शौर्य स्मारक

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शौर्य स्मारक
शौर्य स्मारक का प्रवेश द्वार
शौर्य स्मारक का प्रवेश द्वार
शौर्य स्मारक की मध्य प्रदेश के मानचित्र पर अवस्थिति
शौर्य स्मारक
मध्य प्रदेश में स्थान
सामान्य विवरण
प्रकार स्मारक
शहर भोपाल
राष्ट्र भारत
निर्देशांक 23°14′05″N 77°25′31″E / 23.234753°N 77.4252683°E / 23.234753; 77.4252683
उद्घाटन १४ अक्टूबर २०१६
लागत INR41.00 करोड़
प्राविधिक विवरण
अन्य आयाम 12.67 एकड (लगभग 51,250 वर्ग मीटर्) क्षेत्र में फैला
फर्श क्षेत्र 8,000 वर्ग मीटर्
योजना एवं निर्माण
वास्तुकार शोना जैन

शौर्य स्मारक (The War Memorial), जो भोपाल शहर के केंद्र में अरेरा पहाड़ी पर स्थित है, भारत के अमर शहीदों की युद्ध तथा शौर्य गाथाओं की आम जनता को अनुभूति कराने हेतु भारत के प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा १४ अक्टूबर २०१६ को देश को समर्पित किया गया। पर्यटन की दृष्टि से अब यह भोपाल का ही नहीं बल्कि भारत का एक महत्वपूर्ण स्थल बन गया है।

भोपाल स्थित शौर्य स्मारक के सौन्दर्य, स्वच्छता तथा सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए छोटे से प्रवेश शुल्क का प्रावधान किया गया है जो मिलने वाले आनंद की तुलना में कुछ भी नहीं है। हालांकि सैनिकों, भूतपूर्व सैनिकों तथा उनके परिवार वालों सम्मान देते हुए यहाँ निःशुल्क प्रवेश दिया जाता है। शौर्य स्मारक का रख-रखाव भोपाल स्थित भारतीय सेनामध्य प्रदेश प्रशासन द्वारा किया जाता है। प्रवेश समय दोपहर १२:०० से शाम ७:०० तक है तथा बुधवार को अवकाश है।

आकर्षण और विशेषताएँ[संपादित करें]

शौर्य स्मारक, भोपाल के प्रमुख आकर्षण और विशेषताएँ निम्नवत हैं :-

  • शौर्य स्मारक स्तम्भ - श्वेत गुलाब के बगीचों से घिरा हुआ शौर्य स्मारक स्तम्भ ग्रेनाइट पत्थर से बना ६२ फुट ऊँचा स्तम्भ है।
  • श्वेत गुलाब का बगीचा - एक मनमोहक दृश्य व खुशबू बिखेरता है।
  • अनंत ज्योति - शौर्य स्मारक स्तम्भ की नींव के पास जलने वाली अत्याधुनिक होलोग्राफिक अनंत ज्योति सैनिकों के बलिदान की याद दिलाती है।
  • संग्रहाल - तीनों सेनाओं की यादों को चित्रों में संजोए हुए संग्रहालय में परमवीर चक्र, महावीर चक्र जैसे शौर्य पुरस्कारों को देखा जा सकता है साथ ही भारतीय सेना के तीनों सशस्त्र बलों के विभिन्न डायोरमाज तथा हवाई जहाज, टैंक्स, तथा पानी के जहाजों के लघु मॉडल्स आकर्षण का केन्द्र हैं।
  • शौर्य चलचित्र - सेना के प्रशिक्षण और जीवन को चल चित्र के रूप में आम आदमी तक पहुँचाने के लिए चल चित्र की व्यवस्था की गयी है।
  • युद्ध और गोलियों की आवाजें - दर्शकों के लिए युद्ध जैसा वातावरण तैयार करने के लिए स्मारक युद्ध व गोलियों की आवाजों से गूंजता रहता है।
  • सियाचिन दर्शन - एक छोटे से कक्ष में कृत्रिम रूप से बनाए गए सियाचिन के वातावरण को देखा जा सकता है।

चित्रदीर्घा[संपादित करें]

सन्दर्भ[संपादित करें]