चिरसम्मत यांत्रिकी का इतिहास

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चिरसम्मत यांत्रिकी
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न्यूटन का गति का द्वितीय नियम
इतिहास · समयरेखा
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इस अनुच्छेद का सम्बंध चिरसम्मत यांत्रिकी के इतिहास से है।

प्राचीनता[संपादित करें]

प्राचीन यूनानी दार्शनिक, मुख्य रूप से अरस्तु प्रथम व्यक्ति माना जाता है जिसने अमूर्त प्राकृतिक नियमों का उल्लेख किया।

मध्यकालीन सोच[संपादित करें]

फ्रांसीसी पादरी जीन बुरिदन ने आवेग सिद्धान्त दिया जिसे अरस्तु सिद्धन्त का सहायक सिद्धन्त भी माना जाता है।

आधुनिक युग - चिरसम्मत यांत्रिकी का निर्माण[संपादित करें]

यह युग गैलिलीयो के सिद्धन्तों से आरम्भ होता है।

वर्तमान[संपादित करें]

२० वीं शताब्दी के अन्त तक चिरसम्मत सिद्धान्त भौतिकी में आत्मनिर्भर सिद्धान्त नहीं रह पाया। चिरसम्मत विद्युत चुम्बकत्व के साथ-साथ इसको आपेक्षिक क्वांटम यांत्रिकी अथवा क्वांटम क्षेत्र सिद्धान्त का एक भाग मात्र बन गई।

सन्दर्भ[संपादित करें]

ये भी देखें[संपादित करें]