महमद तृतीय

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महमद तृतीय
محمد ثالث
उस्मानिया साम्राज्य के सुल्तान
क़ैसर-ए-रूम
ख़ादिम उल हरमैन अश्शरीफ़ैन
ख़लीफ़ा-ए-इस्लाम
13वें उस्मानी सुल्तान (पादिशाह)
शासनकाल 15 जनवरी 1595 – 21/22 दिसंबर 1603
पूर्वाधिकारी मुराद तृतीय
उत्तराधिकारी अहमद प्रथम
बीवियाँ ख़नदान सुल्तान
हलीमा सुल्तान
एक और बीवी
पूरा नाम
महमद बिन मुराद
शाही ख़ानदान उस्मानी राजवंश
पिता मुराद तृतीय
माता सफ़िया सुल्तान
जन्म 26 मई 1566
मनिसा सराय, मनिसा, उस्मानिया
मृत्यु 22 दिसंबर 1603 (उम्र 37)
तोपकापी सराय, इस्तांबुल, उस्मानिया
कब्र महमद तृतीय मज़ार, हागिया सोफिया
हस्ताक्षर
धर्म सुन्नी इस्लाम

महमद तृतीय (उस्मानी तुर्कीयाई : محمد ثالث, महमद-इ सालिस; तुर्कीयाई : III. Mehmet; 26 मई 1566–21 दिसम्बर 1603) 1595 से अपनी मौत तक उस्मानिया साम्राज्य के सुल्तान थे। वे अपने पिता मुराद तृतीय की जगह सुल्तानी तख़्त पर आसीन हुए।

परिचय[संपादित करें]

उस्मानिया साम्राज्य में तख़्त पर आसीन होने के साथ ही "भ्रातृवध" की विवादस्पद परंपरा के आग़ाज़ सुल्तान महमद फ़ातिह के दौर में हुआ और आहिस्ता-आहिस्ता यह परंपरा ज़ोर पकड़ती गई। इसकी बुनियादी वजह नए सुल्तान के लिए बग़ावत के ख़तरों को कम करना था और महमद तृतीय तख़्त पर आसीन होने के तुरन्त बाद भ्रातृवध के इस सिलसिले में, ने उनके 27 भाईयों का वध किया।[1] इसके साथ-साथ उन्होंने अपनी बीस से ज़्यादा बहनों को भी वध किया। वे शासन करने में कोई रुचि नहीं रखते थे और तमाम राजनैतिक अधिकार उनकी माँ सफ़िया सुल्तान के हाथों में थे।[2] इनके दौर की महत्वपूर्ण घटना हंगरी में ऑस्ट्रिया और उस्मानियों के दरमियान युद्ध था जो 1596 से 1605 तक जारी रहा था। युद्ध में उस्मानियों की पराजय के कारण से सुल्तान को सेना की अगुवाई ख़ुद संभालनी पड़ी और वे सुलेमान प्रथम के बाद युद्धक्षेत्र में उतरने वाले पहले उस्मानी शासक थे। इनकी सेना ने 1596 में एगेर पर विजय प्राप्त की और केरेसत्ज़ेस की लड़ाई में हाब्सबर्ग और ट्रांसिल्वेनिया की सेनाओं को हरा दी।[3] अगले साल सुल्तान के वैद्यों ने उनकी बिगड़ती सेहत की वजह से उनको युद्धक्षेत्र में उतरने से मना कर दिया।

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. Quataert, Donald. The Ottoman Empire, 1700–1922, p.90. Cambridge University Press, 2000. ISBN 0-521-63328-1
  2. Kinross, p.288
  3. Finkel, Caroline. Osman's Dream: The Story of the Ottoman Empire, p.175. Basic Books, 2005. ISBN 0-465-02396-7