दशावतार

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भगवान विष्णु दसों अवतारों सहित

विष्णु के दश अवतार

परिचय[संपादित करें]

भगवान विष्णु हिन्दु त्रिमूर्ति( तीन महा देवताओ) में से एक है। निर्माण की योजना के अनुसार, वे ब्रह्म़ा़ंड के निर्माण के बाद, उसका विघटन तक उसकी संरक्षण करते है । भगवान विष्णु के दस अवतार को संयुक्त रूप से दशावतार कहा जाता है। अवतारें युग प्रणाली की अवधारणा के समान है जो हिन्दु कैलेंदडर में ब्रह्म़ा़ंडीय समय के आधार से एक इकाई है। एक इकाई या युग ४,०००,०००,००० साल हैं।

विस्तार[संपादित करें]

जब मानव अन्याय ऑर अधर्म की गंदगी के बीच में खो जाता है , तब भगवान विष्णु उस्को सही रास्ता दिखाते है। प्रत्येक चक्र के अंत में जब अच्छाई बुराई पे जीतती है, तब विघटन होता है।

श्रीमद्भगवद्गीता में कहा गया है :

यदा यदा ही धर्मस्य ग्लानिर भवति भारत
अभ्युथानाम अधर्मस्य तदात्मानम सृजाम्यहम्

श्री कृष्ण अर्जुन से कहते है कि जब भी धर्मी आचरण में कमी हो ऑर अधर्म व्यवहार का वृद्धि हो, मैं स्वयं को प्रकट करूँगा।

श्रीमद्भगवद्गीता में एक ऑर श्लोक :

 पवित्राणाय साधुनाम
 विनाशाय च दुष्कृताम
 धर्मसंस्थापनार्थाय
 संभवामि युगे-युगे

कृष्ण भगवान कहते है कि अच्छाई की सुरक्षा के लिए , बुरी ताकतों के विनाश के लिए , ऑर धर्म दृड स्थापना के लिए मैं हर युग में पैदा हुआ हूँ । श्रीमद्भगवद्गीता का उदाहरण लिया गया है क्योंकि श्री कृष्ण , भगवान विष्णु का ही अवतार पुरुष है।

भगवान विष्णु के दस अवतार है :

  1. मत्स्य
  2. कूर्म
  3. वराह
  4. नृसिंह
  5. वामन
  6. परशुराम
  7. राम
  1. कृष्ण
  बुद्ध बुद्ध अवतार: यह भगवान विष्णु के अवतार है । इसमें विष्णुजी बुद्ध के रूप में असुरों को वेद की शिक्षा के लिये तैयार करने के लिये प्रकट हुए
  1. कल्कि

पहले तीन अवतार , यानि मत्स्य, कूर्म ऑर वराह पहले युग में अवतीर्ण हुए। पहला युग सत्य युग या कृत युग है। नरसिंह , वामन , परशुराम ऑर राम दूसरे यानि त्रेतायुग में अवतीर्ण होने को माना जाता है। कृष्ण ऑर बलराम द्वापर युग में आए। चल रहा आयु कलियुग है ऑर भागवत पुराण के भविष्यवाणि के आधार पर इस युग के अंत में कल्कि अवतार का अवतीर्ण होगा। इससे दुनिया के विनाशकारी ऑर बुरी ताकतों का अंत होगा ऑर नई सृजन होगा जिससे सत्य युग का फिर से स्थापना होगा।

हिन्दू परिवेश में दशावतार का काफी हद तक स्वीकार की गई सूची है : मत्स्य, कूर्म, वराह, नरसिंह, वामन, परशुराम, राम, कृष्ण, बुद्ध, कल्कि । मामूली अंतर के साथ विभिन्न अन्य सूचियाँ है जो प्राथमिक आस्था ऑर क्षेत्र के आधार पर अलग है। उदाहरण के लिए, कुछ धार्मिक समूहों को कृष्ण ही परमात्मा है ऑर दशावतार कृष्ण के ही दस अवतार है, ऑर सूची में कृष्ण नहीं आते। कुछ लोग बलराम को एक अवतार मानते है, बुद्ध को नहीं। लेकिन इतिहास के अनुसार मामूली तॉर पर बलराम को आदिसेश(विष्णु के विश्राम साँप) का अवतार माना जाता है। दशावतार के बारे में अन्य अटकलों में, कुछ लोग अवतारों की क्रम को युक्तिसंगत बनाने की कोशिश में, उन्हें विकासवादि ऑर डार्विन योजना से जोडते है। वे कहते हैं कि अवतारें जलचर से भूमि; आधे-जान्वर से विकसित आदमी; कृषि समाज से 'ऑद्योगिक' समाज के आदमी के आधार पर बदलता है ऑर इस कारण से मनुष्य का अंत होता है।

ऑर विघटन के बाद फिर से सृजन की शुरुवात होती है।

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]