कीर्तन
कीर्तन हिन्दू धर्म तथा सिख धर्म में ईश्वर या देवता की भक्ति हेतु उनके नामों, मंत्रों अथवा भजनों का सामूहिक गान है। यह भक्ति योग और संगीत का संगम माना जाता है। कीर्तन में भजन, वाद्ययंत्रों की संगति और भक्तों का सामूहिक गान शामिल होता है। इसे भक्ति के मार्गों में एक महत्वपूर्ण साधना माना गया है, अन्य प्रमुख साधनाओं में श्रवण, स्मरण, अर्चन आदि सम्मिलित हैं।[1]
भारत में प्रचलित परंपरा के अनुसार कीर्तन से पहले मंगलाचरण, हवन, गणेश वंदना और सरस्वती वंदना की जाती है। इसके बाद जिस देवता या भगवान की उपासना की जा रही होती है, उनके गुणों और लीलाओं का गान किया जाता है। कार्यक्रम का समापन प्रायः आरती, शंख-ध्वनि और प्रसाद वितरण से होता है।
कीर्तन में उपयोग होने वाले सामान्य वाद्ययंत्रों में मृदंग, ढोलक, झांझ, मंजीरा, हारमोनियम आदि प्रमुख हैं। सामूहिक गायन और वाद्ययंत्रों की ध्वनि से वातावरण में भक्तिमय ऊर्जा उत्पन्न होती है।
परंपरा
[संपादित करें]कीर्तन की परंपरा भारत के विभिन्न क्षेत्रों में अलग-अलग रूपों में मिलती है। महाराष्ट्र में वारकरी संप्रदाय का भजन-कीर्तन, बंगाल में नाम-संकीर्तन और उत्तर भारत में जागरण अथवा भजन संध्या इसके लोकप्रिय रूप हैं। सिख धर्म में गुरुवाणी का सामूहिक गान "गुरबाणी कीर्तन" कहलाता है।
कीर्तन हेतु सामग्री
[संपादित करें]कीर्तन आयोजन में प्रायः पूजा और भजन-गायन से सम्बंधित सामग्री का प्रयोग किया जाता है। विभिन्न क्षेत्रों और परंपराओं के अनुसार इसमें भिन्नता हो सकती है, किन्तु सामान्यतः प्रयुक्त सामग्रियों में निम्न सम्मिलित हैं:
- दूब और मिट्टी का ढेला
- जल कलश (आम्र पल्लव सहित), गंगाजल अथवा नारियल जल
- सिंदूर (कुमकुम), यज्ञोपवीत और कलावा
- धूपबत्ती, चावल, कपूर और रुई
- लौंग, सुपारी तथा विभिन्न प्रकार के अनाज
- बताशे, पंचमेवा, मिश्री, इलायची इत्यादि नैवेद्य
- मौसमी फल, मावे की मिठाई तथा अन्य प्रसाद सामग्री
- लाल एवं सफेद वस्त्र, चुनरी और देवी-श्रृंगार सामग्री
- दीपक, घी तथा आरती के लिए आवश्यक पूजन सामग्री
- थाली, कटोरी, चम्मच जैसे पूजन पात्र
- फूल, फूलमालाएँ और इत्र
इन सामग्रियों का प्रयोग पूजा, भजन-गायन, आरती और प्रसाद-वितरण की परंपरा के अंतर्गत किया जाता है।
इन्हें भी देखें
[संपादित करें]संदर्भ
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- ↑ "नवविधा भक्ति - कीर्तन भक्ति !". सनातन संस्था (अमेरिकी अंग्रेज़ी भाषा में). 2020-09-16. अभिगमन तिथि: 2025-09-29.