उदय शंकर

मुक्त ज्ञानकोश विकिपीडिया से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज
Uday Shankar
Uday Shankar, 1930s.jpg
जन्म 8 दिसम्बर 1900
Udaipur, Rajasthan
मृत्यु 26 सितंबर 1977 (aged 76)
Kolkata
राष्ट्रीयता भारतn
शिक्षा प्राप्त की Royal College of Art[*], Sir Jamsetjee Jeejebhoy School of Art[*]
व्यवसाय Dancer, choreographer
जीवनसाथी Amala Shankar
बच्चे Ananda Shankar, Mamta Shankar
पुरस्कार Sangeet Natak Akademi Award[*], Padma Vibhushan in arts[*]

उदय शंकर (8 दिसम्बर 1900 - 26 सितंबर 1977) (बांग्ला: উদয় শংকর) भारत में आधुनिक नृत्य के जन्मदाता और एक विश्व प्रसिद्ध भारतीय नर्तक एवं नृत्य-निर्देशक (कोरियोग्राफर) थे जिन्हें अधिकतर भारतीय शास्त्रीय, लोक और जनजातीय नृत्य के तत्वों में पिरोये गए पारंपरिक भारतीय शास्त्रीय नृत्य में पश्चिमी रंगमंचीय तकनीकों को अपनाने के लिए जाना जाता है; इस प्रकार उन्होंने आधुनिक भारतीय नृत्य की नींव रखी और बाद में 1920 और 1930 के दशक में उसे भारत, यूरोप और संयुक्त राज्य अमेरिका में लोकप्रिय बनाया और भारतीय नृत्य को दुनिया के मानचित्र पर प्रभावशाली ढंग से स्थापित किया।[1][2][3][4][5].

1962 में उन्हें भारत की संगीत, नृत्य और नाटक की राष्ट्रीय अकादमी 'संगीत नाटक अकादमी' द्वारा इसके सर्वोच्च पुरस्कार, 'जीवनपर्यंत उपलब्धि के लिए संगीत नाटक अकादमी फेलोशिप' से सम्मानित किया गया था; और 1971 में भारत सरकार ने उन्हें अपने दूसरे सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार पद्म विभूषण से सम्मानित किया था। विश्वभारती द्वारा १९७५ में उन्हें "देशी कोत्तम" सम्मान प्रदान किया गया।[6]

प्रारंभिक जीवन और शिक्षा[संपादित करें]

राजस्थान के उदयपुर में पैदा हुए उदय शंकर चौधरी मूलतः नरैल (वर्तमान बांग्लादेश) के एक बंगाली परिवार से संबंधित थे। उसके पिता एक प्रख्यात वकील श्याम शंकर चौधरी अपने सबसे बड़े पुत्र के जन्म से समय राजस्थान में झालावाड़ के महाराजा के यहां कार्यरत थे जबकि उनकी मां हेमांगिनी देवी एक बंगाली जमींदारी परिवार की वंशज थीं। उनके पिता को नवाबों द्वारा "हरचौधरी" की उपाधि प्रदान की गयी थी लेकिन वे अपने उपनाम से "हर" को हटाकर सिर्फ 'चौधरी' का प्रयोग करना पसंद करते थे। उनके छोटे भाई राजेन्द्र शंकर, देबेन्द्र शंकर, भूपेन्द्र शंकर और 1926 में पैदा हुए रवि शंकर थे जिनमें से भूपेंद्र की मौत 1926 में कम उम्र में ही हो गयी थी।[7][8]

उनके पिता संस्कृत के विद्वान थे जिन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय से स्नातक की उपाधि प्राप्त की थी और बाद में ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में अध्ययन किया था जहां वे डॉक्टर ऑफ फिलोसफी बने थे।[9] क्योंकि उनके पिता को अपने काम के संदर्भ में बहुत अधिक घूमना पड़ता था, इसलिए उनके परिवार ने ज्यादातर समय उदय के मामा के घर नसरतपुर में उनकी माँ और भाइयों के साथ बिताया था। उदय की पढ़ाई भी विभिन्न स्थानों पर हुई जिनमें नसरतपुर, गाज़ीपुर, वाराणसी और झालावाड़ शामिल हैं। अपने गाज़ीपुर के स्कूल में उन्होंने अपने चित्रकला एवं शिल्पकला के शिक्षक अंबिका चरण मुखोपाध्याय से संगीत और फोटोग्राफी की शिक्षा प्राप्त की थी।[9]

1918 में अठारह वर्ष की आयु में उन्हें जे.जे. स्कूल ऑफ आर्ट और उसके बाद गंधर्व महाविद्यालय में प्रशिक्षण के लिए मुंबई भेजा गया था।[10] तब तक श्याम शंकर ने झालावाड़ में अपने पद से इस्तीफा दे दिया था और लंदन चले गए थे, यहाँ उन्होंने अंग्रेज महिला से शादी कर ली और एक शौकिया संयोजक (इम्प्रेसारियो) बनने से पहले कानून की प्रैक्टिस करने लगे, इस दौरान उन्होंने ब्रिटेन में भारतीय संगीत और नृत्य की शुरुआत की. बाद में उदय अपने पिता के साथ शामिल हो गए और 23 अगस्त 1920 को सर विलियम रोथेंस्टीन के अधीन चित्रकारी का अध्ययन करने के लिए लंदन के रॉयल कॉलेज ऑफ आर्ट में दाखिला ले लिया। यहां उन्होंने अपने पिता द्वारा लंदन में आयोजित करवाए गए कुछ चैरिटी कार्यक्रमों में नृत्य का प्रदर्शन किया, ऐसे ही एक अवसर पर प्रख्यात रूसी बैले नर्तकी अन्ना पावलोवा भी मौजूद थीं, यह उनके करियर में दीर्घकालिक प्रभाव डालने वाली घटना बनी.[11]

करियर[संपादित करें]

उदय शंकर और अन्ना पावलोवा 1923 के प्रसिद्ध नृत्य-नाट्य 'राधा कृष्ण' में.

उदय शंकर ने भारतीय शास्त्रीय नृत्य के किसी भी स्वरूप में कोई औपचारिक प्रशिक्षण नहीं लिया था, उनकी प्रस्तुतियां रचनात्मक थीं।[12] हालांकि कम उम्र से ही वे भारतीय शास्त्रीय और लोक नृत्य शैलियों के संपर्क में आते रहे थे, यूरोप में रहने के दौरान वे बैले से इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने दोनों शैलियों के तत्वों को मिलाकर नृत्य की एक नयी शैली की रचना करने का फैसला कर लिया जिसे हाई-डांस (hi-dance) कहा गया। उन्होंने भारतीय शास्त्रीय नृत्य के स्वरूपों और उनके प्रतीकों को नृत्य रूप प्रदान किया; इसके लिए उन्होंने ब्रिटिश संग्रहालय में राजपूत चित्रकला और मुगल चित्रकला की शैलियों का अध्ययन किया था। इसके अलावा ब्रिटेन में अपने प्रवास के दौरान वे नृत्य प्रदर्शन करने वाले कई कलाकारों के संपर्क में आये, बाद में वे फ्रांसीसी सरकार के वजीफे 'प्रिक्स डी रोम' पर कला में उच्च-स्तरीय अध्ययन के लिए रोम चले गए।

शीघ्र ही इस तरह के कलाकारों के साथ उनका संपर्क बढ़ गया, साथ ही भारतीय नृत्य करने को एक समकालीन रूप देने का उनका विचार भी मजबूत हुआ। उनकी कामयाबी के रास्ते में क्रांतिकारी परिवर्तन प्रख्यात रूसी बैले नर्तकी अन्ना पावलोवा से एक मुलाक़ात के रूप में आया। वे भारत आधारित विषयों पर सहयोग के लिए कलाकारों की खोज में थीं। इसी के कारण हिन्दू विषयों पर आधारित बैले की रचना हुई जिसमें अन्ना के साथ एक युगल 'राधा-कृष्णा' और 'हिंदू विवाह' को अन्ना के प्रोडक्शन 'ओरिएंटल इम्प्रेशंस' में शामिल किया गया था। इस बैले का प्रदर्शन लंदन के कोवेंट गार्डन में स्थित रॉयल ओपेरा हाउस में किया गया था। बाद में भी वे बैले की रचना और कोरियोग्राफी में जुटे रहे जिनमें से एक अजन्ता गुफाओं के भित्तिचित्रों पर आधारित है, साथ ही उन्होंने अन्ना के साथ संपूर्ण संयुक्त राज्य अमेरिका में प्रदर्शन किया,[13] इस दौरान उनकी नृत्य शैली को उन दिनों "हाई डांस" के रूप में जाना गया, हालांकि बाद में उन्होंने इसे "क्रिएटिव डांस (रचनात्मक नृत्य)" कहा.[14]

पेरिस में अपने बूते पर काम शुरू करने से पहले उन्होंने अन्ना के साथ डेढ़ वर्ष तक काम किया।

'उदय शंकर नृत्य-नाट्य ट्रूप' ई. (1935-1937).

शंकर, एक फ्रेंच पियानोवादक साइमन बार्बियरे जो अब उनके शिष्य और डांस पार्टनर बन गए थे और एक स्विस संगतराशnl:Alice Boners, एलिस बोन्नर जो भारतीय कला के इतिहास का अध्ययन करना चाहते थे, को साथ लेकर 1927 में भारत लौटे. उनका स्वागत स्वयं रवींद्रनाथ टैगोर ने किया और भारत में प्रदर्शन कला का एक विद्यालय खोलने के लिए उन्हें राजी भी कर लिया।

1931 में पेरिस वापस लौटने पर उन्होंने अपने एक पुराने शिष्य स्विस संगतराश एलिस बोनर के साथ यूरोप की पहली भारतीय नृत्य कंपनी की स्थापना की. वहाँ संगीतकारों विष्णु दास शिराली और तिमिर बारान के साथ मिलकर उन्होंने अपनी नव विकसित नृत्य गतिविधियों को शामिल करने के लिए संगीत के एक नए टेम्पलेट की रचना की. नृत्य प्रदर्शन की उनकी पहली श्रृंखला 3 मार्च 1931 को पेरिस में चैम्प्स-एलिसीज थिएटर में आयोजित की गयी थी जो उनकी बुनियाद बनी क्योंकि उन्होंने पूरे यूरोप का दौरा किया, साथ ही फ्रांसीसी नर्तकों और कोरियोग्राफरों के साथ अपने संपर्क का विस्तार किया।[15]

जल्द ही उन्होंने संयोजक सोल हुरोक और संयोजक आरोन रिचमोंड की सेलिब्रिटी सीरीज ऑफ बोस्टन के तत्वावधान में 'उदय शंकर एंड हिज हिंदू बैले' शीर्षक से अपनी मंडली के साथ पूरे पश्चिमी जगत - यूरोप और अमेरिका में सात-वर्षों का एक दौरा शुरू किया। उन्होंने अमेरिका में अपना पहला प्रदर्शन अपने डांस पार्टनर, एक फ्रेंच डांसर सिमकी के साथ जनवरी 1933 में न्यूयॉर्क में किया था; उसके बाद वे अपनी मंडली के साथ 84 शहरों के एक दौरे पर निकल गए।[16][17]

भारतीय नृत्य में पश्चिमी नाट्य तकनीकों के उनके अनुकूलन ने उनकी कला को भारत और पश्चिमी जगत दोनों में बेहद लोकप्रिय बना दिया और उन्हें उचित रूप से पारंपरिक भारतीय मंदिर नृत्यों में पुनर्जागरण के एक युग की शुरुआत करने का श्रेय दिया जाता है, जिन्हें आज भी उनकी सख्त व्याख्याओं के लिए जाना जाता है और जो उनकी अपनी जिंदगी में भी पूरी तरह से व्याप्त था जबकि उनके बड़े भाई रवि शंकर ने भारतीय शास्त्रीय संगीत को पश्चिम में लोकप्रिय बनाने में मदद की.

उदय शंकर और आमला शंकर द्वारा प्रदर्शित फिल्म कल्पना, 1948

1936 में उन्हें लियोनार्ड नाईट एल्महर्स्ट द्वारा उनकी मंडली और मुख्य डांसर सिमकी के साथ छः महीने के प्रवास के लिए डार्टिंगटन हॉल, टोटनेस, डोवन आने के लिए आमंत्रित किया गया था, नाईट वह व्यक्ति थे जिन्होंने पहले शांति निकेतन के करीब श्रीनिकेतन के निर्माण में रवीन्द्रनाथ टैगोर की सहायता थी। इसके अलावा उन दिनों रूसी नाटककार एंटन चेखव के भतीजे, मिशेल चेखव, जर्मन आधुनिक नर्तकी-कोरियोग्राफर, कर्ट जोस और अन्य जर्मन रुडोल्फ लाबान भी वहां मौजूद थे जिन्होंने डांस नोटेशन का आविष्कार किया था, इस अनुभव ने उनके भावात्मक नृत्य में और अधिक उत्साह भर दिया.[18]

1938 में उन्होंने भारत को अपना आधार बनाया और उत्तराखंड हिमालय के अल्मोड़ा से 3 किमी दूर सिमतोला में 'उदय शंकर इंडिया कल्चरल सेंटर' की स्थापना की, उन्होंने कथकली के लिए शंकरण नम्बूदरी को, भरतनाट्यम के लिए कंडप्पा पिल्लई को, मणिपुरी के लिए अम्बी सिंह को और संगीत के लिए उस्ताद अलाउद्दीन खान को आमंत्रित किया। शीघ्र ही उनके पास गुरुदत्त, शांति बर्धन, सिमकी, अमला, सत्यवती, नरेंद्र शर्मा, रुमा गुहा ठाकुरता, प्रभात गांगुली, ज़ोहरा सहगल, उज़रा, लक्ष्मी शंकर, शांता गांधी सहित कलाकारों और नर्तकों का जमावड़ा लग गया; उनके अपने भाई राजेन्द्र, देबेन्द्र और रवि भी छात्रों के रूप में उनके साथ शामिल हो गए। हालांकि यह केंद्र चार साल अस्तित्व में रहने के बाद धन की कमी के कारण 1942 में बंद हो गया। अपने छात्रों के निराश हो जाने पर उन्होंने अपनी ऊर्जा को संचित किया और दक्षिण की ओर रुख किया जहां उन्होंने 1948 में अपनी एकमात्र फिल्म कल्पना (इमेजिनेशन) बनायी जी उनके नृत्य पर आधारित थी जिसमें उन्होंने और उनकी पत्नी अमला शंकर ने नृत्य किया था, इस फिल्म का निर्माण और फिल्मांकन मद्रास के जेमिनी स्टूडियो में किया गया था।[19]

उदय शंकर 1960 में कोलकाता के बालीगंज में बस गए जहां बाद में 1965 में "उदय शंकर नृत्य केंद्र" खोला गया था। 1962 में भारतीय नृत्य में उनके जीवन भर के योगदान के लिए उन्हें संगीत नाटक अकादमी के सर्वोच्च पुरस्कार, संगीत नाटक अकादमी फैलोशिप से सम्मानित किया गया।

निजी जिंदगी[संपादित करें]

उन्होंने अमला शंकर से शादी की थी और 1942 में उनके यहां एक पुत्र आनंद शंकर और 1955 में एक पुत्री ममता शंकर पैदा हुई थी। जबकि आनंद शंकर एक संगीतकार और संगीत कम्पोजर थे जिन्होंने अपने चाचा रवि शंकर की बजाय डॉ॰ लालमणि मिश्रा से प्रशिक्षण प्राप्त किया था और उस समय अपने फ्यूजन संगीत के लिए जाने गए थे जिसमें पश्चिमी और भारतीय संगीत शैलियों दोनों को शामिल किया गया था। ममता शंकर अपने माता-पिता की तरह एक नर्तकी थी जो एक प्रख्यात अभिनेत्री बन गई जिन्होंने सत्यजीत रे और मृणाल सेन की फिल्मों में काम किया, वे कोलकाता में 'उदयन डांस कंपनी' भी चलाती हैं और दुनिया भर में व्यापक रूप से यात्राएं करती हैं।[20]

विरासत[संपादित करें]

1977 में उनकी मृत्यु के बाद अमला शंकर ने कोलकाता स्कूल का जिम्मा संभाल लिया जो लोक और शास्त्रीय नृत्य, नवीनीकरण, वेशभूषा डिजाइन आदि में निरंतर प्रशिक्षण प्रदान करती आ रही है। 1991 में उन्हें पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था। उनके बेटे आनंद शंकर की पत्नी तनुश्री शंकर भी 'तनुश्री शंकर डांस कंपनी' के अधीन भारतीय आधुनिक नृत्य की अपनी शैली का अध्यापन और प्रदर्शन करती आ रही हैं।[21] वर्षों के बाद अल्मोड़ा में उनके स्कूल को भंग कर दिया गया, लेकिन उनके शिष्य और सहयोगी नृत्य की उनकी आविष्कारी शैली और उनके अपने कार्यों के माध्यम से उनके सौंदर्य का प्रचार-प्रसार करने में जुटे रहे. कई लोगों ने अपनी स्वयं की कंपनियां बना ली, इस प्रकार उनकी रचनाओं के व्यापक भण्डार की चिरस्थायी विरासत और नर्तकों पर उनकी पीढ़ी के प्रभाव को संजो कर रखा गया। इनमें से एक शांति बर्धन थे जिन्होंने कठपुतलियों की तरह प्रदर्शन करने वाले मनुष्यों का इस्तेमाल कर रामायण बैले प्रस्तुतियों की रचना की और पक्षियों एवं पशुओं की गतिविधियों की रचना करते हुए पंचतंत्र की कथाओं को भी नृत्यों में पेश किया। उनके स्कूल में शिक्षा ग्रहण करने वाले गुरुदत्त भारत के बेहतरीन फिल्म निर्देशकों में से एक बने. एक छात्रा लक्ष्मी शंकर जिन्होंने आगे चलकर अपनी धारा बदल दी और एक विख्यात शास्त्रीय गायक बनीं, बाद में उन्होंने उदय शंकर के छोटे भाई राजेन्द्र शंकर से शादी की. ज़ोहरा सहगल ने भारत और ब्रिटेन दोनों जगह रंगमंच, टेलीविजन और सिनेमा में अपना करियर बनाया.[18] सत्यवती ने बाद में 1956 में लंदन के द रॉयल फेस्टिवल हॉल और एडिनबर्ग समारोह में राम गोपाल के साथ नृत्य किया। चार दशक से अधिक लंबे अपने शिक्षण करियर के दौरान उन्होंने मुंबई में हजारों छोटी लड़कियों को इस शहर के विभिन्न कॉन्वेंट स्कूलों में अपनी कक्षाओं के माध्यम से भारतीय नृत्य का प्रशिक्षण दिया.

दिसंबर 1983 में उनके छोटे भाई सितार वादक रवि शंकर ने 1923 में उनके पेशेवर जीवन की शुरुआत की 60वीं वर्षगांठ की याद में नई दिल्ली में एक चार दिवसीय महोत्सव उदय-उत्सव फेस्टिवल का आयोजन किया, जिसमें उनके शिष्यों के प्रदर्शनों, फिल्मों, एक प्रदर्शनी और स्वयं रवि शंकर द्वारा रचित एवं वाद्य यंत्रों से सुसज्जित आर्केस्ट्रा संगीत का प्रदर्शन किया गया।[3] उनकी जन्म शताब्दी समारोह का शुभारंभ 26 अप्रैल 2001 को औपचारिक रूप से पेरिस में यूनेस्को के मुख्यालय में हुआ जहां दुनिया भर के नर्तक, नृत्य-निर्देशक और विद्वान अपने गुरु को श्रद्धांजलि देने के लिए इकट्ठा हुए थे।[15]

पुरस्कार[संपादित करें]

  • 1960: संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार - 'क्रिएटिव डांस (रचनात्मक नृत्य)'[22]
  • 1962: संगीत नाटक अकादमी फेलोशिप
  • 1971: पद्म विभूषण
  • 1975: देसीकोकोट्टम, विश्व भारती विश्वविद्यालय

डिस्कोग्राफी (पूर्ण नहीं है)[संपादित करें]

1937 की ऐतिहासिक अमेरिकी यात्रा के दौरान रिकॉर्ड किये गए 'उदय शंकर कंपनी ऑफ हिंदू म्युजीशियंस' की मूल प्रति (इस एल्बम के सभी गाने एल रेकॉर्ड्स द्वारा 2007 में रिलीज किये गए "रवि शंकर: फ्लावर्स ऑफ इंडिया" में शामिल किये गए हैं)[23]

अग्रिम पठन[संपादित करें]

  • उदय शंकर एंड हिज़ आर्ट, प्रोजेश बनर्जी द्वारा. बी.आर.पब.कार्पोरेशन द्वारा प्रकाशित, 1982.
  • हिज़ डांस, हिज़ लाइफ: ए पोर्ट्रेट ऑफ उदय शंकर, मोहन खोकर द्वारा. हिमालय बुक्स द्वारा प्रकाशित, 1983.
  • उदय शंकर, पश्चिमबंग राज्य संगीत एकेडमी. पश्चिम बंगाल राज्य संगीत अकादमी द्वारा प्रकाशित, सूचना और सांस्कृतिक कार्यों का विभाग, पश्चिम बंगाल सरकार, 2000.
  • उदय शंकर, अशोक कुमार मुखोपाध्याय द्वारा. 2008. आईएसबीएन 8129102651.
  • ऑनरिंग उदय शंकर, फेर्नु हॉल द्वारा. नृत्य क्रॉनिकल, वॉल्यूम 7, अंक 3 1983, पृष्ठ 326 - 344.
  • हू रिमेम्बर्स उदय शंकर?, प्रो॰ जोआन एल. एर्डमन

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. उदय शंकर एन्साइक्लोपीडिया ब्रिटैनिका
  2. उदय शंकर: ए ट्रिब्यूट दी हिन्दू, 21 दिसम्बर 2001.
  3. डांस व्यू; वन ऑफ दी इंडियाज़ अर्ली एम्बेसडर्स न्यूयॉर्क टाइम्स, 6 अक्टूबर 1985.
  4. कलकत्ता, दी लिविंग सिटी: दी प्रजेंट एंड फ्यूचर, सुकांता चौधरी द्वारा. ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस, 1990. पृष्ठ - 280 .
  5. उदय शंकर इंडियाज़ डांस: देयर हिस्ट्री, टेक्निक, एंड रेपर्ट्वार, रेगिनाल्ड मास्से द्वारा. अभिनव प्रकाशन, 2004. आईएसबीएन 81-7017-434-1. पृष्ठ 221-225 . अध्याय. 21.
  6.  भारतीय चरित कोश, सम्पादक लीलाधर शर्मा पर्वतीय, प्रकाशक शिक्षा भारती दिल्ली, संस्करण २००९, पृष्ठ १०० 
  7. परिवार ट्री ममता शंकर डांस कंपनी, वेबसाइट.
  8. बायोग्राफी ऑफ रवि शंकर रेमन मैगसेसे पुरस्कार वेबसाइट.
  9. उदय शंकर बायोग्राफी catchcal.com.
  10. उदय शंकर बांग्लापीडिया.
  11. इंडियाज़ डांस, रेगिनाल्ड मास्से द्वारा. पीपी 222.
  12. उदय शंकर: एन एप्रिसिएशन सुनील कोठारी.
  13. दी उदय शंकर स्टोरी नयना भट्ट द्वारा.
  14. बैले लेगसी टाइम्स ऑफ इंडिया, 22 मार्च 2003.
  15. यूनेस्को ओब्ज़र्व्स ग्रांड सेन्टनेरी फंक्शंस इन पेरिस Rediff.com, 27 अप्रैल 2001.
  16. लार्जेस्ट टूर न्यूयॉर्क टाइम्स, 30 अक्टूबर 1933.
  17. डांसर फ्रॉम हिन्दुस्तान न्यूयॉर्क टाइम्स, 9 जनवरी 1933.
  18. सेलिब्रेटिंग क्रिएटिविटी: लाइफ एंड वर्क ऑफ उदय शंकर आईजीएनसीए पर
  19. उदय शंकर, इंटरनेट मूवी डेटाबेस पर
  20. डाइलॉग इन डांस डिसकोर्स: क्रियेटिंग डांस इन एशिया पेसिफिक, मोहम्मद द्वारा. अनीस मोहम्मद नूर, वर्ल्ड डांस एलायंस, यूनिवर्सिटी मलाया। पुसात केबुदायान. सांस्कृतिक केन्द्र, मलाया विश्वविद्यालय द्वारा प्रकाशित. 2007. आईएसबीएन 983-2085-85-3. पृष्ठ 63 .
  21. उदय शंकर
  22. क्रिएटिव डांस संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार आधिकारिक लिस्टिंग.
  23. The Flowers of India - acmem117cd चेरी रेड रिकॉर्ड्स.

बाह्य कड़ियां[संपादित करें]