पुर्तगाली भाषा

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पुर्तगाली भाषा (पुर्तगाली : Língua Portuguesaपोर्तुगेस, पोर्तुगेश) एक यूरोपीय भाषा है। ये मूल रूप से पुर्तगाल की भाषा है और इसके कई भूतपूर्व उपनिवेशों में भी बहुमत भाषा है, जैसे ब्राज़ील। ये हिन्द-यूरोपीय भाषा-परिवार की रोमांस शाखा में आती है। इसकी लिपि रोमन है। इस भाषा के प्रथम भाषी लगभग २० करोड़ हैं।

परिचय[संपादित करें]

पुर्तगाली या (पोर्तगाली) नवलातीनी परिवार की भाषा है। इस परिवार की अन्य भाषाएँ स्पेनी, फ्रांसीसी, रूमेनी, लातीनी, प्रोवेंसाली तथा कातालानी हैं। यह लातीनी वोल्गारे (लातीनी अपभ्रंश) का विकसित रूप है जिसे रोमन विजेता अपने साथ लूसीतानिया में लगभग तीसरी शती ईसवी पूर्व में ले गए थे। रोमन विजेताओं की संस्कृति मूल निवासियों की अपेक्षा उच्च थी। उसके प्रभाव के कारण स्थानीय बोलियाँ दब गईं, भौगोलिक नामों तथा कुछ शब्दों (एस्क्वेदों वेइगा) में उनके अवशेष मिलते हैं।

पाँचवीं शतीं में आइबीरिया प्रायद्वीप पर बर्बरों का आक्रमण हुआ। आक्रमणकारियों ने विजितों की भाषा को अपनाया। पुर्तगाली की शब्दावली में जर्मन भाषा वर्ग के बहुत ही कम शब्द हैं। प्राय: युद्ध से संबंधित कुछ शब्द मिलते हैं जो महत्वपूर्ण नहीं हैं।

आठवीं शती में आइबीरिया पर अरब आक्रमण हुआ। इनका अधिकार पाँच सौ वर्षों तक रहा। यद्यपि आक्रामकों की संस्कृति बहुत उन्नत थी तथापि उन्होंने अपनी भाषा को पुर्तगालियों पर थोपा नहीं। दोनों ही अपनी-अपनी भाषा का प्रयोग करते रहे। ऐसा होने पर भी पुर्तगाली में बहुत से अरबी के शब्द रह गए हैं। ऐसे शब्दों को अरबी के "अल्" उपसर्ग से युक्त होने से आसानी से पहचाना जा सकता है (अल्खूवे अल्मोक्रेवे, अल्मोफारिज़)।

13वीं शती की पुर्तगाली नीति कविता पर प्रोवेंसाली का बहुत प्रभाव था। इसलिए कविता को भाषा में अनेक प्रोवेंसाली शब्द प्रयुक्त हुए, किंतु बोलचाल की भाषा में अपेक्षाकृत कम प्रोवेंसाली शब्द मिलते हैं। पुर्तगाली शब्दावली को सबसे अधिक समृद्ध किया स्पेनी और फ्रांसीसी भाषाओं ने। स्पेनी का प्रभाव उनकी भौगोलिक समीपता तथा साहित्यिक समृद्धि, विशेषकर नाट्य साहित्य, के कारण पड़ा। पुर्तगाल पर स्पेन का आधिपत्य (1580-1640) रहना भी प्रभाव का एक कारण है। फ्रांसीसी का प्रभाव में तो पड़ा ही, क्योंकि 11वीं शती में पुर्तगाल के प्रथम राजवंश का प्रतिष्ठाता काउंट ऑव पुर्तगाल बरगंडी का हेनरी था। उसके बाद 18वीं शती से 20वीं शती के आरंभ तक फ्रांसीसी संस्कृति के प्रवेश के कारण फ्रांसीसी भाषा ने पुर्तगाली को प्रभावित किया। आधुनिक युग में यूरोप की अन्य भाषाओं के समान अंग्रेजी का प्रभाव पुर्तगाली पर भी देखा जा सकता है। अमरीकी सभ्यता ने यांत्रिक क्षेत्र में जो प्रगति की, उसका प्रभाव पुर्तगाली भाषा पर भी लक्षित हो रहा है।

पुर्तगाली में, विशेषकर कला से संबंधित, अनेक इतालीय शब्द भी हैं। इनमें से अधिकांश शब्द इतालीय साहित्यिक प्रवृत्तियों की सफलता के कारण 16वीं शती में प्रवेश कर गए थे। 16वीं शती के पश्चात् लातीनी साहत्य के अध्ययन की विशेष रूचि के फलस्वरूप साहित्यिक पुर्तगाली पर लातीनी का प्रभाव पड़ा। वाक्यविन्यास तथा शब्दावली दोनों पर लातीनी का प्रभाव पड़ा। लातीनी शब्दों से ही वने फ्रियो, फ्रोजिदो, जैसे सरल शब्दों के रहते आडंबरपूर्ण अस्वाभाविक शब्दों (आंदोलोक्वो, उनबीवागो) का प्रयोग होने लगा। ग्रीक से वैज्ञानिक शब्दावली ली गई।

15वीं शती से ही जो खोजें आरंभ हुई उनके माध्यम से पुर्तगालियों का संपर्क अफ्रीका, एशिया और अमरीका के निवासियों से हुआ। फलस्वरूप अनेक नए शब्द पुर्तगाली में आ गए (कांचिम्बा, वातुक्वे, मांदिओका)।

लातीनी और पुर्तगाली की तुलना[संपादित करें]

लातीनी की तुलना में पुर्तगाली की मुख्य विशेषताएँ निम्न हैं :

  • ध्वनिविषयक अनुनासिक व्यंजन के कारण स्वरों में परिवर्तन - मानूऊमाँओ; पोनितऊपोंए;
  • स्वरमध्यवर्ती अघोष व्यंजनों का घोष हो जाना तऊद, पऊब, चऊज (लाकुऊलागो; सापेरेऊसाबेर);
  • स्वरों के बीच में आनेवाले द और ल व्यंजनों का लोप हो जाना (फीदेऊफैएऊफे; दोलोरेऊदोर;
  • स्वर समुदाय अउ के स्थान पर ओर कभी-कभी ओह हो जाता है (ताउरुऊतोउरोऊतोहरो; आउरुऊओउरो, ओहरो) ;
  • शब्दारंभ में आनेवाले संयुक्त क्ल, फ्ल, प्ल के स्थान पर क (क्लावेऊ कावे (शावे) ;
  • फ्लामाऊकामा (सामा) फ्लोरारेऊकोरार (सोरार) हो जाता है;
  • शब्द के मध्यवर्ती वल के स्थान पर ल्ह हो जाता है - ओकुलुऊआल्हो।

पुर्तगाली में वाक्यविन्यासात्मक ध्वनिप्रक्रिया ध्यान देने योग्य है : शब्दांत में आनेवाले 'S' का उच्चारण प्राय: 'ship' के 'श' के समान होता है, किंतु जब उसके पश्चात् और शब्द रहते हैं तब उसका उच्चारण Z (ज़) जैसा होता है, जैसे as में ज़ ; स्वर के पूर्व में रहने से तथा घोष वर्ण के पूर्व उसका उच्चारण Pleasure के S जैसा होता है, किंतु अघोष वर्ण के परे S ही रहता है। 'OS Pis' का उच्चारण 'उस पेस्स' होता है - क्योंकि प अधोष है, 'as artes' का उच्चारण 'अज़ आर्तेस्स' होता है क्योंकि 'artes' के प्रारंभ में स्वर है। 'OS dentes' का उच्चारण 'ओज़ देन्तेस्स' होता है क्योंकि 'द' घोष है।

रूपरचना[संपादित करें]

नवलातीनी अन्य भाषाओं की सामान्य विशेषताओं (विश्लेषणात्मक प्रवृत्ति, कारक विभक्तियों का लोप, नपुंसक लिंग के भेद का लोप, भविष्यत् और हेतु लकार की रूपरचना) के अतिरिक्त पुर्तगाली में एक विशेषता मिलती है जो अन्य किसी भाषा में नहीं मिलती। मूल अपरिवर्तनशील क्रिया रूप के अतिरिक्त पुर्तगाली में एक और व्यक्तिवाचक या सविभक्तिक क्रिया रूप मिलता है जो निश्चित वाक्यांश से प्राय: मिलता है। 'ऐ उना वेरगोन्हा नॉओ साबेरमोए एस्क्रेवेर' - यह लज्जा की बात है कि हम लिख नहीं सकते।

नैयमिक क्रियाओं में लेट् भविष्य रूप भी होता है जो व्यक्तिवाचक क्रिया के सामान्य रूप के समान होता है।

अन्य नवलातीनी (रोमांस) भाषाओं (स्पेनी और प्रोवेंसाल) के समान पुर्तगाली इस दृष्टि से भी भिन्न है कि उसमें लातीनी का पूर्णभूत संकेतकाल भी शेष रह गया है (अमावेरामऊअमारामऊअमारा)।

वाक्यरचना[संपादित करें]

कारकों का लोप हो जाने के कारण लातीनी की विस्तृत विविधता की तुलना में शब्दों के क्रम के नियम कड़े करना आवश्यक हो गया। स्वराघातहीन व्यक्तिवाचक सर्वनाम के प्रयोग के क्रम के विषय में जटिल नियम है और ब्राजील की पुर्तगाली में प्राय: उसके प्रयोग में भेद रहता है। पुर्तगाली भाषा पुर्तगाल के सिवा स्पेन के कुछ भागों में, अजोर्ज़ और मादेरा के जलडमरूमध्य में, ब्राजील, अफ्रीका और एशिया के पुर्तगाली उपनिवेशों में, तथा कुछ अन्य भागों में, जो पहले पुर्तगाल के उपनिवेश थे, बोली जाती है।

12वीं शती में गालीशियन-पुर्तगाली भाषा का पहला लेख मिलता है जो आइबेरिया प्रायद्वीप में बोली जानेवाली बोलियों से भिन्न है।

साहित्य[संपादित करें]