ग़नीमत

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ग़नीमत (अरबी:غنيمة,गनीमत) अरबी शब्द ग़नी (सम्पन्नता) से बना है, ऐसा माल को कहते हैं जिसके प्राप्त होने से ग़नी अर्थात अमीर या खुश हाल हो जायें। इस्लाम धर्म में पराक्रम और विजय के बल युद्ध में पराजित दुश्मन के जीते गये या उसके छोड़ के भाग जाने पर जो कुछ क़ब्ज़े में आता है उसके लिए प्रयोग किया जाता है।[1]

विवरण[संपादित करें]

इस्लाम धर्म में ग़नीमत को 'माले ग़नीमत' भी कहते हैं।

क़ुरआन में उल्लेख[संपादित करें]

(सूरा) अल-अनफ़ाल : क़ुरआन का 8 वां अध्याय की 41 वां आयत में:

और जान[1] लो कि तुम्हें जो कुछ ग़नीमत में मिला है, उसका पाँचवाँ भाग अल्लाह तथा रसूल और (आपके) समीपवर्तियों तथा अनाथों, निर्धनों और यात्रियों के लिए है, यदि तुम अल्लाह पर तथा उस (सहायता) पर ईमान रखते हो, जो हमने अपने भक्त पर निर्णय[2] के दिन उतारी, जिस दिन, दो सेनायें भिड़ गईं और अल्लाह जो चाहे, कर सकता है।[2]

अल्लाह ने जो धन दिलाया है अपने रसूल को इस बस्ती वालों से, वह अल्लाह, रसूल, (आपके) समीपवर्तियों, अनाथों, निर्धनों तथा यात्रियों के लिए है; ताकि वह (धन) फिरता न रह जाये तुम्हारे धनवानों के बीच और जो प्रदान कर दे रसूल, तुम उसे ले लो और रोक दें तुम्हें जिससे, तुम उससे रुक जाओ तथा अल्लाह से डरते रहो, निश्चय अल्लाह कड़ी यातना देने वाला है। (क़ुरआन 59:7)

हदीस में उल्लेख[संपादित करें]

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

इद्दत

खुला

महर

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. "ग़नीमत"- प्रो. डॉक्टर जियाउर्रहमान आज़मी, कुरआन मजीद की इन्साइक्लोपीडिया, हिंदी संस्करण(2010), पृष्ठ 271
  2. Translation of the meanings Surah Al-Baqarah - Hindi translation - The Noble Qur'an Encyclopedia https://quranenc.com/en/browse/hindi_omari/8/41