नृसिंह
| यह सुझाव दिया जाता है कि नरसिंहावतार का इस लेख या भाग में विलय कर दिया जाए। (वार्ता) दिसम्बर 2011 से प्रस्तावित |
नरसिंह नर + सिंह ("मानव-सिंह") को पुराणों में भगवान विष्णु का अवतार माना गया है।[1] जो आधे मानव एवं आधे सिंह के रूप में प्रकट होते हैं, जिनका सिर एवं धड तो मानव का था लेकिन चेहरा एवं पंजे सिंह की तरह थे[2] वे भारत में, खासकर दक्षिण भारत में वैष्णव संप्रदाय के लोगों द्वारा एक देवता के रूप में पूजे जाते हैं जो विपत्ति के समय अपने भक्तों की रक्षा के लिए प्रकट होते हैं। [3]
अनुक्रम |
नरसिंह एवं प्रहलाद[संपादित करें]
पूजन विधि[संपादित करें]
प्रार्थना[संपादित करें]
नरसिंह के बारे में कई तरह की प्रार्थनाएँ की जाती हैं जिनमे कुछ प्रमुख ये हैं:
नरसिंह मंत्र ॐ उग्रं वीरं महाविष्णुं ज्वलन्तं सर्वतोमुखम् । नृसिंहं भीषणं भद्रं मृत्युमृत्युं नमाम्यहम् ॥
(हे क्रुद्ध एवं शूर-वीर महाविष्णु, तुम्हारी ज्वाला एवं ताप चतुर्दिक फैली हुई है. हे नरसिंहदेव, तुम्हारा चेहरा सर्वव्यापी है, तुम मृत्यु के भी यम हो और मैं तुम्हारे समक्षा आत्मसमर्पण करता हूँ ।)
श्री नृसिंह स्तवः[संपादित करें]
- प्रहलाद ह्रदयाहलादं भक्ता विधाविदारण ।
- शरदिन्दु रुचि बन्दे पारिन्द् बदनं हरि ॥१॥
- नमस्ते नृसिंहाय प्रहलादाहलाद-दायिने ।
- हिरन्यकशिपोर्बक्षः शिलाटंक नखालये ॥२॥
- इतो नृसिंहो परतोनृसिंहो, यतो-यतो यामिततो नृसिंह ।
- बर्हिनृसिंहो ह्र्दये नृसिंहो, नृसिंह मादि शरणं प्रपधे ॥३॥
- तव करकमलवरे नखम् अद् भुत श्रृग्ङं ।
- दलित हिरण्यकशिपुतनुभृग्ङंम् ।
- केशव धृत नरहरिरुप, जय जगदीश हरे ॥४॥
- वागीशायस्य बदने लर्क्ष्मीयस्य च बक्षसि ।
- यस्यास्ते ह्र्देय संविततं नृसिंहमहं भजे ॥५॥
- श्री नृसिंह जय नृसिंह जय जय नृसिंह ।
- प्रहलादेश जय पदमामुख पदम भृग्ह्र्म ॥६॥
नरसिंह देव के नाम[संपादित करें]
- १ नरसिंह
- २ नरहरि
- ३ उग्र विर माहा विष्णु
- ४ हिरण्यकश्यप अरी
संकेतों का महत्व[संपादित करें]
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होली[संपादित करें]
तीर्थस्थल[संपादित करें]
नरसिंह विग्रह के दस(१०) प्रकार[संपादित करें]
- १ उग्र नरसिंह
- २ क्रोध नरसिंह
- ३ मलोल नरसिंह
- ४ ज्वल नरसिंह
- ५ वराह नरसिंह
- ६ भार्गव नरसिंह
- ७ करन्ज नरसिंह
- ८ योग नरसिंह
- ९ लक्ष्मी नरसिंह
- १० छत्रावतार नरसिंह/पावन नरसिंह/पमुलेत्रि नरसिंह
नरसिंह देव मन्दिर[संपादित करें]
मायापुर[संपादित करें]
मायापुर इस्कॉन मे नरसिंह देव का मन्दिर हे। यह मन्दिर नदिया जिला , पश्चिम बंगाल में स्थित है।
बीकानेर[संपादित करें]
बीकानेर लखोिटयों के चौक में वर्षो्ं पुराना नर िसंह समेत पूरे शहर में कुल चार नर िसंह मंिदर हैा
यह भी देखें[संपादित करें]
टिप्पणियां[संपादित करें]
- ↑ Bhag-P 1.3.18 "चौदहवें अवतार के रूप में भगवान विष्णु ने नरसिंह रूप का अवतार लेकर नास्तिक हिरण्यकश्यपु के शरीर को अपने नख से दो टुकड़ों में विभक्त कर दिया जैसे बढई किसी लकडी के दो टुकडों को चीरता है"
- ↑ Bhag-P 7.8.19-22
- ↑ स्टीवेन जे रोजेन, नरसिंह अवतार, द हाफ मैन/हाफ लायन इनकारनेशन, पृ5
वाह्य सूत्र[संपादित करें]
- प्रहलाद की कथा
- भागवत पुराण - प्रहलाद की गर्भ शिक्षा
- भागवत पुराण - हिरण्यकश्यप वध
- नरसिंह देव की प्रार्थनाएँ
- नरसिंहावतार
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