गिरीश कर्नाड

मुक्त ज्ञानकोश विकिपीडिया से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज
Nuvola apps ksig.png
गिरीश कर्नाड

गिरीश कर्नाड कॉर्नेल विश्वविद्यालय में, 2009
जन्म गिरीश रघुनाथ कर्नाड
19 मई 1938 (1938-05-19) (आयु 76)
माथेरान, ब्रिटिश भारत (वर्तमान में महाराष्ट्र, भारत)
उपजीविका नाटककार, निर्देशक, अभिनेता, कवि
राष्ट्रीयता भारतीय
शिक्षण स्थान ऑक्सफ़र्ड विश्वविद्यालय
शैलियाँ कथा साहित्य
साहित्यिक आंदोलन नव्या
प्रमुख कार्य तुग़लक 1964
तलेदंड (हिन्दी: रक्त कल्याण)

गिरीश कर्नाड (जन्म 19 मई, 1938 माथेरान, महाराष्ट्र) भारत के जाने माने समकालीन लेखक, अभिनेता, फिल्म निर्देशक और नाटककार हैं। कन्नड़ और अंग्रेजी भाषा दोनों में इनकी लेखनी समानाधिकार से चलती है। 1998 में ज्ञानपीठ सहित पद्मश्रीपद्मभूषण जैसे कई प्रतिष्ठित पुरस्कारों के विजेता कर्नाड द्वारा रचित तुगलक, हयवदन,तलेदंड, नागमंडल व ययाति जैसे नाटक अत्यंत लोकप्रिय हुये और भारत की अनेकों भाषाओं में इनका अनुवाद व मंचन हुआ है। प्रमुख भारतीय निदेशको - इब्राहीम अलकाजी, प्रसन्ना, अरविन्द गौड़ और बी.वी. कारंत ने इनका अलग- अलग तरीके से प्रभावी व यादगार निर्देशन किया हैं।

आरंभिक जीवन[संपादित करें]

एक कोंकणी भाषी परिवार में जन्में कर्नाड ने 1958 में धारवाड़ स्थित कर्नाटक विश्वविद्यालय से स्नातक उपाधि ली। इसके पश्चात वे एक रोड्स स्कॉलर के रूप में इंग्लैंड चले गए जहां उन्होंने ऑक्सफोर्ड के लिंकॉन तथा मॅगडेलन महाविद्यालयों से दर्शनशास्त्र, राजनीतिशास्त्र तथा अर्थशास्त्र में स्नातकोत्तर की उपाधि प्राप्त की। वे शिकागो विश्वविद्यालय के फुलब्राइट महाविद्यालय में विज़िटिंग प्रोफ़ेसर भी रहे।

कार्य[संपादित करें]

साहित्य[संपादित करें]

कर्नाड की प्रसिद्धि एक नाटककार के रूप में ज्यादा है। कन्नड़ भाषा में लिखे उनके नाटकों का अंग्रेजी समेत कई भारतीय भाषाओं में अनुवाद हो चुका है। एक खास बात ये है कि उन्होंने लिखने के लिए ना तो अंग्रेज़ी को चुना, जिस भाषा में उन्होंने एक समय विश्वप्रसिद्ध होने के अरमान संजोए थे, और ना ही अपनी मातृभाषा कोंकणी को। जिस समय उन्होंने कन्नड़ में लिखना शुरू किया उस समय कन्नड़ लेखकों पर पश्चिमी साहित्यिक पुनर्जागरण का गहरा प्रभाव था। लेखकों के बीच किसी ऐसी चीज के बारे में लिखने की होड़ थी जो स्थानीय लोगों के लिए बिल्कुल नयी थी। इसी समय कर्नाड ने ऐतिहासिक तथा पौराणिक पात्रों से तत्कालीन व्यवस्था को दर्शाने का तरीका अपनाया तथा काफी लोकप्रिय हुए। उनके नाटक ययाति (1961, प्रथम नाटक) तथा तुग़लक़ (1964) ऐसे ही नाटकों का प्रतिनिधित्व करते हैं। तुगलक से कर्नाड को बहुत प्रसिद्धि मिली और इसका कई भारतीय भाषाओं में अनुवाद हुआ।

सिनेमा[संपादित करें]

वंशवृक्ष नामक कन्नड़ फिल्म से इन्होंने निर्देशन की दुनिया में कदम रखा। इसके बाद इन्होंने कई कन्नड़ तथा हिन्दी फिल्मों का निर्देशन तथा अभिनय भी किया।

प्रमुख फ़िल्में[संपादित करें]

कृतियां[संपादित करें]

नाटक[संपादित करें]

  • ययाति - गिरीश कर्नाड का चर्चित नाटक। देशभर में निदेशको द्वारा मंचन।
  • तुग़लक - हिंदुस्तानी मे अनुवाद - स्व. बी.वी. कारंत। निदेशक इब्राहीम अलकाजी, प्रसन्ना, अरविन्द गौड़ और दिनेश ठाकुर ने इसका निर्देशन किया।
  • अग्नि मत्तु मळे
  • ओदकलु बिम्ब
  • अंजुमल्लिगे - रानावि के लिए प्रसन्ना द्वारा निर्देशन।
  • मा निषाद
  • टिप्पुविन कनसुगळु
  • तलेदंड - रानावि के पूर्व निर्देशक राम गोपाल बजाज द्वारा हिन्दी अनुवाद रक्त कल्याण - रानावि के लिए इब्राहीम अलकाजी और फिर अस्मिता नाटय संस्था द्वारा अरविंद गौड़ के निदेशन में १९९५ से २००९ तक १५० से ज्यादा मंचन।[1]
  • हित्तिन हुंज
  • नागमंडल - सबसे चर्चित नाटक। देशभर में प्रमुख भारतीय निदेशको द्वारा मंचन।
  • हयवदन - स्व.बी.वी. कारंत द्वारा निदेशन।

पुरस्कार तथा उपाधियाँ[संपादित करें]

साहित्य के लिए[संपादित करें]

सिनेमा के क्षेत्र में[संपादित करें]

हस्ताक्षर[संपादित करें]

संदर्भ[संपादित करें]