मेवा

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मेवा या ख़ुश्क मेवा एक खाद्य श्रेणी है जिसमे सूखे हुए फल और फलों की गिरियां आती हैं। जहां सूखे हुए फलों, जैसे कि किशमिश, खजूर आदि को प्राकृतिक रूप से या मशीनों जैसे कि खाद्य निर्जलीकारक द्वारा सुखाकर तैयार किया जाता है, वहीं गिरियां फलों का तैलीय बीज होती है। मेवाओं को सदा से सेहत के लिए लाभदायक माना गया है।[1] अधिकांशतः लोगों की धारणा होती है कि मेवों में वसा की मात्रा अधिक होती है अतः इनका सेवन हानिकारक होता है। किन्तु इनमें वसा अधिक होने पर भी ये हानिकारक कतई नहीं होते हैं। वास्तव में मेवों में पॉली असंतृप्त वसा होती है जो बुरे कोलेस्ट्रॉल को कम करती है। हाल में हुए वैज्ञानिक शोधों से पता चला है कि मेवों में हृदय तथा अन्य असाध्य रोगों से सुरक्षा प्रदान करने की शक्ति होती है। मेवों को तलने या भूनने से उनके गुण नष्ट हो जाते हैं अतएव इनका प्रयोग बिना तले करना चाहिये। इसके अलावा इनमें नमक मिलाकर प्रयोग करने से इनकी कैलोरी की मात्रा बढ़ती है। यदि एक बार आप मेवों का प्रयोग कर लें तो फिर पूरे दिन अतिरिक्त कैलोरी लेने की जरूरत नहीं पड़ती। मेवों को मूड बनाने वाले खाद्य भी कहा जाता है अतः जब भी अवसाद से घिरा महसूस करें मेवों का प्रयोग कर तरोताजा हो सकते हैं।

कंपोज़ीशन[संपादित करें]

मेवों में संतृप्त वसा कम होती है तथा असंतृप्त वसा अधिक होती है। कोलेस्ट्रॉल की मात्रा नगण्य रहती है किन्तु फाइबर होते हैं। प्रोटीन समृद्ध होने के कारण ये माँसाहारी भोजन का अच्छा विकल्प हैं क्योंकि मेवों में मेवों में अमीनो अम्ल, जैसे आर्जीनिन पाए जाते हैं। ताजे फलों की ही भांति, सूखे मेवा भी विटामिन (विटामिन ए, विटामिन बी१, विटामिन बी२, विटामिन बी३, विटामिन बी६ तथा फॉलिक एसिड), पैंटोथेनिक अम्ल और खाद्य खनिज (कैल्शियम, लौह, मैग्नेशियम, फास्फोरस, पोटैशियम, सोडियम, ताम्र, मैंगनीज़, सेलेनियम) आदि से परिपूर्ण हो सकते हैं।[2] निर्जलीकरण के कारण इनमें से ७/८ भाग जल-अभाव हो सकता है। इस कारण इनके ताजे फलों के मुकाबले इनका तेज स्वाद भी हो सकता है। निर्जलीकरण के कारण इनका अधिकांश विटामिन सी नष्ट हो चुका होता है। बादाम, अखरोट, काजू, पिस्ता में असंतृप्त वसा पाई जाती है जबकि नारियल तथा खजूर में संतृप्त वसा पाई जाती है। लेकिन नारियल या खजूर को जब कुछ पारंपरिक व्यंजनों में मिलाकर बनाया जाता है तो ये उतने नुकसानदेह नहीं होते।

स्वास्थ्य[संपादित करें]

सूखे मेवे, कम ग्लाइसेमिक इंडेक्स के लोगों के साथ-साथ मधुमेह के रोगी और डायटिंग कर रहे लोगों के लिए भी अच्छे रहते हैं। कम ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाले खाद्य धीरे-धीरे ऊर्जा उत्पन्न करते हैं जिससे खाना पचाने में शरीर पर अधिक भार नहीं पड़ता और रक्त में ग्लूकोज का स्तर भी सामान्य रहता है।[3] इनमें कैंसर से लड़ने वाले तत्व होते हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार प्रतिदिन एक तिहाई कप विभिन्न प्रकार के मेवे लेने चाहिए। सुबह नाश्ते में बिस्किट या केक खाने के स्थान पर मुट्ठी भर सादे मेवे खाने चाहिए। सलाद या पास्ता में कुछ मेवे डालकर खा सकते हैं। दाल, सूप या सब्जियों में मेवे काटकर डालकर उसका सेवन करें। अपने मनपसंद मेवों को चीज या पनीर के साथ खाएँ। पोषक तत्वों से भरपूर ये मेवे आपको दीर्घायु बनाते हैं तथा स्वास्थ्य के रक्षक भी हैं, यदि इन्हें अधिक मात्रा में न लिया जाये। प्रोटीन से भरपूर सूखे मेवों में फाइबर, फाइटो न्यूट्रियंट्स एवं एन्टी ऑक्सीडेण्ट्स जैसे विटामिन ई एवं सेलेनियम की बहुलता होती है। सूखे मेवे बहुत शक्तिवर्द्धक होते हैं। ये मस्तिष्क एवं शरीर के टॉनिक हैं, जो उन्हें स्वस्थ एवं पुष्ट बनाते हैं।यदि ३५ ग्राम मेवाओं का - जिसमें संतृप्त वसा एवं कोलेस्ट्रॉल की मात्रा कम होती है- का प्रतिदिन सेवन किया जाए, तो हृदय रोग की आशंका कम हो सकती है। जिन महिलाओं ने सप्ताह में चार बार मेवे को अपने आहार में सम्मिलित किया, तो उनमें ह्वदय रोग से मरने की संभावना ४० प्रतिशत कम हो गई।[4]

शारीरिक श्रम न करने वाले आराम पसंद लोगों द्वारा मेवे का अधिक मात्रा में सेवन मोटापा बढ़ाता है और अतिरिक्त चर्बी चढ़ने से उन्हें कई प्रकार के रोग लग जाते हैं। अधिकतर मेवे की प्रकृति गरम होती है और ठंडे मौसम में इनका सेवन लाभप्रद होता है। इसके अलावा ज्यादा मेवा खाने से पाचन क्रिया भी बिगड़ सकती है।[4]

विभिन्न मेवाएं[संपादित करें]

काजू
मेवा भरी थाली

काजू प्रोटीन, खनिज लवण, लौह, फाइबर, फोलेट, मेग्नीशियम, फॉस्फोरस, सेलेनियम और तांबा का अच्छा स्रोत है। काजू का तेल, स्कर्वी, मस्सा और रिंगवर्म के उपचार के लिए इस्तेमाल किया जाता है। प्रतिदिन ७ से १० काजू का सेवन कर सकते हैं।

पिस्ता

बिना नमक के मुट्ठीभर पिस्ते खाना सेहत के लिए लाभदायक होता है। नियमित रूप से इनका सेवन कर सकते हैं। पिस्ता कैलोरी-मुक्त होता है और कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करने में भी सहायक होते हैं। इसे हृदय रोगों की आशंका भी कम होती है।

अखरोट

सर्दी में अखरोट का सेवन करना बेहद फायदेमंद है। प्रतिदिन आहार में पांच अखरोट शामिल कर सकते हैं। अखरोट में उपस्थित वसा और पोषक तत्व ग्लूकोज और डायबिटीज टाइप-२ से पीड़ित लोगों में इंसुलिन स्थिरता को बनाए रखने में उपयोगी होते हैं। गर्मियों में पानी में भिगोकर इनकी गिरियों का सेवन पेट के लिए भी फायदेमंद होता है। अखरोट की गिरियां बुरे कोलेस्ट्रॉल स्तर को कम करके हृदय रोगों की संभावना को कम करता है। अखरोट में उपस्थित ओमैगा-3 फैटी एसिड रियूमेटॉयड आर्थराइटिस और अवसाद को कम करने में उपयोगी है।

बादाम

प्रतिदिन इसकी दस गिरि बादाम का सेवन कर सकते हैं। अन्य मेवों की तरह बादाम में भी वसा का उच्च स्तर होता है जिसमें ६५ प्रतिशत वसा मोनोअनसेचुरेटेड होते हैं जो कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करने में उपयोगी हैं।

खुबानी
सूखी खुबानी

सूखी खुबानी का सेवन प्यास और कफ में फायदेमंद है। इसमें विटामिन ए, बी कॉम्लेक्स और सी की प्रचुरता होती है, जो आंखों और प्रजनन क्षमता के लिए फायदेमंद होता है।

अंजीर

सूखे अंजीर मोटे लोगों के लिए अच्छा अल्पाहार होता है। इनमें फाइबर और पोटेशियम प्रचुर मात्र में होता है, जो भूख नियंत्रित करता है।

किशमिश

किशमिश में एंथोयायनिन होता है, जो गैस संबंधित रोगों में फायदेमंद है। इसमें उपस्थित एंटीऑक्सीडेंट अल्जाइमर में भी लाभदायक है। साथ ही कब्ज आदि में भी इससे लाभ मिलता है।

संदर्भ[संपादित करें]

  1. सेहतमंद मेवा|हिन्दुस्तान लाइव
  2. मेवा खाए सेहत बनाए।वेब दुनिया।
  3. सेहत का भंडार हैं सूखे मेवे।जोश१८।२२ जनवरी,२००७
  4. ड्राई फ्रूट-हैल्थ भी, वैल्थ भी।जाटलैण्ड.कॉम

बाहरी सूत्र[संपादित करें]