पन्ना, मध्य प्रदेश

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पन्ना
नगर
पन्ना की मध्य प्रदेश के मानचित्र पर अवस्थिति
पन्ना
पन्ना
Location in Madhya Pradesh, India
निर्देशांक: 24°16′N 80°10′E / 24.27°N 80.17°E / 24.27; 80.17निर्देशांक: 24°16′N 80°10′E / 24.27°N 80.17°E / 24.27; 80.17
देशFlag of India.svg भारत
राज्यमध्य प्रदेश
जिलापन्ना
ऊँचाई416 मी (1,365 फीट)
जनसंख्या (2011)
 • कुल59,820
भाषा
 • आधिकारिकहिन्दी
समय मण्डलIST (यूटीसी+5:30)
आई॰एस॰ओ॰ ३१६६ कोडIN-MP
वाहन पंजीकरणएमपी-35
वेबसाइटwww.panna.nic.in

पन्ना, मध्य प्रदेश, भारत में स्थित एक नगर है। यह पौराणेतहासिक नगर है इसका उल्लेख विष्णु पुराण और पद्मपुराण में किलकिल प्रदेश से आता है जो वाकाटक वंश की उत्पत्ति स्थल है। नागवंश की कुलदेवी पद्मावती किलकिला नदी के तीरे विराजित हैं इसके कारण इसका नाम पद्मा और बाद में परना झिरना और पन्ना हुआ। 1675 में बुंदेलखंड के शासक छत्रसाल द्वारा उनके आध्यात्मिक गुरु स्वामी प्राणनाथ के आदेश पर राजधानी बनाए जाने के कारण इस शहर का महत्त्व बढ़ गया। यहाँ स्थित ऐतिहासिक महत्त्व के भवनों में संगमरमर के गुंबद वाला स्वामी प्राणनाथ मंदिर (1795) और श्री बलदेवजी मंदिर शामिल हैं। और बुंदेलखण्ड के प्रसिद्ध श्री युगलकिशोर मंदिर में देश की भगवान श्रीकृष्ण का अष्टसिद्ध शालिगराम विग्रह है। पन्ना स्थित बलदेव मंदिर लंदन पैलेस श्रेणी पर आधारित है। पन्ना स्थित प्राणनाथ मंदिर प्रगमी संप्रदाय के लोगो का प्रमुख केंद्र है। महाभारत कालीन विराट नगर की पहचान यहां के बरहटा से की जाती है। 1921 में यहाँ नगरपालिका गठन हुआ था। इसके आसपास के क्षेत्र मुख्यत: भूतपूर्व पन्ना और अजयगढ़ रियासतों के हिस्से हैं। इसमें पन्ना श्रृंखला नामक पर्वतीय क्षेत्र भी शामिल है, जो विंध्य श्रृंखला की शाखा है।

इतिहास[संपादित करें]

पन्ना एक ऐतिहासिक नगर यह नगर भारत के राज्य मध्य प्रदेश के उत्तरी भाग में स्थित है। बुंदेलखंड की रियासत के रूप में इस नगर को बुंदेला नरेश छत्रसाल ने औरंगजेब की मृत्यु (1707 ई.) के पश्चात् अपने राज्य की राजधानी बनाया। मुग़ल सम्राट बहादुरशाह ने 1708 ई.में छत्रसाल की सत्ता को मान लिया। पन्ना में स्थित ऐतिहासिक महत्त्व के भवनों में संगमरमर के गुंबद वाला स्वामी प्राणनाथ मंदिर (1795 ई.) और श्री बलदेवजी मंदिर शामिल हैं। पन्ना में पद्मावती देवी का एक मंदिर है, जो उत्तर-पश्चिम में स्थित पौराणिक किल-किला नदी के पास आज भी स्थित है। स्थानीय जनश्रुति है कि प्राचीन काल में पन्ना की बस्ती किल-किला नदी के उस पार थी जहाँ राजगौंड और कोल लोगों का राज्य था। पन्ना से 2 मील उत्तर की ओर महाराज छत्रसाल का पुराना महल आज भी खण्डहर रूप में विद्यमान है। पन्ना को अठारहवीं-उन्नीसवीं सदी में पर्णा भी कहते थे। यह नाम तत्कालीन राज्यपत्रों में उल्लिखित है।

बाघ आरक्षित क्षेत्र[संपादित करें]

पन्ना में एक बाघ आरक्षित क्षेत्र है, जिसे पन्ना राष्ट्रीय उद्यान कहा जाता है। पन्ना में बाघों की देख-रेख हाल के वर्षों में गिर गई है, और प्राकृतिक बाघों की आबादी के आंकड़े विवादास्पद हैं। यहाँ 2009 में योजना बना कर दो बाघों को स्थानांतरित किया गया[1][2], लेकिन एक नर बाघ गायब हो गया।[3] फिर वहाँ पुन: एक नर बाघ को वहां स्थानांतरित किया गया। पुनर्स्थापित बाघों में से एक ने यहाँ 2010 में तीन शावकों को जन्म दिया।[4]

उद्योग[संपादित करें]

पन्ना में हीरे की महत्त्वपूर्ण ख़ानें हैं, जिनमें 17वीं शताब्दी से खुदाई हो रही है। यह भारत में हीरा उत्पादन करने वाला एकमात्र खदान क्षेत्र है। पन्ना कृषि उत्पादों, इमारती लकड़ियों और वस्त्र व्यापार का केंद्र है; हथकरघा व बुनाई यहाँ के मुख्य उद्योग हैं। चावल, गेहूं, ज्वार और तिलहन यहाँ की मुख्य फ़सलें हैं। यहाँ कई मत्स्यपालन केंद्र भी हैं।

महाविद्यालय[संपादित करें]

पन्ना में डाॅ हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय से संबद्ध महाविद्यालय हैं।

पन्ना के लोग[संपादित करें]

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. http://www.hindustantimes.com/StoryPage/StoryPage.aspx?id=897fa85e-5f56-41ec-a202-23ac52825cce
  2. http://www.centralchronicle.com/20081103/0311303.htm
  3. http://articles.timesofindia.indiatimes.com/2009-03-28/india/28031044_1_panna-tiger-reserve-male-tiger-kanha-national-park
  4. http://articles.timesofindia.indiatimes.com/2010-05-09/flora-fauna/28275615_1_translocated-panna-reserve-madhya-pradesh-s-panna