पद परीक्षण

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गणित में, अभिसरण के लिए nवें-पद का परीक्षण अनन्त श्रेणी के अभिसरण के लिए सरलतम परीक्षण है।[1]:

  • यदि अथवा यदि सीमान्त मान उपलब्ध नहीं है तो अभिसारी है।

अधिकतर लेखक इसे परीक्षण का नाम नहीं देते और केवल लघु नाम देते हैं।[2]

उपयोग[संपादित करें]

कठीन अभिसरण परीक्षण से भिन्न, पद परीक्षण यह सिद्ध नहीं कर सकता कि श्रेणी अभिसारी है। विशेष रूप से, परीक्षण से अभिसारी कहना असत्य है और इसके स्थान पर निम्नलिखित रूप को काम में लिया जा सकता है:

  • यदि तब अभिसारी हो भी सकती है अथवा नहीं भी। अन्य शब्दों में, यदि होने पर परीक्षण अनिर्णित रहता है।

हरात्मक श्रेणी अपसारी श्रेणी का एक चिरसम्मत उदाहरण है जिसके पद परीक्षण शून्य की ओर अग्रसर है।[3] p-श्रेणी का अधिक व्यापक रूप,

परीक्षण के सम्भावित परिणामों का उदाहरण है:

  • यदि p ≤ 0, श्रेणी को अपसारी परिभाषित करता है।
  • यदि 0 < p ≤ 1, तब पद परीक्षण अनिर्णित रहता है लेकिन श्रेणी अभिसरण के पूर्णांकीय परीक्षण द्वारा अपसारी प्राप्त होती है।
  • यदि 1 < p, तब पद परीक्षण अनिर्णित रहता है लेकिन श्रेणी पुनः अभिसरण के पूर्णांकीय परीक्षण द्वारा अभिसारी प्राप्त होती है।

उपपत्ति[संपादित करें]

परीक्षण को आम तौर पर प्रतिपरिवर्तित रूप में सिद्ध किया जाता है:

  • यदि अभिसारी है तो होगा।

सीमा जोड़-तोड़[संपादित करें]

यदि sn श्रेणी के आंशिक संकलन हैं तो श्रेणी किसी संख्या s पर अभिसारी होगी यदि

तब[4]

कौशी कसौटी[संपादित करें]

अभिगृहीत के अनुसार श्रेणी अभिसारी होगी यदि यह कौशी अभिसरण परीक्षण में सफल हो: प्रत्येक के लिए एक संख्या N इस प्रकार होगी कि

जो सभी n > N और p ≥ 1 के लिए सही है। p = 1 रखने पर कथन की पुष्टि होती है।[5]

प्रसार[संपादित करें]

पद परीक्षण का सरलतम संस्करण वास्तविक संख्याओं की अनन्त श्रेणियों पर लागू होता है। उपरोक्त दो उपपत्तियाँ अन्य मानकित सदिश समष्टि में भी कार्य करता है।[6]

टिप्पणी[संपादित करें]

  1. Kaczor p.336
  2. For example, Rudin (p.60) states only the contrapositive form and does not name it. Brabenec (p.156) calls it just the nth term test. Stewart (p.709) calls it the Test for Divergence.
  3. Rudin p.60
  4. Brabenec p.156; Stewart p.709
  5. Rudin (pp.59-60) uses this proof idea, starting with a different statement of Cauchy criterion.
  6. Hansen p.55; Șuhubi p.375

सन्दर्भ[संपादित करें]

  • Brabenec, Robert (2005). Resources for the study of real analysis. MAA. ISBN 0883857375. 
  • Hansen, Vagn Lundsgaard (2006). Functional Analysis: Entering Hilbert Space. World Scientific. ISBN 9812565639. 
  • Kaczor, Wiesława and Maria Nowak (2003). Problems in Mathematical Analysis. American Mathematical Society. ISBN 0821820508. 
  • Rudin, Walter (1976) [1953]. Principles of mathematical analysis (3e सं॰). McGraw-Hill. ISBN 0-07-054235-X. 
  • Stewart, James (1999). Calculus: Early transcendentals (4e सं॰). Brooks/Cole. ISBN 0-534-36298-2. 
  • Șuhubi, Erdoğan S. (2003). Functional Analysis. Springer. ISBN 1402016166.