बन्दा सिंह बहादुर

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सरदार बन्दा सिंह बहादुर
जन्म 27 October 1670
राजौरी, भारत
मृत्यु साँचा:Death-date and age
दिली
अन्य नाम माधो दास (पूर्व नाम )
सक्रिय वर्ष 1708-1716
प्रसिद्धि कारण मुगलों से लोहा लेने के लिये प्रसिद्ध हैं
जमींदारी प्रथा समाप्त करने, सरहिन्द के नवाब वजीर खान को मारा, पंजाब और भारत के अन्य राज्यो में स्वराज और खालसा राज की स्थापना की।[1]
पूर्वाधिकारी Chhajja Singh Dhillon
संतान 1 (Ajai Singh)
मोहाली में बंदा सिंह बैरागी का स्मारक

बन्दा सिंह बहादुर सिखौ के प्रथम जरनैल थे। उन्हें बन्दा बहादुर,[2] लक्ष्मन दास और माधो दास[3][4] भी कहते हैं। वे पहले ऐसे सिख सेनापति हुए, जिन्होंने मुगलों के अजेय होने के भ्रम को तोड़ा; छोटे साहबजादों की शहादत का बदला लिया और गुरु गोबिन्द सिंह द्वारा संकल्पित प्रभुसत्ता सम्पन्न लोक राज्य की राजधानी लोहगढ़ मे खालसा राज की नींव रखी। यही नहीं, उन्होंने गुरु नानक देव जी और गुरू गोबिन्द सिंह जी के नाम से सिक्का और मोहरे जारी करके, निम्न वर्ग के लोगों की उच्च पद दिलाया और हल वाहक किसान-मजदूरों को जमीन का मालिक बनाया।

परिचय[संपादित करें]

बाबा बन्दा सिंह बहादुर का जन्म कश्मीर स्थित पुंछ जिले के तहसील राजौरी क्षेत्र में 1670 ई. तदनुसार विक्रम संवत् 1727, कार्तिक शुक्ल 13 को हुआ था। वे पंजाबीयोंं के भारद्वाज गोत्र से सम्बद्ध थे और उनका वास्तविक नाम लक्ष्मणदेव था। लक्ष्मण देव के भाग्य मे विद्या नही थी, लेकिन छोटी सी आयु मे पहाडी जवानो की भांति कुश्ती और शिकार आदि का बहुत शौक था | वह अभी 15 वर्ष की उम्र के ही थे कि ऎेक गर्भवती हिरणी के उनके हाथो हुए शिकार ने उने अतयंत शोक मे ङाल दिया। इस घटना का उनके मन मे गहरा प्रभाव पड़ा। वह अपना घर-बार छोडकर ऎेक बेरागी बन गये। वह जानकी दास नाम के एक बैरागी के शिष्य हो गए और उनका नाम माधोदास बैरागी पड़ा। तदन्तर उन्होंने एक अन्य बाबा रामदास बैरागी का शिष्यत्व ग्रहण किया और कुछ समय तक पंचवटी (नासिक) में रहे। वहाँ एक औघड़नाथ से योग की शिक्षा प्राप्त कर वह पूर्व की ओर दक्षिण के नान्देड क्षेत्र को चला गए जहाँ गोदावरी के तट पर उन्होंने एक आश्रम की स्थापना की।

गुरु गोबिन्द सिंह जी से प्रेरणा[संपादित करें]

3 सितंबर 1708 ई. को नान्देड में सिक्खों के दसवें गुरु गुरु गोबिन्द सिंह जी ने इस आश्रम मे, और उन्हें सिक्ख बनाकर उसका नाम बन्दा सिंह बहादुर रख दिया। पंजाब और बाकी अन्य राज्यो के हिंदुयो के प्रति दारुण यातना झेल रहे तथा गुरु गोबिन्द सिंह जी के सात और नौ वर्ष के उन महान बच्चो की सरहिंद के नवाब वजी़र ख़ान के द्ववारा नि्मम हत्या का प्रतिशोद लेने के लिए रवाना किया। गुरु गोबिन्द सिंह के आदेश से ही वे पंजाब आये और सिक्खों के सहयोग से मुगल अधिकारियों को पराजित करने में सफल हुए। मई, 1710 में उन्होंने सरहिंद को जीत लिया और सतलुज नदी के दक्षिण में सिक्ख राज्य की स्थापना की। उन्होंने खालसा के नाम से शासन भी किया और गुरुओं के नाम के सिक्के चलवाये।

राज्य-स्थापना हेतु आत्मबलिदान[संपादित करें]

बन्दा सिंह ने अपने राज्य के एक बड़े भाग पर फिर से अधिकार कर लिया और इसे उत्तर-पूर्व तथा पहाड़ी क्षेत्रों की ओर लाहौर और अमृतसर की सीमा तक विस्तृत किया। 1715 ई. के प्रारम्भ में बादशाह फर्रुखसियर की शाही फौज ने अब्दुल समद खाँ के नेतृत्व में उन्हें गुरुदासपुर जिले के धारीवाल क्षेत्र के निकट गुरुदास नंगल गाँव में कई मास तक घेरे रखा। खाद्य सामग्री के अभाव के कारण उन्होंने 7 दिसम्बर को आत्मसमर्पण कर दिया। फरवरी 1716 को 794 सिक्खों के साथ वह दिल्ली लाये गए जहाँ 5 मार्च से 13 मार्च तक प्रति दिन 100 की संख्या में सिक्खों को फाँसी दी गयी। 16 जून को बादशाह फर्रुखसियर के आदेश से बन्दा सिंह तथा उनके मुख्य सैन्य-अधिकारियों के शरीर काटकर टुकड़े-टुकड़े कर दिये गये।

बन्दा सिंह बहादुर का सुशासन[संपादित करें]

मरने से पूर्व बन्दा सिंह बहादुर जी ने अति प्राचीन ज़मींदारी प्रथा का अन्त कर दिया था तथा कृषकों को बड़े-बड़े जागीरदारों और जमींदारों की दासता से मुक्त कर दिया था। वह साम्प्रदायिकता की संकीर्ण भावनाओं से परे थे। मुसलमानों को राज्य में पूर्ण धार्मिक स्वातन्त्र्य दिया गया था। पाँच हजार मुसलमान भी उनकी सेना में थे। बन्दासिंह ने पूरे राज्य में यह घोषणा कर दी थी कि वह किसी प्रकार भी मुसलमानों को क्षति नहीं पहुँचायेगे और वे सिक्ख सेना में अपनी नमाज़ पढ़ने और खुतवा करवाने मे स्वतन्त्र होंगे।

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. Sagoo, Harbans (2001). Banda Singh Bahadur and Sikh Sovereignty. Deep & Deep Publications. https://archive.org/stream/BandaSinghBahadurAndSikhSovereignty/BandaSinghBahadurAndSikhSovereignty_djvu.txt. 
  2. Rajmohan Gandhi, Revenge and Reconciliation, प॰ 117–118, https://books.google.ca/books?id=OVqP54UEe4QC&pg=PA117 
  3. Ganda Singh. "Banda Singh Bahadur". Encyclopaedia of Sikhism. Punjabi University Patiala. Retrieved 27 January 2014. 
  4. "Banda Singh Bahadur". Encyclopedia Britannica. Retrieved 15 May 2013. 

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]