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ज़करिया (इस्लाम)

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ज़करिया (इस्लाम) अंग्रेज़ी:Zechariah in Islam) क़ुरआन में वर्णित अरबी भाषा में नबी पैग़म्बर का नाम है। वह हज़रत सुलेमान बिन दाऊद (अ .) के वंशजों में से एक थे।

इस्लाम धर्म की महत्वपूर्ण पुस्तक क़िसासुल अंबिया और ऐतिहासिक पुस्तकों के अनुसार "हज़रत जकरिया निःसंतान थे। पत्नी बहुत बूढ़ी थी, लेकिन उसे बच्चे चाहिए थे। उन्होंने वारिस के लिए अल्लाह से दुआ की। ईश्वर ने आपको एक पुत्र दिया जिसका नाम आपने ईश्वर के आदेश के अनुसार हज़रत याह्या (अ.) रखा । वृक्ष के साथ आरी से काटे जाने की कथा इनके ही संबंध में मशहूर है वो क़ुरआन में नहीं पुस्तकों में अलग अलग राये है।[1]

क़ुरआन में वर्णन

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  • ज़करिया पर भी कृपा की। याद करो जबकि उसने अपने रब को पुकारा, "ऐ मेरे रब! मुझे अकेला न छोड़ यूँ, सबसे अच्छा वारिस तो तू ही है।" (क़ुरआन 21:89)
  • उसने कहा, "मेरे रब! मेरी हड्डियाँ कमज़ोर हो गई और सिर बुढापे से भड़क उठा। और मेरे रब! तुझे पुकारकर मैं कभी बेनसीब नहीं रहा (4) मुझे अपने पीछे अपने भाई-बन्धुओं की ओर से भय है और मेरी पत्नी बाँझ है। अतः तू मुझे अपने पास से एक उत्ताराधिकारी प्रदान कर, (5) जो मेरा भी उत्तराधिकारी हो और याक़ूब के वशंज का भी उत्तराधिकारी हो। और उसे मेरे रब! वांछनीय बना।" (6) (उत्तर मिला,) "ऐ ज़करीया! हम तुझे एक लड़के की शुभ सूचना देते है, जिसका नाम यह्यार होगा। हमने उससे पहले किसी को उसके जैसा नहीं बनाया।" (7) उसने कहा, "मेरे रब! मेरे लड़का कहाँ से होगा, जबकि मेरी पत्नी बाँझ है और मैं बुढ़ापे की अन्तिम अवस्था को पहुँच चुका हूँ?" (8) कहा, "ऐसा ही होगा। तेरे रब ने कहा कि यह मेरे लिए सरल है। इससे पहले मैं तुझे पैदा कर चुका हूँ, जबकि तू कुछ भी न था।" (9) उसने कहा, "मेरे रब! मेरे लिए कोई निशानी निश्चित कर दे।और" कहा, "तेरी निशानी यह है कि तू भला-चंगा रहकर भी तीन रात (और दिन) लोगों से बात न करे।" (क़ुरआन 19:4-10)

इन्हें भी देखें

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इब्राहीमी धर्म

इस्लाम के पैग़म्बर

क़िसासुल अंबिया

सन्दर्भ

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  1. ""हज़रत जकरिया "अलैहिस्सलाम क़ससुल अंबिया-पृष्ठ 286". https://archive.org/. {{cite web}}: External link in |website= (help)

बाहरी कड़ियाँ

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