इलियास (इस्लाम)
| इस्लाम |
|---|
इलियास (इस्लाम) (अंग्रेज़ी:Elijah in Islam) क़ुरआन में वर्णित अरबी में नबी का नाम है। दो सूरहों में उल्लेख है।
इस्लाम धर्म की महत्वपूर्ण पुस्तक क़िसासुल अंबिया और ऐतिहासिक पुस्तकों के अनुसार हज़रत इलियास[1] को मूसा के बाद भेजा गया था। इतिहासकारों ने उनकी वंशावली इलियास बिन यासीन बिन फखास बिन याग्रा बिन हारून के रूप में लिखी है और आमतौर पर यह माना जाता है कि उन्हें सीरिया के लोगों का मार्गदर्शन करने के लिए भेजा गया था।
मुसलमान मानते हैं कि आप हमेशा जीवित रहेंगे और जमीन पर लोगों का मार्गदर्शन करेंगे।जैसे हज़रत खिजर को मार्गदर्शन करने का जिम्मा सौंपा गया है।
क़ुरआन में 25 नबियों का ज़िक्र हुआ है।
क़ुरआन में वर्णन
[संपादित करें]और ज़करिया, यह्या , ईसा और इलयास को भी (मार्ग दिखलाया) । इनमें का हर एक योग्य और नेक था (क़ुरआन 17:85)
और निस्संदेह इलयास भी रसूलों में से था। ) याद करो, जब उसने अपनी क़ौम के लोगों से कहा, "क्या तुम डर नहीं रखते? क्या तुम 'बअत' को पुकारते हो और सर्वोत्तम सृष्टा को छोड़ देते हो; अपने रब और अपने अगले बाप-दादा के रब, अल्लाह को!" (क़ुरआन 37:123-126)
सन्दर्भ
[संपादित करें]- ↑ ""हज़रत इलयास"-क़ससुल अंबिया-पृष्ठ 216 से 218". https://archive.org/.
{{cite web}}: External link in(help)|website=