कवि

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कवि वह है जो भावों को रसाभिषिक्त अभिव्यक्ति देता है और सामान्य अथवा स्पष्ट के परे गहन यथार्थ का वर्णन करता है। इसीलिये वैदिक काल में ऋषय: मन्त्रदृष्टार: कवय: क्रान्तदर्शिन: अर्थात् ऋषि को मन्त्रदृष्टा और कवि को क्रान्तदर्शी कहा गया है। "जहाँ न पहुँचे रवि, वहाँ पहुँचे कवि" इस लोकोक्ति को एक दोहे के माध्यम से अभिव्यक्ति दी गयी है: "जहाँ न पहुँचे रवि वहाँ, कवि पहुँचे तत्काल। दिन में कवि का काम क्या, निशि में करे कमाल।।" ('क्रान्त' कृत मुक्तकी से साभार)

शायर[संपादित करें]

शायर उर्दू भाषा में उस व्यक्ति को कहते हैं जो हिन्दी की तरह उर्दू भाषा में कविता करता है। जिस प्रकार उर्दू कवि को शायर कहते हैं उसी प्रकार उर्दू कविता को उर्दू जुबान में शायरी कहा जाता है।

कुछ प्रसिद्ध शायर[संपादित करें]

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

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