्तक, दूसरा सप्तक, और तीसरा सप्तक जैसे युगांतरकारी काव्य संकलनों का भी संपादन किया तथा पुष्करिणी और रूपांबरा जैसे काव्य-संकलनों का भी।

वे वत्सलनिधि से प्रकाशित आधा दर्जन निबंध- संग्रहों के भी संपादक हैं। निस्संदेह वे आधुनिक साहित्य के एक शलाका-पुरूष थे जिसने हिंदी साहित्य में भारतेंदु के बाद एक दूसरे आधुनिक युग का प्रवर्तन किया।

[संपादित करें] प्रकाशित रचनाएँ

प्रकाशित रचनाएँ- (कविता)- भग्नदूत १९३३, चिन्ता १९४२, इत्यलम्१९४६, हरी घास पर क्षण भर १९४९, बावरा अहेरी १९४५, इन्द्रधनु रौंदे हुये ये १९५७, अरी ओ कस्र्णा प्रभामय १९५९, आँगन के पार द्वार १९६१, समुद्रमुद्रा १९७०, प्रिजन डेज एण्ड अदर पोएम्स (अंग्रेजीमें) १९४६।,

(कहानियाँ) - विपथगा १९३७, परम्परा १९४४, कोठरीकी बात १९४५, शरणार्थी १९४८, जयदोल १९५१

(उपन्यास)- शेखर एक जीवनी-प्रथम भाग १९४१, द्वितीय भाग १९४४, नदीके द्वीप १९५२, अपने - अपने अजनबी १९६१

(यात्रा वृतान्त)- अरे यायावर रहेगा याद? १९४३, एक बूँद सहसा उछली १९६०, आलोचना त्रिशंकु १९४५, आत्मनेपद १९६०, भवन्ती १९७१, आलवाल १९७१ ई.,

(संपादित ग्रंथ)- आधुनिक हिन्दी साहित्य (निबन्ध संग्रह)१९४२, तार सप्तक (कविता संग्रह) १९४३, दूसरा सप्तक (कविता संग्रह)१९५१, तीसरा सप्तक (कविता संग्रह), सम्पूर्ण १९५९, नये एकांकी १९५२, रूपांबरा १९६०।

[संपादित करें] बाहरी कडियाँ

अन्य भाषायें