वाक् संश्लेषण

वाक्संश्लेषण मानव वाणी का कृत्रिम उत्पादन है। इस उद्देश्य के लिए उपयोग किए जाने वाले कम्प्यूटर को वाक्संश्लेषक कहा जाता है, और इसे सॉफ़्ट्वैर या हार्ड्वैर उत्पादों में लागू किया जा सकता है। लेख से वाणी प्रणाली सामान्य भाषा लेख को स्पीच में परिवर्तित करता है; अन्य प्रणालियाँ वाणी में ध्वन्यात्मक प्रतिलेखन जैसे प्रतीकात्मक भाषिक प्रतिनिधित्व प्रस्तुत करती हैं। इसका विपरीत प्रक्रिया श्रुतलेखन है।[1]
एक डेटाबेस में संग्रहीत रिकॉर्ड किए गए वक्खण्डों को जोड़कर संश्लेषित वाणी बनाया जा सकता है। संग्रहीत वाणी के इकाइयों के आकार में प्रणाली भिन्न होते हैं; एक प्रणाली जो स्वनों (वाग्ध्वनियों) या द्विस्वनों को भण्डारित करती है, सबसे बड़ी उत्पाद सीमा प्रदान करती है, किन्तु इसमें स्पाष्ट्य की कमी हो सकती है। विशिष्ट उपयोग डोमेन के लिए, सम्पूर्ण शब्दों या वाक्यों का भण्डारण उच्च-गुणवत्ता वाले उत्पाद की अनुमति देता है। वैकल्पिक रूप से, एक वाक्संश्लेषक पूरी तरह से "कृत्रिम" वाणी उत्पाद बनाने के लिए स्वर मार्ग और अन्य मानव ध्वनि विशेषताओं का एक मॉडल शामिल कर सकता है।
वाक संश्लेषण के कुछ प्रकार
[संपादित करें]- पाठ से वाक या टीटीएस (Text-to-Speech, TTS)
- ध्वन्यात्मक कूट से वाक्
टेक्स्ट से वाक संश्लेषण का बलॉक आरेख
[संपादित करें]टेक्स्ट से वाक संश्लेषण का बलॉक आरेख
क्या आप सच में भगवान को वो चढ़ा रहे हैं जो पवित्र है… या सिर्फ दिखावे की चमक में अपना धर्म खो रहे हैं? हम सब मंदिर में प्रसाद चढ़ाते हैं। मिठाई खरीदते समय क्या देखते हैं? उसकी चमक… उसकी पैकिंग… और ऊपर लगी सिल्वर वर्क। हमें लगता है — जितनी ज्यादा चमक, उतनी ज्यादा शुद्धता। लेकिन कभी रुके… और सोचा? क्या हर चमक सच में पवित्र होती है? सच्ची भक्ति दिखावे से नहीं, भावना से होती है। भगवान को चांदी की परत नहीं चाहिए, उन्हें चाहिए साफ मन, सच्चा कर्म और निर्मल विचार। आज इंसान बाहरी चमक में इतना खो गया है कि अंदर की सच्चाई देखना ही भूल गया है। हम महंगी चीज़ों को ही श्रेष्ठ समझ लेते हैं, लेकिन आध्यात्म हमें सिखाता है — “शुद्धता बाहर नहीं, भीतर होती है।” अगर प्रसाद में मिलावट है, तो पहले हमें अपने विचारों की मिलावट हटानी होगी। अगर हम सच में ईश्वर को कुछ अर्पित करना चाहते हैं, तो सबसे पहले अपना अहंकार अर्पित करें, अपनी बुराइयाँ अर्पित करें, अपनी गलत आदतें अर्पित करें। क्योंकि भगवान को आपकी मिठाई की चमक नहीं, आपके मन की रोशनी चाहिए। इसलिए पूजा में दिखावा नहीं, सच्चाई होनी चाहिए… भक्ति में बाहरी चमक नहीं, अंदर की पवित्रता होनी चाहिए… सब ऐसा ही होना चाहिए।
वाक संशलेषण संबन्धी प्रोग्राम
[संपादित करें]हिन्दी के लिये टैक्स्ट-टू-स्पीच प्रोग्राम
[संपादित करें]- वॉजमी - - फॅस्टिवल का ऑनलाइन संस्करण, वॉजमी ब्राउजर प्लगइन
- ध्वनि (पाठ से वाक) - एक मुफ्त एवं मुक्त स्रोत पाठ से वाक प्रोग्राम।
- वाचक Archived 2010-05-01 at the वेबैक मशीन - ऍमऍस वर्ड के लिये वाचक नामक टीटीऍस प्लगइन
- फ़ॅस्टिवल, हिन्दी ऍक्सटेंशन Archived 2007-12-11 at the वेबैक मशीन - लिनक्स हेतु टीटीऍस पोग्राम
- IIIT हैदराबाद द्वारा जारी एक डेमो पाठ से वार्ता अनुप्रयोग Archived 2010-05-01 at the वेबैक मशीन - टैक्स्ट फाइल को पढ़ कर सुनाता है।
- शक्ति Archived 2009-12-18 at the वेबैक मशीन - एक व्यावसायिक हिन्दी पाठ से वार्ता अनुप्रयोग तथा स्क्रीन रीडर
- ईस्पीक - एक बहुभाषी टीटीऍस प्रोग्राम
इन्हे भी देखें
[संपादित करें]- भाषा
- प्राकृतिक भाषा प्रसंस्करण (Natural language processing)
- वाक् प्रसंस्करण (Speech processing)
- वाक् की पहचान (Speech recognition)
- ध्वनि (पाठ से वाक)
- हिन्दीवाणी
- वॉजमी
- फैस्टिवल (पाठ से वाक)
- वाचक (पाठ से वाक)
- शक्ति (पाठ से वाक)
- श्रुतलेखन सॉफ्टवेयर
बाहरी कड़ियाँ
[संपादित करें]- स्वचालित रूप से पढ़ने के लिए ऑनलाइन पाठ पाठक
- हिन्दी टीटीएस: दृष्टिबाधितों हेतु तकनीकी वरदान
- हिन्दी / मराठी का पहला मुफ़्त, पाठ-से-वार्ता प्रोग्राम जारी
- Hindi Screen Reader and Hindi Text to Speech software
- ↑ Allen, Jonathan (1987). From text to speech. Internet Archive. Cambridge University Press. ISBN 978-0-521-30641-6.