सेण्ट्रल बैंक ऑफ़ इण्डिया

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सेण्ट्रल बैंक ऑफ़ इण्डिया
प्रकार सार्वजनिक बैंकिंग कम्पनी
बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज
नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ऑफ इण्डिया: CENTRALBK
उद्योग आर्थिक
वाणिज्यिक बैंक
स्थापना 21 दिसम्बर 1911 (1911-12-21) (103 वर्ष पहले)
मुख्यालय मुंबई, भारत
प्रमुख व्यक्ति राजीव ऋषि
अध्यक्ष एवं प्रबन्ध निदेशक
राजस्व भारतीय रुपया4,02,272 करोड़ (US$82.87 बिलियन) (2012-13)[1]
वेबसाइट www.centralbankofindia.co.in

सेन्ट्रल बैंक ऑफ इंडिया (अंग्रेजी: Central Bank of India) भारत में सार्वजनिक क्षेत्र का प्रमुख बैंक है जिसकी स्थापना स्वदेशी आन्दोलन से प्रभावित होकर एक पारसी बैंकर सर सोराबजी पोचखानवाला द्वारा 1911 में की गयी थी। इसे पहला भारतीय वाणिज्यिक बैंक होने का गौरव भी प्राप्त है जिसका पूर्ण स्वामित्व और प्रबन्धन स्थापना के समय भारतीयों के हाथ में था।

इतिहास[संपादित करें]

सेण्ट्रल बैंक ऑफ़ इण्डिया मुम्बई की बहुत पुरानी बिल्डिंग जिसमें कभी इसका मुख्यालय हुआ करता था

सेण्ट्रल बैंक ऑफ़ इण्डिया सही अर्थों में स्वदेशी बैंक है जिसके पहले अध्यक्ष फिरोजशाह मेहता थे। सोराबजी पोचखानवाला इस बैंक की स्थापना से इतने गौरवान्वित हुए कि उन्होंने सेण्ट्रल बैंक को राष्ट्र की सम्पत्ति घोषित कर दिया। उन्होंने यह भी कहा कि सेण्ट्रल बैंक जनता के विश्वास पर टिका है और यह जनता का अपना बैंक है।

पिछले एक सौ से अधिक वर्षों के इतिहास में बैंक ने कई उतार चढाव देखे और अनगिनत चुनौतियों का सामना किया। बैंक ने प्रत्येक आशंका को सफलता पूर्वक व्यावसायिक अवसर में बदला और बैंकिंग उद्योग में अपने समकक्षों से उत्कृष्ट रहा।

विविध बैंकिंग कार्य[संपादित करें]

सेण्ट्रल बैंक ने कई अभिनव और अनुपम बैंकिंग गतिविधियों का शुभारम्भ किया। ऐसी ही कुछ सेवाओं का संक्षिप्त विवरण इस प्रकार है:

1921-समाज के सभी वर्गों में बचत की आदत डालने के लिए घरेलू बचत सुरक्षित जमा योजना

1924-बैंक की महिला ग्राहकों को सेवा प्रदान करने लिए विशिष्ट महिला विभाग की स्थापना

1926-सुरक्षित जमा लॉकर सुविधा और रुपया यात्री चेक

1929-निष्पादक एवं न्यासी विभाग की स्थापना

1932-जमाराशि बीमा सुविधा योजना

1962-आवर्ती जमा योजना

राष्ट्रीयकरण के बाद की योजनाएँ[संपादित करें]

वर्ष 1969 में बैंक का राष्ट्रीयकरण होने के बाद भी सेण्ट्रल बैंक ने विभिन्न अभिनव बैंकिंग सेवाएँ आरम्भ कीं जिनमें प्रमुख हैं:

1976-मर्चेंट बैंकिंग कक्ष की स्थापना

1980-बैंक के क्रेडिट कार्ड सेण्ट्रल-कार्ड का शुभारम्भ

1986-प्लैटिनम जुबली मनी बैंक जमा योजना

1989-आवासीय सहायक कम्पनी सेण्ट बैंक होम फायनेंस लिमिटेड का शुभारम्भ

1994-बाहरी चेकों की शीघ्र वसूली के लिए त्वरित चेक वसूली सेवा (क्यू॰सी॰सी॰) तथा तत्काल सेवा आरम्भ की

अन्य क्षेत्रों में योगदान[संपादित करें]

इसके साथ ही, भारतीय रिजर्व बैंक और भारत सरकार के दिशानिर्देशों के अनुरूप कृषि तथा लघु उद्योग जैसे प्रमुख क्षेत्रों के साथ-साथ मध्यम एवं बड़े उद्योगों को प्रोत्साहित करने में सेण्ट्रल बैंक लगातार सक्रिय भूमिका निभाता रहा है। शिक्षित युवाओं में रोजगार को प्रोत्साहित करने के लिए बैंक ने कई स्वरोजगार योजनाएँ भी आरम्भ की हैं।

सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में सेण्ट्रल बैंक को वास्तविक अर्थों में अखिल भारतीय बैंक कहा जा सकता है क्योंकि 28 में से 27 राज्यों तथा 7 में से 4 केन्द्रशासित प्रदेशों में इसकी शाखाओं का विस्तृत नेटवर्क है। देश के एक छोर से दूसरे छोर तक स्थित अपनी 3563 शाखाओं व 195 विस्तार पटलों के विस्तृत नेटवर्क के कारण सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में सेण्ट्रल बैंक का एक अपना विशिष्ट स्थान है।

सेण्ट्रल बैंक की विस्तृत सेवाओं के प्रति ग्राहकों के विश्वास का अनुमान आई॰सी॰आई॰सी॰आई॰, आई॰डी॰बी॰आई॰, यू॰टी॰आई॰, एफ॰आई॰सी॰, एच॰डी॰एफ॰सी॰ जैसे कार्पोरेट ‌गाहकों की सूची और देश के प्रमुख कार्पोरेट घरानों से भी लगाया जा सकता है जो बैंक के प्रमुख ग्राहकों में हैं।

सन्दर्भ[संपादित करें]

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

बाह्य सूत्र[संपादित करें]