कैलाश सत्यार्थी

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कैलाश सत्यार्थी
Kailash Satyarthi.jpg
कैलाश सत्यार्थी
जन्म 11 जनवरी 1954 (1954-01-11) (आयु 64)
विदिशा, मध्य प्रदेश, भारत
राष्ट्रीयता भारतीय
शिक्षा सम्राट अशोक प्रौद्योगिकी संस्थान, विदिशा[1]
व्यवसाय बाल अधिकार कार्यकर्ता, प्रारंभिक बाल शिक्षा कार्यकर्ता[1]
धार्मिक मान्यता हिन्दू
पुरस्कार दी अचेनर अंतर्राष्ट्रीय शान्ति पुरस्कार, जर्मनी (१९९४)
रोबर्ट एफ॰ कैनेडी मानवाधिकार पुरस्कार (१९९५)
इतालवी सीनेट का पदक (२००७)
अल्फोंसो कोमिन अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार (२००८)
लोकतंत्र के रक्षक पुरस्कार (२००९)
नोबेल शान्ति पुरस्कार (२०१४)[2]
वेबसाइट
kailashsatyarthi.net

कैलाश सत्यार्थी (जन्म: 11 जनवरी 1954) एक भारतीय बाल अधिकार कार्यकर्ता और बाल-श्रम के विरुद्ध पक्षधर हैं। उन्होंने १९८० में बचपन बचाओ आन्दोलन की स्थापना की जिसके बाद से वे विश्व भर के १४४ देशों के ८३,००० से अधिक बच्चों के अधिकारों की रक्षा के लिए कार्य कर चुके हैं। सत्यार्थी के कार्यों के कारण ही वर्ष १९९९ में अंतरराष्ट्रीय श्रम संघ द्वारा बाल श्रम की निकृष्टतम श्रेणियों पर संधि सं॰ १८२ को अंगीकृत किया गया, जो अब दुनियाभर की सरकारों के लिए इस क्षेत्र में एक प्रमुख मार्गनिर्देशक है।[कृपया उद्धरण जोड़ें]

उनके कार्यों को विभिन्न राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सम्मानों व पुरस्कारों द्वारा सम्मानित किया गया है। इन पुरस्कारों में वर्ष २०१४ का नोबेल शान्ति पुरस्कार भी शामिल है जो उन्हें पाकिस्तान की नारी शिक्षा कार्यकर्ता मलाला युसुफ़ज़ई के साथ सम्मिलित रूप से प्रदान किया गया है।[3]

परिचय[संपादित करें]

भारत के मध्य प्रदेश के विदिशा में जन्मे कैलाश सत्यार्थी 'बचपन बचाओ आंदोलन' चलाते हैं। वे पेशे से वैद्युत इंजीनियर हैं किन्तु उन्होने 26 वर्ष की उम्र में ही करियर छोड़कर बच्चों के लिए काम करना शुरू कर दिया था। इस समय वे 'ग्लोबल मार्च अगेंस्ट चाइल्ड लेबर' (बाल श्रम के ख़िलाफ़ वैश्विक अभियान) के अध्यक्ष भी हैं।[3]

वर्तमान समय (अक्टूबर २०१४) में सत्यार्थी नई दिल्ली में रहते हैं। उनके परिवार में उनकी पत्नी सुमेधा, पुत्र, पुत्रवधू तथा पुत्री हैं। सामाजिक कार्यों के अतिरिक्त वे एक अच्छे पाकशास्त्री (कुक) भी हैं।


भारत यात्रा, बाल तस्करी और यौन शोषण के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए केएससीएफ द्वारा शुरू की गई थी। 11 सितंबर, 2017 को कैलाश सत्यार्थी द्वारा कन्याकुमारी में लॉन्च किया गया, यह अभियान 22 भारतीय राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों और 12,000 किमी से अधिक के सात मार्गों के माध्यम से चला गया। इस अभियान का उद्देश्य बच्चों के यौन शोषण और बाल तस्करी के बारे में एक सामाजिक वार्ता शुरू करना था, अब तक भारत में अपने घरों, समुदायों, स्कूलों में कमजोर बच्चों की रक्षा के लिए भारत में निषिद्ध मुद्दों का सामना करना पड़ा। अभियान ने 5,000 नागरिक समाज संगठनों के साथ सहयोग किया, 60 से अधिक भारतीय विश्वास नेता, 500 भारतीय राजनीतिक नेताओं, 600 स्थानीय, भारतीय सरकार के राज्य और राष्ट्रीय निकाय, भारतीय न्यायपालिका के 300 सदस्य, और भारत भर में 25,000 शैक्षणिक संस्थान।

भारत यात्रा में 35 दिनों से अधिक 1,200,000 से अधिक मार्करों की भागीदारी देखी गई।

पुरस्कार एवं सम्मान[संपादित करें]

  • 2015 :हार्वर्ड विश्वविद्यालय के प्रतिष्ठित पुरस्कार "ह्युमेनीटेरियन पुरस्कार " से सम्मानित। यह पुरस्कार सबसे पहले भारत में सत्यार्थी को प्राप्त हुआ है। [4]
  • 2014: नोबेल शांति पुरस्कार
  • 2009: डिफेण्डर्स ऑफ डेमोक्रैसी पुरस्कार (अमेरिका)
  • 2008: अल्फांसो कोमिन अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार (स्पेन)
  • 2007: इटली के सिनेट का स्वर्ण पदक
  • 2007: अमेरिका के स्टेट विभाग द्वारा 'आधुनिक दासता को समाप्त करने के लिये कार्यरत नायक' का सम्मान
  • 2006: फ्रीडम पुरस्कार (US)
  • 2002: वालेनबर्ग मेडल (मिशिगन विश्वविद्यालय द्वारा प्रदत्त)
  • 1998: गोल्डेन फ्लैग पुरस्कार (नीदरलैण्ड्स)
  • 1995: रॉबर्ट एफ केनेडी मानव अधिकार पुरस्कार (अमेरिका)
  • 1995: ट्रम्पेटर पुरस्कार (अमेरिका)
  • 1993: अशोक फेलो चुने गये। (अमेरिका)

सन्दर्भ[संपादित करें]

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]