कर्तव्यवैज्ञानिक नीतिशास्त्र

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कर्तव्यवैज्ञानिक नीतिशास्त्र या कर्तव्यविज्ञान (अंग्रेज़ी: Deontological ethics or Deontology) (यूनानी δέον से, डिऑन, "कर्तव्य", "दायित्व")[1] वह मानदण्डक नीतिशास्त्रीय स्थिति हैं, जो किसी कार्य की नैतिकता को नियम या नियमों के अनुपालन के आधार पर, जज करती हैं।[2] कभी-कभी, इसका वर्णन "कर्तव्य-" या "दायित्व-" या "नियम-" आधारित नीतिशास्त्र के रूप में होता हैं, क्योंकि नियम "आपको आपके कर्तव्य से बाँधते हैं"।[3] सामान्यतः, कर्तव्यवैज्ञानिक नीतिशास्त्र को परिणामवाद,[4] गुण नीतिशास्त्र और व्यवहारिक नीतिशास्त्र के विपरीत माना जाता हैं। इस पारिभाषिकी में, कार्य, परिणाम से अधिक महत्त्वपूर्ण हैं।

पारिभाषिकी[संपादित करें]

कर्तव्यवैज्ञानिक दर्शन[संपादित करें]

काण्टवाद[संपादित करें]

नैतिक एब्सोल्यूटिज़म[संपादित करें]

दिव्य आदेश सिद्धान्त[संपादित करें]

समाकालीन कर्तव्यविज्ञान[संपादित करें]

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

नोट्स[संपादित करें]

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. क्रिया δέω से, "जोड़ना, बाँधना, अटकाना", वर्तमान कृदन्त deont- द्वारा + प्रत्यय -लोजिया, जिसका प्रथम प्रयोग 1826 में हुआ।
  2. "Ethics-virtue", Stanford Encyclopedia of Philosophy
  3. Waller, Bruce N. 2005. Consider Ethics: Theory, Readings, and Contemporary Issues. New York: Pearson Longman: 23.
  4. Flew, Antony. 1979. "Consequentialism". In A Dictionary of Philosophy (2nd Ed.). New York: St Martins: 73.

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]

साँचा:Jurisprudence