बाबा दीप सिंह

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बाबा दीप सिंह जी
Akali Deep Singh.jpg
बाबा दीप सिंह चण्डी
जन्म 26 जनवरी 1682
Pahuwind, Amritsar district, India
मृत्यु 11 नवम्बर 1757
स्वर्ण मन्दिर, अमृतसर
प्रसिद्धि कारण

सिखों में बाबा दीप सिंह (1682-1757) सिख धर्म के सबसे पवित्र शहीदों में से एक और एक उच्च धार्मिक व्यक्ति के रूप में पूजनीय हैं। उन्हें सिख गुरुओं की शिक्षाओं के लिए उनके त्याग और समर्पण के लिए याद किया जाता है। बाबा दीप सिंह, शालीन पंथ अकाली बुद्ध दल के तत्कालीन प्रमुख नवाब कपूर सिंह द्वारा स्थापित खालसा सेना का एक आदेश - एमएल शहीद तरन दल के पहले प्रमुख थे।

दमदमी टकसाल ने यह भी कहा कि वह उनके आदेश का पहले प्रमुख थे। [२] उनका नाम के आगे बाबा दीप सिंह और बाबा शब्द उनके सम्मान मे उनके नाम के आगे आपजी को विशेष सम्मान देने के लिए लगाया जाता है ।

प्रारंभिक जीवन[संपादित करें]

बाबा दीप सिंह का जन्म 1682 में उनके पिता भगत और उनकी मां जियोनी के घर हुआ था। वह अमृतसर जिले के पीहूविंड गाँव में रहते थे। [३]

वह 1699 में वैशाखी के दिन आनंदपुर साहिब गए थे,यह वो विशेष दिन था जिस दिन दशमेश पिता गुरू गोबिंद सिंह जी ने खालसे की सर्जना के लिए निश्चित किया था उन्हें उस दिन खंडेबाटे की पौहुल अर्थात अमृत संचार (खालसा में औपचारिक दीक्षा) के माध्यम से गुरु गोविंद सिंह द्वारा खालसा में गुरू के सिक्ख का रूतबा दिया गया था। एक युवा अमृतधारी सिक्ख के रूप में, उन्होंने गुरु गोबिंद सिंह के सानिध्य मे सहचर्या, तलवारबाजी, घुड़सवारी और अन्य सिक्ख मार्शल आर्ट आदि कौशल सीखने में काफी समय बिताया। भाई मणि सिंह से उन्होंने गुरुमुखी शब्द पढ़ना और लिखना सीखा और गुरबाणी मे दर्ज गुरुओं एवम भगतो के शब्द बाणी की व्याख्या को समझने मे काफी समय व्यतीत किया । आनंदपुर साहिब में दो साल बिताने के बाद, वह 1702 में तलवंडी साबो में गुरु गोबिंद सिंह द्वारा बुलाए जाने से पहले 1702 में अपने गांव लौट आए, जहां उन्होंने भाई मणि सिंह के साथ पुरातन गुरु ग्रंथ साहिब की प्रतियां बनाने में मदद की। [4]

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. Jacques, Tony. Dictionary of Battles and Sieges. Greenwood Press. पृ॰ 400. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 978-0-313-33536-5.