चार साहिबज़ादे

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चार साहिबज़ादे शब्द का प्रयोग सिखों के दशम गुरु श्री गुरु गोबिन्द सिंह जी के चार सुपुत्रों - साहिबज़ादा अजीत सिंह, जुझार सिंह, ज़ोरावर सिंह, व फतेह सिंह को सामूहिक रूप से संबोधित करने हेतु किया जाता है।

2014 नवंबर में उनकी जीवनी पर इस नाम से एक पंजाबी फिल्म भी बनी।

साहिबज़ादा अजीत सिंह[संपादित करें]

अजीत सिंह श्री गुरु गोबिन्द सिंह के सबसे बड़े पुत्र थे। चमकौर के युद्ध में अजीत सिंह अतुलनीय वीरता का प्रदर्शन करते हुए वीरगति को प्राप्त हुए।

इनके नाम पर पंजाब के मोहाली शहर का नामकरण साहिबज़ादा अजीत सिंह नगर किया गया।

साहिबज़ादा जुझार सिंह[संपादित करें]

अजीत सिंह से छोटे जुझार सिंह अपने बड़े भाई के बलिदान के पश्चात् नेतृत्व संभाला तथा पदचिन्हों पर चलते हुए अतुलनीय वीरता का प्रदर्शन करते हुए वीरगति को प्राप्त हुए।


साहिबज़ादा ज़ोरावर सिंह[संपादित करें]

गुरु गोविंद सिंह द्वारा आनंदपुर का किला छोड़ने के बाद सरसा नदी पार करते समय सारा परिवार बिछड़ गया। दोनों छोटे साहिबज़ादे ज़ोरावर सिंह व फतेह सिंह अपनी दादी माता गूजरी जी के साथ अलग रास्ते चले गए। उनके ही एक सेवक के विश्वासघात के कारण सरहिंद के नवाब वज़ीर खान ने उन्हें बंदी बना लिया गय़ा तथा बाद में जीवित ही दीवार में चिनवा दिया।

साहिबज़ादा फतेह सिंह[संपादित करें]

फतेह सिंह गुरु गोबिन्द सिंह के सबसे छोटे पुत्र थे। इन्हें इनके बड़े भाई ज़ोरावर सिंह सहित सरहिंद के नवाब वज़ीर खान द्वारा बंदी बना लिया गय़ा तथा बाद में जीवित ही दीवार में चिनवा दिया गया।

सन्दर्भ[संपादित करें]