अहमद तृतीय

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अहमद तृतीय
احمد ثالث
उस्मानिया साम्राज्य के सुल्तान
क़ैसर-ए-रूम
ख़ादिम उल हरमैन अश्शरीफ़ैन
इस्लाम के ख़लीफ़ा
23वें उस्मानी सुल्तान (बादशाह)
शासनकाल 22 अगस्त 1703साँचा:Snd1 अक्टूबर 1730
पूर्वाधिकारी मुस्तफ़ा द्वितीय
उत्तराधिकारी महमूद प्रथम
जीवनसाथियाँ महर ए शाह क़ादन
शरमी क़ादन
अन्य
पूरा नाम
अहमद बिन महमद+
शाही ख़ानदान उस्मानी राजवंश
पिता महमद चतुर्थ
माता अमतुल्लाह राबिया गुलनुश सुल्तान
जन्म 30/31 दिसंबर 1673
हाजीओलु पाज़ारजक, दोब्रुझ़ा, उस्मानिया
मृत्यु 1 जुलाई 1736(1736-07-01) (उम्र 62)
क़ुस्तुंतुनिया, उस्मानिया
हस्ताक्षर
धर्म सुन्नी इस्लाम

अहमद तृतीय (उस्मानी तुर्कीयाई: احمد ثالث, अहमद-इ सालिस, 30/31 दिसंबर 1673साँचा:Snd1 जुलाई 1736) उस्मानी साम्राज्य के सुल्तान रहे थे। वे महमद चतुर्थ (शासनकाल. 1648–87) के बेटे थे। उनकी माँ अमतुल्लाह राबिया गुलनुश सुल्तान थीं, जिनका मूल नाम एवमानिया वोरिया था, उनकी नस्ल यूनानी थी।[1][2][3][4][5] उनका जन्म हाजीओलु पाज़ारजक, दोब्रुजा में हुआ था। वे 1703 में तख़्तनशीन हो गए, जब उनके भाई मुस्तफ़ा द्वितीय (1695–1703) ने तख़्त को त्याग दिया था।[6] वज़ीर-ए-आज़म नौशहरी दामाद इब्राहीम पाशा और सुल्तान की बेटी फ़ातिमा सुल्तान (जो नौशहरी की बीवी भी थी) ने 1718 से 1730 तक असल हकूमत संभाली, यह दौर ट्यूलिप युग कहा जाता है।

जीवनी[संपादित करें]

फ़्रांस के साथ अहमद तृतीय के अच्छे ताल्लुक़ात थे जिसने रूस की नाराज़गी को उकसाया। उस्मानिया ने स्वीडन के शार्ल्स सप्तम (1682–1718) को पनाह दिया जब रूस के पीटर महान (1672–1725) ने स्वीडों को पोल्तावा की लड़ाई (1709) में हराया था।[7] सुल्तान अहमद तृतीय ने 1710 में, शार्ल्सा सप्तम के कहने पर, रूस पर जंग का ऐलान किया। बालाताज महमद पाशा की अगुवाई में उस्मानी सेना ने प्रुत की लड़ाई में एक बड़ी जीत हासिल की थी। बाद में रूसियों ने अज़ोव के क्षेत्र उस्मानियों को दिया और रूसियों ने तागानरोग के क़िले और उनके बाक़ी नज़दीकी क़िल्लों को ध्वस्त किया। पोलिश-लिथुआनियन राष्ट्रमंडल में रूस की दख़लअंदाज़ी भी समाप्त हो गई।[6] रूसियों पर उस्मानियों के बाद की जीतें इतनी विशाल थीं कि अगर सुल्तान चाहता था, उस्मानी सेना रूसी राजधानी मोस्को पर क़ब्ज़ा कर सकता था। लेकिन ऐसा नहीं हुआ क्योंकि सफ़वियों ने उस्मानिया पर हमला किया। इस कारण से सुल्तान के ध्यान सफ़वी हमलों की ओर चलाना पड़ा।

उनकी और उनके क़रीबी वज़ीरों की महंगी और बड़ी शानोशौक़त से भरी हुई जीवनशैलियों की वजह से सुल्तान अहमद तृतीय आवाम के मध्य अप्रिय हो गया। अल्बानियाई पात्रोना ख़लील की अगुवाई में, सत्रह यनीचरियों ने कुछ नागरिकों की सहायता से, 20 सितंबर पर विद्रोह किया। इस विद्रोह के कारण से सुल्तान तख़्त त्यागने के लिए मजबूर कर दिया गया था।

अहमद ने स्वेच्छा से अपने भतीजा, महमूद प्रथम (1730–54) को तख़्त पर बिठाया था। इसके बाद वे कफ़स में सेवानिवृत्त हुए और छः माह के पश्चात उनकी मृत्यु हुई।

मुग़ल साम्राज्य के साथ संबंध[संपादित करें]

जहांदार शाह[संपादित करें]

1712 में मुग़ल बादशाह जहांदार शाह, जो औरंगज़ेब के पोते थे, ने उस्मानी सुल्तान अहमद तृतीय को तोहफ़े भेजे थे और उन्होंने अपने आप को "उस्मानी सुल्तान के समर्पित प्रशंसक" के रूप में वर्णित किया।[8]

फ़र्रुख़ सियर[संपादित करें]

मुग़ल बादशाह फ़र्रुख़ सियर, औरंगज़ेब के एक और पोते, ने उस्मानियों को ख़त भेजा। इस बार उस्मानी वज़ीर-ए-आज़म नौशहरी इब्राहीम पाशा ने ख़त मिला था। ख़त में मुग़ल सिपहसालार सैयद हसन अली ख़ान बरहा द्वारा राजपूत और मराठा विद्रोहों को ख़त्म करने की कोशिशों का वर्णन था।[9]

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. Freely, John (2001). The lost Messiah. Viking. प॰ 132. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 0-670-88675-0. "He set up his harem there, his favourite being Rabia Giilniis Ummetiillah, a Greek girl from Rethymnon on Crete" 
  2. Bromley, J. S. (1957). The New Cambridge Modern History. University of California: University Press. प॰ 554. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 0-521-22128-5. "the mother of Mustafa II and Ahmed III was a Greek" 
  3. Sardo, Eugenio Lo (1999). Tra greci e turchi: fonti diplomatiche italiane sul Settecento ottomano. Consiglio nazionale delle ricerche. प॰ 82. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 88-8080-014-0. "Their mother, a Greek, lady named Rabia Gülnûş, continued to wield influence as the Valide Sultan - mother of the reigning sultan" 
  4. Library Information and Research Service (2005). The Middle East. Library Information and Research Service. प॰ 91. "She was the daughter of a Greek family and she was the mother of Mustafa II (1664–1703), and Ahmed III (1673–1736)." 
  5. Baker, Anthony E - Freely, John (1993). The Bosphorus. Redhouse Press. प॰ 146. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 975-413-062-0. "The Valide Sultan was born Evmania Voria, daughter of a Greek priest in a village near Rethymnon on Crete. She was captured by the Turks when they took Rethymnon in 1645." 
  6. Chisholm 1911.
  7. Farooqi, N.R. (1989). Mughal-Ottoman relations: a study of political & diplomatic relations between Mughal India and the Ottoman Empire, 1556-1748. Idarah-i Adabiyat-i Delli. https://books.google.com/books?id=uB1uAAAAMAAJ. 
  8. Mughal-Ottoman relations: a study of political & diplomatic relations ... - Naimur Rahman Farooqi. Books.google.com. 1989. https://books.google.com/books?id=uB1uAAAAMAAJ&q=Farrukhsiyar. अभिगमन तिथि: 2012-04-29.