बीज
बीज (seed) पौधों का जनक होता है । बीजों को जमीन में रोपने तथा उपयुक्त मौसमी दशा उपलब्ध कराने से वे अंकुर बनते है तथा पेड़ पौधों में विकसित होते है।
अनुक्रम |
बीज का महत्व [संपादित करें]
मनुस्मृति में कहा गया है-
- अक्षेत्रे बीजमुत्सृष्टमन्तरैव विनश्यति |
- अबीजकमपि क्षेत्रं केवलं स्थण्डिलं भवेत् ||
- सुबीजम् सुक्षेत्रे जायते संवर्धते
उपरोक्त श्लोक द्वारा स्पष्ट किया गया है कि अनुपयुक्त भूमि में बीज बोने से बीज नष्ट हो जाते हैं और अबीज अर्थात गुणवत्ताहीन बीज भी खेत में केवल लाथड़ी बनकर रह जाता है। केवल सुबीज-अर्थात् अच्छा बीज ही अच्छी भूमि से भरपूर उत्पादन दे सकता है। अब यह जानना आवश्यक है कि सुबीज़ क्या है सुबीजम् सु तथा बीजम् शब्द से मिल कर बना है। सु का अर्थ अच्छा और बीजम् का अर्थ बीज अर्थात् अच्छा बीज। अच्छा बीज जानने के पूर्व यह जानना भी आवश्यक है कि बीज क्या है?
वानस्पतिक परिभाषा [संपादित करें]
क) ऐसी रचना जो साधारणतया गर्भाधान के बाद भ्रूण से विकसित होती है बीज कहलाती है।
ख) विस्तारणीय ऐसी इकाई को भ्रण से उत्पन्न होती है बीज कहलाती है।
ग) ऐसा परिपक्व भ्रूण जिसमें एक पौधा छिपा होता है। और पौधों के आरंभिक पोषण के लिए खाद्य सामग्री हो तथा यह बीज कवच से ढका हो और अनुकूल परिस्थितियों में एक स्वस्थ पौधा देने में समर्थ हो, बीज कहलाता है।
घ) आॅक्सफोड शब्द कोष के पृष्ठ 2708 के अनुसार पौधे का भ्रूण या पौध का भाग जो बोने के उद्देश्य से इकट्ठा किया गया हो बीज कहलाता है।
ङ) एनसाईक्लोपीडिया ब्रिटेनिका के अनुसार बीज वह आकृति है जिसमें भ्रूण बाहरी रक्षा कवच (बीज आवरण) से ढका हो इसके अतिरिक्त खाद्य पदार्थ एन्डोस्पर्म के रूप में उपलब्ध हो तथा यहां यह पदार्थ एन्प्डोस्पर्म के रूप में न हो यहां, बीज पत्रों के रूप में हो। बीज का विकास अंडे व स्पर्म के गर्भाधान क्रिया के द्वारा होता है। और इस प्रकार से उत्पन्न युग्मज में कोशिका तथा नाभकीय विभाजन होता है तथा भ्रूण के रूप में विकसित होता है बीज निर्माण की यह प्रक्रिया विभिन्न पौधों में भिन्न-भिन्न प्रकार से होती है।
बीज खरा तो भंडार भरा [संपादित करें]
देश के सिंचित क्षेत्र में अनाज की दो प्रमुख फसलें उगाई जाती हैं गेहूँ और धान। इन फसलों का उत्पादन बढ़ाने के लिए, फसल को रोगों से बचाने के लिए और अच्छी किस्म का अनाज पाने के लिए उन्नत किस्म के बीज विकसित किए गए हैं। गेहुँ और धान के अलावा मोटे अनाज, दालें, तिलहन तथा फल-सब्जियों की उन्नत किस्में भी तैयार हुई हैं। ऐसे बीज किसान को उपलब्ध हो सकें, इस दिशा में भी बराबर प्रयास हो रहे हैं।
बीज कहां से प्राप्त करें [संपादित करें]
हर तीन या चार वर्ष बाद बीज बदलना एक अच्छी नीति है, जिसके परिणामस्वरूप फसल अच्छी होती है। अच्छी उपज के लिए प्रमाणित बीज का प्रयोग करें, जो कि अच्छे संस्थान से ही प्राप्त हो सकता है। इससे अच्छा जमाव और बीज की किस्म की उत्तमता के विषय में सुनिश्चितता होती है, साथ-साथ बीज शारीरिक बीमारियों से मुक्त होता है।
इन्हें भी देखें [संपादित करें]
बाहरी कड़ियाँ [संपादित करें]
- बीज (भारत सरकार का पोर्टल)
- धरती और बीज
- कृषिधन सीड्स लिमिटेड