हिब्रू भाषा
| इब्रानी | |
|---|---|
| עִבְרִית | |
आधुनिक (ऊपर) और पुरा-इब्रानी (नीचे) वर्णमालाओं में लिखित "इब्रानी" शब्द। | |
| उच्चारण | आधुनिक: [ivˈʁit][note 1] तिबिरियासी: [ʕivˈriθ] बाइबिली: [ʕibˈrit] |
| मूल स्थान | |
| क्षेत्र | दक्षिणी लेवंट |
| समुदाय | |
| विलुप्त | मिश्नाई इब्रानी 5वीं शताब्दी ई. को मातृभाषा के तौर से विलुप्त हुआ, केवल धार्मिक भाषा के तौर से प्रचलित रहा[1][2][3] |
| पुनर्जीवन | गत 19वीं शताब्दी में पुनर्जीवित। 91 लाख लोग आधुनिक इब्रानी बोलते हैं, जिनमें से 50 लाख मातृभाषी हैं (2018)[4] |
प्रारंभिक रूप | |
मानक रूप | प्रचलित: विलुप्त:
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| उपभाषाएँ |
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चिह्नित रूप | इसराइली सांकेतिक भाषा[5] |
| आधिकारिक | |
आधिकारिक मान्यता | |
अल्पसंख्यक मान्यता | |
| Regulated by | इब्रानी भाषा अकादमी |
| भाषा कोड | |
| ISO 639-1 | he |
| ISO 639-2 | heb |
| ISO 639-3 | Variously:heb – आधुनिक इब्रानीhbo – बाइबिली इब्रानीsmp – सामरी इब्रानीobm – मोआबीxdm – एदोमी |
| ग्लोटोलॉग | hebr1246 |
| भाषा-क्षेत्र | 12-AAB-a |
| भाषा संरक्षण स्थिति | |
इब्रानी (עִבְרִית) अफ़्रीकी-एशियाई भाषा परिवार की एक सामी भाषा है। यह इस्राएलियों द्वारा बोला जाता था, जिसके बाद यह यहूदी धर्म और सामरी धर्म की धार्मिक भाषा रही।[15] इसे 19वीं शताब्दी में पुनर्जीवित किया गया था। इब्रानी एकल जीवित कनानी भाषा तथा यह और अरामी भाषा दो ही जीवित पश्चिमोत्तर सामी भाषाएँ हैं।[16][17]
प्रथम महायुद्ध के बाद फ़िलिस्तीन (यहूदियों का इसराइल नामक नया राज्य) की राजभाषा आधुनिक इब्रानी है। सन् 1918 में यरूशलम का इब्रानी विश्वविद्यालय स्थापित हुआ जिसके सभी विभागों में इब्रानी ही शिक्षा का माध्यम है। इसराइल राज्य में कई दैनिक पत्र भी इब्रानी में निकलते हैं।
इब्रानी को अन्तरराष्ट्रीय स्तर के भाषा वैज्ञानिकों ने भाषाओं की मृत सूची में डाल दिया था। 1948 में जब इसराइल स्वतन्त्र हुआ तो उसने तुर्की की तरह ही अपनी भाषा इब्रानी में शिक्षा और शासन–प्रशासन से जुड़ी गतिविधियों को कार्यान्वित करने का निर्णय लिया। आज यहाँ सभी शैक्षिक, प्रशासनिक, वैज्ञानिक और तकनीकी उपलब्धियों के लक्ष्य इब्रानी में गरिमा के साथ प्राप्त कर लिए हैं। यहाँ विज्ञान और तकनीक से जुड़े श्रेष्ठतम आविष्कारों की शब्दावली इब्रानी में है।
परिचय
[संपादित करें]इब्रानी भाषा सामी परिवार ((सेमेटिक फेमिली) की भाषाओं में से एक है। यह यहूददियों की प्राचीन सांस्कृतिक भाषा है। इसी में उनका धर्मग्रंथ (बाइबिल का पूर्वार्ध) लिखा हुआ है; अत: इब्रानी का ज्ञान मुख्यतया बाइबिल पर निर्भर है।
व्युत्पत्ति की दृष्टि से 'सामी' शब्द नौह के पुत्र सेम से संबंध रखता है। सामी भाषाओं की पूर्वी उपशाखा का क्षेत्र मेसोपोटेमिया था। वहाँ पहले सुमेरियन भाषा बोली जाती थी; फलस्वरूप सुमेर की भाषा ने पूर्वी सामी भाषाओं को बहुत कुछ प्रभावित किया है। प्राचीनतम सामी भाषा अक्कादीय की दो उपशाखाएँ हैं, अर्थात् असूरी और बाबुली। सामी परिवार की दक्षिणी उपशाखा में अरबी, हब्शी (इथोपियाई) तथा साबा की भाषाएँ प्रधान हैं। सामी वर्ग की पश्चिमी उपशाखा की मुख्य भाषाएँ इस प्रकार हैं: उगारितीय, कनानीय, आरमीय और इब्रानी। इनमें से उगारितीय भाषा (१५०० ई. पू.) सबसे प्राचीन है; इसका तथा कनानीय भाषा का गहरा संबंध है।
जब यहूदी लोग पहले पहल कनान देश में आकर बसने लगे तब वे कनानीय से मिलती जुलती एक आरमीय उपभाषा बोलते थे; उससे उनकी अपनी इब्रानी भाषा का विकास हुआ है। ऐसा प्रतीत होता है कि 'इब्रानी' शब्द हपिरू से निकला है; हपिरू (शब्दार्थ 'विदेशी') उत्तरी अरबी मरुभूमि की एक यायावर जाति थी, जिसके साथ यहूदियों का संबंध माना जाता था। बाबीलोन के निर्वासन के बाद (५३९ ई. पू.) यहूदी लोग दैनिक जीवन में इब्रानी छोड़कर आरमीय भाषा बोलने लगे। इस भाषा की कई बोलियाँ प्रचलित थीं। ईसा भी आरमीय भाषा बोलते थे, किंतु इस मूल भाषा के बहुत कम शब्द सुरक्षित रह सके।
अन्य सामी भाषाओं की तरह इब्रानी की निम्नलिखित विशेषताएँ हैं। धातुएँ प्राय: त्रिव्यंजनात्मक होती हैं। धातुओं में स्वर होते ही नहीं और साधारण शब्दों के स्वर भी प्राय: नहीं लिखे जाते। प्रत्यय और उपसर्ग द्वारा पुरुष तथा वचन का बोध कराया जाता है। क्रियाओं के रूपांतर अपेक्षाकृत कम हैं। साधारण अर्थ में काल नहीं होते, केवल वाच्य होते हैं। वाक्यविन्यास अत्यंत सरल है, वाक्यांश प्राय: 'और' शब्द से सहारे जोड़े जाते हैं। इब्रानी में अर्थ के सूक्ष्म भेद व्यक्त करना दु:साध्य है। वास्तव में इब्रानी भाषा दार्शनिक विवेचना की अपेक्षा कथासाहित्य तथा काव्य के लिए कहीं अधिक उपर्युक्त है।
प्रथम शताब्दी ई. में यहूदी शास्त्रियों ने इब्रानी भाषा को लिपिबद्ध करने की एक नई प्रणाली चलाई जिसके द्वारा बोलचाल में शताब्दियों से अप्रयुक्त इब्रानी भाषा का स्वरूप तथा उसका उच्चारण भी निश्चित किया गया। आठवीं-दसवीं सदी में उन्होंने समस्त इब्रानी बाइबिल का इसी प्रणाली के अनुसार संपादन किया है। यह मसोरा का परंपरागत पाठ बतलाया जाता है और पिछली दस शताब्दियों से इब्रानी बाइबिल का यह सबसे प्रचलित पाठ है। इसका सर्वाधिक प्रसिद्ध संस्करण बेन ह्यीम का है जो १५२४ ई. में वेनिस में प्रकाशित हुआ था। सन् १९४७ ई. में फिलिस्तीन के कुमराम नामक स्थान पर इब्रानी बाइबिल तथा अन्य साहित्य की अत्यंत प्राचीन हस्तलिपियाँ मिल गईं। इनका लिपिकाल प्राय: दूसरी शताब्दी ई.पू. माना जाता है। विद्वानों को यह देखकर आश्चर्य हुआ कि बाइबिल की ये प्राचीन पोथियाँ मसोरा के पाठ से अधिक भिन्न नहीं हैं।
मध्यकाल में एक विशेष इब्रानी बोली की उत्पत्ति हुई थी जिसे जर्मनी के वे यहूदी बोलते थे जो पोलैंड और रूस में जाकर बस गए थे। इस बोली को 'यहूदी जर्मन' अथवा 'यिद्दिश' कहकर पुकारा जाता है। वास्तव में यह एक जर्मन बोली है जो इब्रानी लिपि में लिखी जाती है ओर जिसमें बहुत से आरमीय, पोलिश तथा रूसी शब्द भी सम्मिलित हैं। इसका व्याकरण अस्थिर है, किंतु इसका साहित्य समृद्ध है।
लिपि
[संपादित करें]इब्रानी भाषा, इब्रानी लिपि में लिखी जाती है जो दाएँ से बाएँ लिखी–पढ़ी जाती है।
तस्वीरें
[संपादित करें]- दाउद के तारे के संदर्भ से समझाया गया इब्रानी वर्णमाला
- इसराइल में सड़क के संकेत - इब्रानी, अरबी और अंग्रेज़ी पाठ के साथ
इन्हें भी देखें
[संपादित करें]- थियोडोर हर्ज्ल
- गिलाड ज़ुकरमैन (Ghil'ad Zuckermann) 2003. Language Contact and Lexical Enrichment in Israeli Hebrew, Palgrave Macmillan. ISBN 9781403917232 / ISBN 9781403938695
- गगिलाड ज़ुकरमैन (Ghil'ad Zuckermann) 2020. Revivalistics: From the Genesis of Israeli to Language Reclamation in Australia and Beyond, Oxford University Press. ISBN 9780199812790 / ISBN 9780199812776
सन्दर्भ
[संपादित करें]- ↑ Sáenz-Badillos (1993)
- ↑ H. S. Nyberg 1952. Hebreisk Grammatik. s. 2. Reprinted in Sweden by Universitetstryckeriet, Uppsala, 2006.
- ↑ साँचा:Ethnologue19
साँचा:Ethnologue19
साँचा:Ethnologue19
साँचा:Ethnologue19
साँचा:Ethnologue19 - ↑ "Hebrew". Ethnologue. 14 May 2020 को मूल से पुरालेखित. अभिगमन तिथि: 4 April 2018.
- ↑ Meir, Irit; Sandler, Wendy (2013). A Language in Space: The Story of Israeli Sign Language.
- ↑ "Basic Law: Israel – the Nation State of the Jewish People" (PDF). The Knesset. The State of Israel. मूल से (PDF) से 10 April 2021 को पुरालेखित।. अभिगमन तिथि: 31 August 2020.
- ↑ Pisarek, Walery. "The relationship between official and minority languages in Poland" (PDF). European Federation of National Institutions for Language. 14 December 2019 को मूल से पुरालेखित (PDF). अभिगमन तिथि: 7 November 2017.
- ↑ "Constitution of the Republic of South Africa, 1996 – Chapter 1: Founding Provisions | South African Government". www.gov.za. 18 May 2019 को मूल से पुरालेखित. अभिगमन तिथि: 2020-08-29.
- ↑ Yağmur, Kutlay (2001), Extra, G.; Gorter, D. (eds.), "Turkish and other languages in Turkey", The Other Languages of Europe, Clevedon: Multilingual Matters, pp. 407–427, ISBN 978-1-85359-510-3, 20 October 2023 को मूल से पुरालेखित, अभिगमन तिथि: 2023-10-06,
"Mother tongue" education is mostly limited to Turkish teaching in Turkey. No other language can be taught as a mother tongue other than Armenian, Greek, and Hebrew, as agreed in the Lausanne Treaty [...] Like Jews and Greeks, Armenians enjoy the privilege of an officially recognized minority status. [...] No language other than Turkish can be taught at schools or at cultural centers. Only Armenian, Greek, and Hebrew are exceptions to this constitutional rule.
- ↑ Zetler, Reyhan (2014). "Turkish Jews between 1923 and 1933 – What Did the Turkish Policy between 1923 and 1933 Mean for the Turkish Jews?" (PDF). Bulletin der Schweizerischen Gesellschaft für Judaistische Forschung (23): 26. ओसीएलसी 865002828. 15 October 2023 को मूल से पुरालेखित (PDF). अभिगमन तिथि: 12 October 2023.
- ↑ Toktaş, Şule (2006). "EU enlargement conditions and minority protection : a reflection on Turkey's non-Muslim minorities". East European Quarterly (अंग्रेज़ी भाषा में). 40 (4): 489–519. आईएसएसएन 0012-8449. 11 October 2023 को मूल से पुरालेखित. अभिगमन तिथि: 12 October 2023. p. 514:
This implies that Turkey grants educational right in minority languages only to the recognized minorities covered by the Lausanne who are the Armenians, Greeks and the Jews.
- ↑ Bayır, Derya (2013). Minorities and nationalism in Turkish law. Cultural Diversity and Law. Farnham: Ashgate Publishing. pp. 89–90. ISBN 978-1-4094-7254-4. 14 October 2023 को मूल से पुरालेखित. अभिगमन तिथि: 12 October 2023.
Oran farther points out that the rights set out for the four categories are stated to be the 'fundamental law' of the land, so that no legislation or official action shall conflict or interfere with these stipulations or prevail over them (article 37). [...] According to the Turkish state, only Greek, Armenian and Jewish non-Muslims were granted minority protection by the Lausanne Treaty. [...] Except for non-Muslim populations - that is, Greeks, Jews and Armenians - none of the other minority groups' language rights have been de jure protected by the legal system in Turkey.
- ↑ Questions and Answers: Freedom of Expression and Language Rights in Turkey. New York: Human Rights Watch. April 2002. 20 October 2023 को मूल से पुरालेखित. अभिगमन तिथि: 12 October 2023.
The Turkish government accepts the language rights of the Jewish, Greek and Armenian minorities as being guaranteed by the 1923 Treaty of Lausanne.
- ↑ [9][10][11][12][13]
- ↑ Chomsky, William (1957). Hebrew: The Eternal Language (अंग्रेज़ी भाषा में). Philadelphia: The Jewish Publication Society of America. pp. 1–13.
- ↑ Grenoble, Leonore A.; Whaley, Lindsay J. (2005). Saving Languages: An Introduction to Language Revitalization. United Kingdom: Cambridge University Press. p. 63. ISBN 978-0-521-01652-0. 8 April 2023 को मूल से पुरालेखित. अभिगमन तिथि: 28 March 2017.
Hebrew is cited by Paulston et al. (1993:276) as 'the only true example of language revival.'
- ↑ Fesperman, Dan (26 April 1998). "Once 'dead' language brings Israel to life Hebrew: After 1,700 years, a revived language becomes a common thread knitting together a nation of immigrants with little in common except religion". The Baltimore Sun. Sun Foreign Staff. 29 March 2017 को मूल से पुरालेखित. अभिगमन तिथि: 28 March 2017.
बाहरी कड़ियाँ
[संपादित करें]- इसराइल में हीब्रू - संकल्प का बल (डॉ॰ रवीन्द्र अग्निहोत्री)
- ↑ सेफ़ार्दी: [ʕivˈɾit]; इराक़ी: [ʕibˈriːθ]; यमनी: [ʕivˈriːθ]; अश्केनाज़ी: [ivˈʀis] या [ivˈris], strict pronunciation [ʔivˈris] या [ʔivˈʀis].
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