विद्याधर सूरजप्रसाद नैपाल

मुक्त ज्ञानकोश विकिपीडिया से
Jump to navigation Jump to search
सर
वी.एस. नायपॉल
ट्रिनिटी क्रॉस
VS Naipaul.jpg
जन्म विद्याधर सूरजप्रसाद नायपॉल
17 अगस्त 1932
Chaguanas, त्रिनिदाद और टोबैगो
मृत्यु 11 अगस्त 2018 ( 85 वर्ष की आयु में)
लन्दन, इंग्लैण्ड
व्यवसाय उपन्यासकार, यात्रा लेखक, निबन्धकार
नागरिकता ब्रितानी[1]
अवधि/काल 1957–2010
विधा उपन्यास, निबन्ध
विषय
विद्याधर सूरजप्रसाद नैपाल
उल्लेखनीय कार्यs अ हाउस फॉर मिस्टर विश्वास
इन अ फ्री स्टेट
अ बेन्ड इन द रिवर
द एनिग्मा ऑफ एराइवल
उल्लेखनीय सम्मान Booker Prize
1971
Nobel Prize in Literature
2001
जीवनसाथीs

पैत्रिसिआ ऐन हेल नैपाल (1955–96, मृत)

नादिरा नैपाल (1996–2018)
सम्बन्धी Capildeo family
बालकृष्ण नैपाल

वी.एस. नायपॉल या विद्याधर सूरजप्रसाद नायपॉल (१७ अगस्त सन १९३२ - ११ अगस्त २०१८) आधुनिक युग के प्रसिद्ध अंग्रेजी साहित्यकार थे। उन्हें नूतन अंग्रेज़ी छन्द का गुरू कहा जाता है। २००८ में दी टाईम्स ने वी एस नैपाल को अपनी ५० महान ब्रिटिश साहित्यकारो की सूची मे ७वाँ स्थान दिया। उन्हें २००१ मे साहित्य मे नोबेल पुरस्कार प्रदान किया गया।

वे कई साहित्यिक पुरस्कारों से सम्मानित किये जा चुके हैं, जिनमें जोन लिलवेलीन रीज पुरस्कार (१९५८), दी सोमरसेट मोगम अवार्ड (१९८०), दी होवथोरडन पुरस्कार (1964), दी डबलु एच स्मिथ साहित्यिक अवार्ड (१९६८),] बुकर सम्मान (१९७१), तथा दी डेविड कोहेन पुरस्कार (१९९३, ब्रिटिश साहित्य मे जीवनपर्यन्त कार्य के लिए), प्रमुख हैं।

जीवनी[संपादित करें]

विद्याधर सूरजप्रसाद नैपाल का जन्म १७ अगस्त सन १९३२ को ट्रिनिडाड के चगवानस (Chaguanas) में हुआ। इनका परिवार नाम नेपाल देश पर आधारित है, अतः नैपाल, "जो नेपाल से हो"। ऐसी धारणा है कि इनके पूर्वज गोरखपुर के भूमिहार ब्राह्मण थे जिन्हें ट्रिनिडाड ले जाया गया इसलिये इस परिवार का नेपाल को छोडना इससे पहले हुआ होगा। (१९३२ -) ट्रिनिडाड में जन्मे भारतीय मूल के नोबेल पुरस्कार (२००१ साहित्य के लिये) विजेता लेखक हैं। उनकी शिक्षा ट्रिनिडाड और इंगलैंड में हुई। वे दीर्घकाल से ब्रिटेन के निवासी हैं। उनके पिताजी श्रीप्रसाद नैपाल, छोटे भाई शिव नैपाल, भतीजे नील बिसुनदत, चचेरे भाई वह्नि कपिलदेव सभी नामी लेखक रहे हैं। पहले पत्रकार रह चुकीं श्रीमती नादिरा नैपाल उनकी पत्नी हैं।

इनके अनुज शिव नैपाल भी बहुत अच्छे लेखक थे।

इनका सबसे महान उपन्यास "ए हौस फार मिस्टर बिस्वास" है।

नैपाल परिवार और कपिलदेव परिवार ट्रिनिडाड में बहुत प्रभावशाली रहे हैं।

११ अगस्त २०१८ को रात में लन्दन स्थित अपने घर में ८५ वर्ष की आयु में उनका निधन हुआ। [2]

ग्रन्थ[संपादित करें]

उपन्यास

  • The Mystic Masseur - (1957)
  • The Suffrage of Elvira - (1958)
  • Miguel Street - (1959)
  • A House for Mr Biswas "ए हौस फार मिस्टर बिस्वास"- (1961)
  • Mr. Stone and the Knights Companion - (1963)
  • A Flag on the Island - (1967)
  • The Mimic Men - (1967)
  • In a Free State - (1971)
  • Guerillas - (1975)
  • A Bend in the River "ए बेंड इन दि रिवर" - (1979)
  • Finding the Centre - (1984)
  • The Enigma of Arrival - (1987)
  • A Way in the World - (1994)
  • Half a Life - (2001)
  • Magic Seeds - (2004)

अन्य

  • The Middle Passage: Impressions of Five Societies - British, French and Dutch in the West Indies and South America (1962)
  • An Area of Darkness (1964)
  • The Loss of El Dorado - (1969)
  • The Overcrowded Barracoon and Other Articles (1972)
  • India: A Wounded Civilization (1977)
  • A Congo Diary (1980)
  • The Return of Eva Perón and the Killings in Trinidad (1980)
  • Among the Believers: An Islamic Journey (1981)
  • Finding the Centre (1984)
  • A Turn in the South (1989)
  • India: A Million Mutinies Now (1990)
  • Beyond Belief: Islamic Excursions among the Converted Peoples (1998)
  • Between Father and Son: Family Letters (1999, edited by Gillon Aitken)

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

सन्दर्भ[संपादित करें]

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]