मेथी

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Amrutam अमृतमपत्रिका, ग्वालियर।

मैथी के अलावा एक और औषधि भी होती है। जिसे वनमेथी कहते हैं।

भावप्रकाश निघण्टु ग्रन्थ में वनमेथी कई बार में संस्कृत का श्लोक का वर्णन है आयुर्वेद के अनुसार वन मेथी को चन्द्रशूर भी कहते हैं। जाने वन मैथी के फायदे-

अथ चन्द्रशूरस्य नामानि गुणाश्चाह चन्द्रिका चर्महन्त्री च पशुमेहनकारिका नन्दिनी कारवी भद्रा वासपुष्पा सुवासरा ॥१६॥ चन्द्रशूरं हितं हिक्कावातश्लेष्मातिसारिणाम् । असृग्वातगदद्वेषि वलपुष्टिविवर्द्धनम् ।।१७।। अर्थात- चनसूर के नाम तथा गुण-चन्द्रिका, चर्महन्त्री, पशुमेहनकारिका, नन्दिनी, कारवी, भद्रा, वासपुष्पा और सुवासरा ये नाम चनसूर के हैं। चनसूर हिचकी, वात-श्लेष्मा और अतिसार प्रस्त रोगी तथा रक्तवातमस्त रोगियों के लिए हितकर है और बल तथा पुष्टिवर्धक भी है।

वनमेथी के अन्य नाम…हि०-वनमेथी, जङ्गली मेथी पं० सिजी सिन्ध०-जिर अ०-अक्लिल्-उल्-मलिका। अं० Sweet-cloves (स्वीट् क्लोहस्) ले० Melilotus parviflora Desf. (मेलिलोटस् पार्विफ्लोरा); Syn. Trifolium indicum Linn. (ट्रिफोलिअम् इण्डिकम्) | Fam. Leguminosae (लेम्युमिनोसी)। पश्चिम प्रायद्वीप, बंगाल और उत्तरप्रदेश आदि स्थानों में यह आप ही आप उत्पन्न होती है। इसका क्षुप ३० से ४५ मि.मी. ऊँचा तथा वर्षायु होता है।

पत्र- संयुक्त तथा त्रिपत्रक होते हैं। पत्रक- १२ से १६×८ से १० मि.मी., दन्तुर, अर्धभालाकार या अर्थ अंडाकार होते हैं। पुष्प सूक्ष्म, पीतवर्ण की मंजरियों में आते हैं। फली- दीर्घवृत्ताकार, दबी हुई, दोनों छोर पर पतली एवं २.५ मि.मी. लंबे एक बीज युक्त होती है।

गुण और प्रयोग-इसके बीज ग्राही होते हैं तथा उदरशूल, अतिसार और आंत्र के विकारों में लाभदायक है। इसका व्यवहार कष्टार्तव आमवात, गण्डमाला आदि में तथा रक्त शुद्धि के लिये किया जाता है। बच्चों के अतिसार में इसकी लप्सी का व्यवहार करते हैं।


मेथी
Illustration Trigonella foenum-graecum0 clean.jpg
वैज्ञानिक वर्गीकरण
जगत: पादप
विभाग: सपुष्पक
वर्ग: Magnoliopsida
गण: Fabales
कुल: फैबेसी
वंश: Trigonella
जाति: T. foenum-graecum
द्विपद नाम
Trigonella foenum-graecum
L.[1]

मेथी एक वनस्पति है जिसका पौधा १ फुट से छोटा होता है। इसकी पत्तियाँ साग बनाने के काम आतीं हैं तथा इसके दाने मसाले के रूप में प्रयुक्त होते हैं। स्वास्थ्य की दृष्टि से यह बहुत गुणकारी है।

मेथी का पौधा एक छोटा सा पौधा है जिसमें हरे पत्ते, छोटे सफेद फूल और फली होती है जिसमें छोटे, सुनहरे-भूरे रंग के बीज होते हैं। यह पौधा 2-3 फीट तक बढ़ सकता है। भारतीय आमतौर पर मेथी के पौधे का उपयोग सब्जियों या पराठों में करते हैं। मेथी दाना मेथी के पौधे के सुनहरे-भूरे रंग के बीज होते हैं. बीज का उपयोग ख़ास कर खाना पकाने में और दवा में किया जाता है। भारत में मेथी के बीज और पाउडर का उपयोग काफी सदियों से किया जा रहा हे. खाना पकने और दवाई के अलावा यह साबुन और शैम्पू जैसे उत्पादों में भी पाया जा सकता है। मेथी दाना के fayde अनेक हे. मेथी को मधुमेह, मासिक धर्म में ऐंठन, उच्च कोलेस्ट्रॉल और कई अन्य स्थितियों के लिए लिया जाता है.

मेथी पानी के फायदे मेथी के पानी का सेवन मेथी के बीजों के सेवन का एक शानदार तरीका है। यदि आप मेथी को अपने सब्जियों में नहीं जोड़ते हैं, तो यह एक आसान तरीका है जिसे आप रोजाना कर सकते हैं। 1. मेथी फाइबर से भरी होती है जो आपको परिपूर्णता का एहसास देती है। इससे आपको अपने वजन को प्रबंधित करने में मदद मिलती है। जब आप भरा हुआ महसूस करते हैं, तो आप ज़्यादा खाना नहीं खाते हैं और बार-बार खाने से भी बचते हैं। यह ब्लोटिंग को भी रोकता है। 2. मेथी के पानी का सेवन बालों के विकास को बढ़ावा देगा, बालों की मात्रा में सुधार करेगा और बालों की समस्याओं जैसे रूसी, खुरदरापन से छुटकारा दिलाएगा। 3. मेथी का पानी आपके शरीर से हानिकारक विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने में मदद करता है. यह पाचन समस्याओं से लड़ने में आपकी मदद करता है। यह कब्ज, अन्य पाचन समस्याओं के बीच अपच को रोकता है। 4. मेथी का पानी रक्त शर्करा के स्तर को नियंत्रित करने में मदद करता है। मेथी के बीज में एमिनो एसिड यौगिक अग्न्याशय में इंसुलिन स्राव को बढ़ाते हैं जो शरीर में रक्त शर्करा के स्तर को कम करने में मदद करता है। 6. मेथी का पानी पीने से रक्त में खराब कोलेस्ट्रॉल को कम करने में मदद मिलती है और ये हृदय की समस्याओं के जोखिम को रोकते हैं।[कृपया उद्धरण जोड़ें]

Fenugreek seeds(मेथी)

चित्रदीर्घा[संपादित करें]

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. "Trigonella foenum-graecum information from NPGS/GRIN". www.ars-grin.gov. मूल से 5 जनवरी 2009 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 2008-03-13.

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]