संयुक्त राष्ट्र तथा शांतिस्थापन

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संयुक्त राष्ट्र की सफलताएँ[संपादित करें]

इस लेख में संयुक्त राष्ट्र संध ने अब तक जिन विवादो को हल करने में सफलता पायी है उसका वर्णन किया गया है।

ईरान विवाद[संपादित करें]

बर्ष जनवरी1946 इस्वी में सोवियत संध ने ईरान के अजरबैजान क्षेत्र में रुसी सेनाएँ भेज दीँ। जिस पर 19 जनवरी,1946 इस्वी में ईरान ने सुरक्षा परिषद् से सहायता की याचना की परिषद् ने रुष तथा ईरान विवाद को सीधी वार्त्ता द्दारा समाप्त करने में सफलता प्राप्त की और 21 मई 1946 इस्वी को रुसी सेनाओँ ने ईरान को खाली कर दिया।

यूनान विवाद[संपादित करें]

-यूनान ने 3 दिसम्बर 1946 इस्वी को सुरक्षा परिषद् से शिकायत की साम्यबादी राज्य उसकी सीमाओ पर आक्रामक कार्यवाहियाँ कर रहे हैं लेकिन संध की महासभा ने इस विवाद को हल करने के लिए एक आयोग नियुक्त कर दिया लेकिन अल्बानिया,बल्गेरिया तथा यूगोस्लाविया ने आयोग के सदस्यो को अपनी सीमाओँ में घुसने नहीं दिया पर संध ने यूनान व अन्य राज्यो को पारस्पारिक वार्ता द्दारा इस विवाद को हल करने का परामर्श दिया अन्त में संयुक्त राष्ट्र संध यूनान के विवाद को हल करने में सफल रहा।

सीरिया-लेबनान विवाद[संपादित करें]

4 फरवरी 1946 इस्वी को सीरिया तथा लेबनान ने संध से प्रार्थना की इनके देशों में पड़ी हुई फ्रांसीसी सेनाएँ हटाई जाएँ लेकिन संध ने फ्रांस सरकार से बातचीत की और शीध्र ही फ्रांसीसी सेनाओँ ने सीरिया और लेबनान को खाली कर दिया।

हाँलैण्ड-इण्डोनेशिया विवाद[संपादित करें]

द्दितीया विश्वयुध्द के बाद 1947 इस्वी में हाँलैण्ड और इण्डोनेशिया में युद्ध छिड गया। 20 जुलाई 1947 इस्वी को इस मामले को सुरक्षा परिषद् में उडाया गया फलस्वरुप 17 जनवरी 1948 इस्वी को दोनो पक्षोँ में एक अस्थायी समझौता हो गया परन्तु कुछ समय बाद हाँलैण्ड ने पुन: आक्रमण कर दिया। 24 जनवरी 1948 इस्वी को संध ने एक प्रस्ताब पारित करके हाँलैण्ड को आदेश दिया कि वह इण्डोनेशिया में युद्ध बन्द कर दे शुरु में हाँलैण्ड ने आनाकानी की परन्तु 27 दिसम्बर 1949 इस्वी को इण्डोनेशिया की स्वतन्त्रता के साथ इस विवाद का अन्त हो गया और 28 दिसम्बर 1950 इस्वी को उसे संयुक्त राष्ट्र संध की सदस्यता भी दे दी गयी।

बर्लिन की घेराबन्दी[संपादित करें]

पोट्सडम सम्मेलन के निर्णयानुसार अमेरीका रुस ब्रिटेन तथा फ्रांस के बीच बर्लिन का चार भागोँ में विभाजन हो गया था तथा बर्लिन के पूर्वी क्षेत्र पर रुस का अधिकार और शेष तीन भागोँ पर अमेरीका ब्रिटेन तथा फ्रांस का प्रभुत्व स्वीकार किया गया था। सन् 1948 इस्वी में समान मुद्रा के प्रश्न पर विवाद हो जाने से रुस ने बर्लिन की नाकाबन्दी कर दी जिसके फलस्वरुप पूर्वी और पश्चिमी जर्मनी का सम्पर्क भंग हो गया अन्त में संयुक्त राष्ट्र संध ने हस्तपेक्ष करके 12 मई 1942 इस्वी में इस नाकाबन्दी को समाप्त करवा दिया।

फिलिस्तीन की समस्या[संपादित करें]

सन् 1948 इस्वी में फिलिस्तीन के विभाजन के प्रश्न पर अरबोँ तथा यहुदियो के बीच संधर्ष छिड़ गया। मई 1948 इस्वी में अरब राज्यो ने फिलिस्तीन पर आक्रमण कर दिया था जिसके उपरान्त भंयकर युद्ध के बाद 11 जून 1948 इस्वी में यहूदियो ने अरब राज्यो की सेनाओँ को पराजित करके देश से बाहर निकाल दिया जिसके बाद सुरक्षा परिषद् ने 28 जुलाई 1948 इस्वी को दोनो पक्षो में यूध्दविराम कराने में सफलता प्राप्त की लेकिन फिलिस्तीन की समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका 13 दिसम्बर 1993 इस्वी को संयुक्त राष्ट्र संध के प्रयासो से फिलिस्तीन को सीमित स्वतन्त्रता प्रदान करने वाले एक समझौते पर यासिर अराफात और इजराइल के प्रधानमन्त्री राबिन के हस्ताक्षर किये। दूसरी तरफ 25 जुलाई 1994 इस्वी को जार्डन के शाह हुसैन और राबिन ने एक समझौते पर हस्ताक्षर कर अपनी शत्रुता को समाप्त कर दिया। इस प्रकार संयुक्त राष्ट्र संध के अथक प्रयासो से फिलिस्तीन की जटिल समस्या का निराकरण सभ्भव हो सका।

स्पेन का संकट[संपादित करें]

1946 इस्वी में पौलेण्ड ने सुरक्षा परिषद् से शिकायत की कि स्पेन में जनरल फ्रांको का तानाशाही शासन विश्व शान्ति के लिए खतरा है। संध की महासभा ने तत्काल ही स्पेन को संध की सदस्यता से वचिंत कर दिया। बाद में 1955 इस्वी में स्पेन को संध की सदस्यता पुन: दे दी गयी।

कोरिया संकट[संपादित करें]

द्दितीया विश्वयुध्द के बाद उत्तर कोरिया और दक्षिण कोरिया के बीच युद्ध छिड़ गया 1950 इस्वी में युद्ध ने गभ्भीर रूप धारण कर लिया और विश्वयुध्द की सम्भावना हो गयी लेकिन सुरक्षा परिषद् ने वार्त्ता और सैनिक कार्यवाही द्रारा जुलाई 1951 इस्वी में कोरिया युद्ध को बन्द कराने में सफलता प्राप्त की। इसे संयुक्त राष्ट्र संध की उल्लेखनीय सफलता माना जाता है।

कश्मीर समस्या[संपादित करें]

भारत - पाकिस्तान के बीच कश्मीर का प्रश्न आज भी गभ्भीर बना हुआ है अक्टूबर 1947 इस्वी में कश्मीर पर प्रभुत्व स्थापित करने के लिए भारत व पाकिस्तान में युद्ध प्रारम्भ हो गया 1 जनवरी 1949 इस्वी को सुरक्षा परिषद् ने दोनो पक्षो में युद्ध बन्द करा दिया। सन् 1965 इस्वी में कश्मीर समस्या के कारण दूसरा भारत व पाकिस्तान युद्ध और 1971 इस्वी में तीसरा भारत-पाक युद्ध हुआ। इन युध्दो को संध ने समाप्त तो अवश्य करवा दिया परन्तु कश्मीर की समस्या का स्थायी हल करने में संयुक्त राष्ट्र संध आज तक विफल रहा है। ये संध की सबसे बड़ी विफलता है।

ईरान-इराक युध्द[संपादित करें]

सन् 22 सितम्बर 1980 इस्वी को ईरान और इराक के माध्य युद्ध आरम्भ हो गया जो की संयुक्त राष्ट्र संध के शान्ति प्रयासो के बाद भी कई वर्षो तक चलता रहा जिसमें हजारो की संख्या में लोगो की जान गयी। अन्त में सुरक्षा परिषद् के प्रयासो से 9 अगस्त 1988 इस्वी को दोनो पक्षो के मध्य युद्ध विराम हो गया

  • इराक समझौता: खाड़ी संकट को सामाप्त करने के लिए फरवरी 1998 इस्वी को संध के महासचिव कोफी अन्नान ने इराक की राजधानी बगदाद की यात्रा की और फरवरी 1998 इस्वी को इराक के तत्ताकालीन राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन से समझोता करके जैविक तथा रासायनिक हथियारो की जाँच का मामला सुलझा लिया।
  • खाड़ी संकट: संध की सुरक्ष परिषद् ने 2 अगस्त 1990 इस्वी को कुवैत पर इराकी आक्रमण से लेकर 29 नम्बर तक खाड़ी संकट पर 12 प्रस्ताव पास किये इसके बाद संयुक्त राष्ट्र संध के आदेश पर मित्र राष्ट्रो की सेनाओ ने 1991 इस्वी को कुवैत को इराक के कब्जे से मुक्त कराने में सफलता प्राप्त की।

सोमालिया संकट[संपादित करें]

सन्दर्भ[संपादित करें]