बायज़ीद द्वितीय

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बायज़ीद द्वितीय
بايزيد ثانى
उस्मानिया के सुल्तान
क़ैसर-ए-रूम
पादिशाह
8वें उस्मानी सुल्तान (पादिशाह)
शासनकाल 22 मई 1481 – 24 अप्रैल 1512
पूर्वाधिकारी महमद द्वितीय
उत्तराधिकारी सलीम प्रथम
पत्नियाँ निगार ख़ातून
शिरीन ख़ातून
गुलरूह ख़ातून
बुलबुल ख़ातून
हुस्नुशाह ख़ातून
गुलबहार ख़ातून
मोहतरमा ख़ातून
शाही ख़ानदान उस्मानी राजवंश
पिता महमद द्वितीय
माता गुलबहार ख़ातून[1][2] या
सित्तिशाह ख़ातून[3][4]
जन्म 3 दिसम्बर 1447
मृत्यु 26 मई 1512(1512-05-26) (उम्र 64)
बुयुकचेकमेजे
कब्र बायज़ीद द्वितीय मस्जिद, इस्तांबुल
हस्ताक्षर
धर्म सुन्नी इस्लाम

बायज़ीद द्वितीय (3 दिसम्बर 1447 – 26 मई 1512) (उस्मानी तुर्कीयाई: بايزيد ثانى बायज़ीद-इ सानी, तुर्कीयाई: II. Bayezid या II. Beyazıt) महमद द्वितीय के ज्येष्ठ पुत्र तथा उनके उत्तराधिकारी थे। वे 1481 से 1512 तक उस्मानिया के सुल्तान रहे। इनके शासनकाल के दौरान, बायज़ीद द्वितीय ने साम्राज्य को संयुक्त व सशक्त बनाया और साथ-ही-साथ उन्होंने सफ़वी राजवंश की तरफ़ से एक विद्रोह को ख़त्म कर दिया था। जब यूरोप के कैथोलिक राजाओं ने संपूर्ण यूरोप और ख़ास करके स्पेन से सभी सेपहार्दी यहूदियों को निकालने की घोषणा, अलहम्बरा फ़रमान, जारी किया, बायज़ीद द्वितीय ने इन यहूदियों को सहायता दिया और उन्होंने उस्मानिया साम्राज्य के इलाक़ों में इनके घर पुनः बसाने की योजना बनाई। अतः बायज़ीद द्वितीय यूरोपीय यहूदियों को बचाने के लिए उल्लेखनीय हैं।

शुरुआती जीवन[संपादित करें]

बायज़ीद द्वितीय महमद द्वितीय (1432–81) और गुलबहार ख़ातून के बेटे थे।

बायज़ीद द्वितीय ने एक अन्य गुलबहार ख़ातून से शादी की थी, और उन दोनों के बेटे सलीम प्रथम साम्राज्य के उत्तराधिकारी बने।

सन्दर्भ[संपादित करें]