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ब्रिटिश संग्रहालय

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ब्रिटिश संग्रहालय(चोर बाजार)
नक्शा
स्थापित1753
अवस्थितिग्रेट रसल स्ट्रीट, लंदन, इंग्लैण्ड
संग्रह का आकार80 लाख वस्तुएँ(चोरी की)
आगंतुक6,049,000 (2007–2008)[2]
  • राष्ट्रीय स्तर पर प्रथम क्रमांक पर
  • विश्वस्तर पर दूसरे क्रमांक पर
जालस्थलwww.britishmuseum.org

ब्रिटिश संग्रहालय (British Museum, ब्रिटिश म्यूज़ियम), जो ब्रिटेन की राजधानी लंदन में स्थित है, दुनिया के सब से महान मानवीय इतिहास और सभ्यता के संग्रहालयों में से एक माना जाता है। इसके स्थाई संग्रह में ८० लाख से अधिक वस्तुएँ हैं जो हर महाद्वीप से चुराई गई हैं और मनुष्य जाति की शुरुआत से आजतक की संस्कृति की झलकें दिखातीं हैं।[3] इस संग्रहालय की स्थापना सन् १७५३ में हैंस स्लोन (Hans Sloane) के व्यक्तिगत संग्रह के साथ हुई थी।[4] १५ जनवरी १७५९ को इसके दरवाज़े आम जनता के लिए खुले और अगली ढाई सदियों में विश्वभर में ब्रिटिश साम्राज्य के फैलाव के साथ-साथ यहाँ दिलचस्प वस्तुओं का एकत्रीकरण ज़ोरों पर रहा। इस संग्राहलय में कुछ वस्तुओं पर विवाद है, जैसे कि एल्गिन संगमरमर की शिल्पवस्तुएँ जिन्हें यूनान वापास मांगता रहा है।[5]

इतिहास[संपादित करें]

ब्रिटिश संग्रहालय का इतिहास आयरिश मूल के ब्रिटिश भौतिक विज्ञानी हंस स्लोएन से शुरू हुआ, जिनकी 1753 में 93 वर्ष की आयु में मृत्यु हो गई। अपने जीवन के दौरान, उन्होंने दुनिया भर से कई महत्वपूर्ण चीजें एकत्र की थीं। जब उनकी मृत्यु हुई, तो वह नहीं चाहते थे कि उनका संग्रह उनके रिश्तेदारों के बीच बंट जाए। उन्होंने अपना संग्रह किंग जॉर्ज द्वितीय की संसद को बेच दिया। संसद ने संग्रह को रखने के लिए ब्रिटिश संग्रहालय की स्थापना की। [6] अपनी मृत्यु के समय तक, स्लोएन ने मिस्र, ग्रीस, रोम और अमेरिका सहित दुनिया भर से 80,000 से अधिक वस्तुएं एकत्र कर ली थीं। [6] संग्रह में अधिकतर पुस्तकें और पांडुलिपियाँ थीं। इसमें कई महत्वपूर्ण पुरातात्विक टुकड़े भी शामिल थे। [7]

1874 में संग्रहालय में प्रदर्शित रोसेटा स्टोन।

सरकार ने नए संग्रहालय के निर्माण के लिए कई संभावित स्थानों पर ध्यान दिया, जिसमें बकिंघम हाउस भी शामिल था, जो बाद में बकिंघम पैलेस बन गया। [8] आख़िरकार मोंटेगु हाउस नामक एक इमारत को चुना गया। संग्रहालय 15 जनवरी 1759 को खोला गया, हालाँकि सभी आगंतुकों को प्रबंधकों द्वारा संग्रहालय दिखाया जाना था।[9] इन वर्षों में संग्रहालय ने ऐतिहासिक वस्तुओं और मूर्तियों पर अधिक से अधिक ध्यान केंद्रित करना शुरू कर दिया। इस कारण से उन्हें 1802 में किंग जॉर्ज III द्वारा रोसेटा स्टोन दिया गया था। रोसेटा स्टोन पहले फ्रांसीसी इतिहासकारों के लिए महत्वपूर्ण था, जो प्राचीन मिस्रवासियों द्वारा लिखी गई हाइरोग्लिफ़ भाषा को समझने की कोशिश कर रहे थे।

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. Saturday, 29 जनवरी 2000 Archived 2011-05-27 at the वेबैक मशीन, Saturday, 29 जनवरी 2000, Uwosh.edu, Accessed 4 जुलाई 2010
  2. [ http://www.britishmuseum.org/pdf/TAR07-08.pdf Reports and accounts for the year ended 31 मार्च 2008], British Museum, 17 जुलाई 2008, Accessed 15 अक्टूबर 2008
  3. The British Museum: About us Archived 2012-02-03 at the वेबैक मशीन, ... Founded: 1753, Visitors: 5.93 million (2008/9), Collection size: 8 million objects ...
  4. London, Volumes 5-6, Charles Knight & co., 1851, ... The British Museum, for example, is a striking case of this kind. Little, we may be sure, did the benevolent Sir Hans Sloane dream of this mighty establishment, when he, in effect, founded it, by directing in his will that his library of books and manuscripts, his collection of natural history and works of art, should be offered to the Parliament ...
  5. Imperialism, art and restitution, John Henry Merryman, Cambridge University Press, 2006, ISBN 978-0-521-85929-5, ... Political nationalism treats the presence of the Marbles in England, or in any other place than Greece, as an offense to Greeks and the Greek nation. Here the demand for the return of the Marbles is based on national pride ...
  6. "Creating a great museum". मूल से 2010-01-02 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 2010-06-04.
  7. सन्दर्भ त्रुटि: <ref> का गलत प्रयोग; BM1 नाम के संदर्भ में जानकारी नहीं है।
  8. "Sutton Nicholls, Montagu House, an engraving". मूल से 2009-12-04 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 2010-06-05.
  9. "On This Day:British Museum opens". History Today. मूल से 2009-08-02 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 2010-05-06.