मनाली, हिमाचल प्रदेश
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| Manali | |||||
| — city — | |||||
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| समय मंडल: आईएसटी (यूटीसी+५:३०) | |||||
| देश | |||||
| राज्य | Himachal Pradesh | ||||
| ज़िला | Kullu | ||||
| जनसंख्या | 17,786 (2005 के अनुसार [update]) | ||||
| क्षेत्रफल • ऊँचाई (AMSL) |
• 1,950 मीटर (6,398 फी॰) |
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विभिन्न कोड
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मनाली (ऊंचाई 1,950 मीटर या 6,398 फीट) कुल्लू घाटी के उत्तरी छोर के निकट व्यास नदी की घाटी में स्थित, भारत के हिमाचल प्रदेश राज्य की पहाड़ियों का एक महत्वपूर्ण पर्वतीय स्थल (हिल स्टेशन) है.
प्रशासकीय तौर पर मनाली कुल्लू जिले का एक हिस्सा है, जिसकी जनसंख्या लगभग 30,000 है. यह छोटा सा शहर लद्दाख और वहां से होते हुए काराकोरम मार्ग के आगे तारीम बेसिन में यारकंद और ख़ोतान तक के एक अतिप्राचीन व्यापार मार्ग का शुरुआत था.
मनाली और उसके आस-पास के क्षेत्र भारतीय संस्कृति और विरासत के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं क्योंकि इसे सप्तर्षि या सात ऋषियों[तथ्य वांछित] का घर बताया गया है.
अनुक्रम |
भूगोल [संपादित करें]
मनाली [1] पर अवस्थित है. यह शहर 1,800 मी. (5,900 फुट) से ऊपरी "प्राचीन मनाली" भाग, 2,000 मी. (6,600 फुट) की ऊंचाई तक फैला हुआ है.
जनसांख्यिकी [संपादित करें]
2001 के अनुसार [update] भारतीय जनगणना [2] के अनुसार मनाली की जनसंख्या 6265 थी. आबादी का 64% पुरुष और 36% महिलाएं हैं. मनाली की औसत साक्षरता दर 74% है, जो राष्ट्रीय औसत 59.5% से ज्यादा है: पुरुष साक्षरता 80% और महिला साक्षरता 63% है. मनाली में जनसंख्या का 9% भाग 6 वर्ष की आयु से कम हैं.
मोटा पाठ== मौसम (जलवायु) == मनाली का मौसम जाड़े में प्रबल रूप से ठंडा और गर्मी के दिनों में हल्का ठंडा रहता है. तापक्रम की सीमा वर्ष भर 4 °से. (39 °फ़ै.) से 30 °से. (86 °फ़ै.) रहती हैं. गर्मी के दिनों में औसत तापमान [12] और [13], तथा जाड़े के दिनों में [14] से [15] के बीच रहता है. [16]
मासिक पात (बर्फ़बारी/बारिश) नवंबर के 24 मिमी (0.94 इंच) से लेकर जुलाई के 415 मिमी (16.3 इंच) के बीच बदलती रहती है. औसतन थोड़ी [19] पात (बर्फ़बारी/बारिश) जाड़े और बसंत के मौसम के दौरान प्राप्त होती है, जो मानसून के प्रवेश करते ही गर्मियों में कुछ [20] बढ़ जाती है. औसतन कुल वार्षिक पात (बर्फ़बारी/बारिश) 1,520 मिमी (60 इंच) है. इस क्षेत्र में हिमपात जो आमतौर पर दिसंबर के महीने में होती थी, पिछले पन्द्रह वर्षों से विलंबित होकर जनवरी या शुरूआती फरवरी में होने लगी है.
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व्युत्पत्ति [संपादित करें]
मनाली शहर का नाम ब्राह्मण धर्म के जन्मदाता मनु के नाम पर पड़ा है. मनाली शब्द का शाब्दिक अर्थ "मनु का निवास-स्थान" होता है. पौराणिक कथा है कि जल-प्रलय से दुनिया की तबाही के बाद मनुष्य जीवन को दुबारा निर्मित करने के लिए साधु मनु अपने जहाज से यही पर उतरे थे. मनाली को "देवताओं की घाटी" के रूप में जाना जाता है. पुराने मनाली गांव में ऋषि मनु को समर्पित एक अति प्राचीन मंदिर हैं.[तथ्य वांछित]
इतिहास [संपादित करें]
प्राचीन काल में इस घाटी में 'राक्षस' नामक खानाबदोश शिकारियों का वास था. इसके बाद यहां चरवाहों का आगमन हुआ जो कंगरा घाटी से आए थे और कृषि करने के लिए यही बस गये. इस क्षेत्र के कुछ प्राचीन निवासी 'नौर' या 'नर' हैं जो कुल्लू घाटी की एक आनोखी जाति है. फिलहाल अब बस कुछ ही नौर परिवारों का अस्तित्व बचा रह गया हैं. मनाली के पश्चिमी किनारे पर हरिपुर के निकट सोयल गांव का एक नौर परिवार इसलिए मशहूर था क्योंकि उनके पास बहुत ज्यादा ज़मींन थी और वे 'राक्षसों' को अपने मजदूर के रूप में तैनात करते थे.
ब्रिटिश राज ने सेब के पेड़ और ट्राउट (एक प्रकार की मछली) की शुरुआत की जो मनाली के पेड़-पौधों एवं जीवों में बिल्कुल नहीं पाई जाती थीं. ऐसा कहा जाता है कि जब सेब के पेड़ों का रोपण हुआ तो इतने ज्यादा सेब फलने लगते थे कि उनकी टहनियां वजन को न सह पाने के कारण गिर जाती थी.[तथ्य वांछित] आज भी यहां के अधिकांश निवासियों के लिए बेर और नाशपाती के साथ-साथ सेब भी इनके आय के सबसे बड़े माध्यम हैं.
1980 के शेष दशक में कश्मीर में बढ़ते आतंकवाद के बाद मनाली के पर्यटन को जबरदस्त बढ़ावा मिला. जो गांव कभी सुनसान रहा करता था वो अब कई होटलों और रेस्तरों वाले एक भीड़-भाड़ वाले शहर में परिवर्तित हो गया.
परिवहन [संपादित करें]
मनाली, NH 21 और NH 1 सड़कों द्वारा दिल्ली से बहुत अच्छी तरह जुड़ी हुई है, जो लेह तक जाती है और जो दुनिया की सबसे ऊंची वाहनीय सड़क होने का दावा (गलत ढंग से) करती है. नई दिल्ली से मनाली तक हरियाणा के पानीपत और अम्बाला, चंडीगढ़ (केंद्र शासित क्षेत्र), पंजाब के रोपर, और हिमाचल के बिलासपुर, सुंदरनगर व मंडी शहर आते हैं.
रेल से मनाली पहुंचना इतना आसान नहीं है. सबसे नज़दीकी बड़ी लाइनों के मुख्य रेलवे स्टेशन चंडीगढ़ (315 कि.मी. (196 मील)), पठानकोट (325 कि.मी. (202 मील)), और कालका (310 कि.मी. (190 मील)) में हैं. नज़दीकी छोटी लाइन का मुख्य रेलवे स्टेशन जोगिन्दर नगर (135-किलोमीटर (84 मील)) में हैं.
सबसे नज़दीकी हवाईअड्डा भंतर में है जो मनाली से करीब 50 कि.मी. (31 मील) दूर है. वर्तमान में, किंगफिशर रेड दिल्ली से रोज निरंतर सेवाएं संचालित करती है, एयर इंडिया सप्ताह में दो बार निरंतर सेवा प्रदान करती है और MDLR एयरलाइन्स हफ्ते में छ: बार दिल्ली के लिए सेवाएं प्रदान करती हैं.
मनाली में पर्यटन [संपादित करें]
मनाली एक लोकप्रिय हिमालय सम्बन्धी पर्यटक स्थल है और यह हिमाचल प्रदेश आने वाले कुल यात्रियों का लगभग एक चौथाई हिस्सा दर्शाता है. [30] मनाली का ठंडा वातावरण भारत की चिलचिलाती गर्मी के मौसम में भी राहत प्रदान करता है.
मनाली साहसी खेलों जैसे स्कीइंग, हाइकिंग (लंबी पैदल यात्रा), पर्वतारोहण, पैराग्लाइडिंग, राफ्टिंग, ट्रैकिंग, कायाकिंग और माउन्टेन बाइकिंग के लिए मशहूर हैं. यॉक स्कीइंग इस क्षेत्र का एक अनोखा खेल है.[3] अपने "एक्सट्रीम याक स्पोर्ट्स" के कारण मनाली को "एशिया में सर्वश्रेष्ठ" के रूप में टाईम्स मैगजीन में चित्रित किया गया.[3] मनाली इसके अलावा गर्म बसंत, धार्मिक तीर्थ स्थानें और तिब्बती बौद्ध मंदिरें भी प्रदान करता है.
पिछले वर्षों में मनाली नवदम्पतियों का एक पसंदीदा स्थान बन गया है. आंकड़े दर्शाते हैं कि मौसम (मई, जून, दिसंबर, जनवरी) में रोजाना लगभग 550 जोड़े हनीमून के लिए मनाली पहुंचते हैं और शेष समय[तथ्य वांछित] में रोजाना लगभग 350 जोड़े प्रतिदिन मनाली पहुंचते हैं.
मनाली अपने चमकदार गोम्पाओं या बौद्ध मठों के लिए जाना जाता हैं. पूरे कुल्लू घाटी में तिब्बती शरणार्थियों की सबसे ज्यादा उपस्थिति के साथ-साथ यह अपने 1969 में निर्मित गदन थेकोकलिंग गोम्पा के लिए भी प्रसिद्ध है. मठों का रख-रखाव स्थानीय चंदों और मंदिर कार्यशाला में हस्त निर्मित कालीनों को बेचकर किया जाता है. सबसे छोटा और अतिआधुनिक हिमालयन न्यिन्गामापा गोम्पा बाज़ार के निकट सूर्यमुखी के लहलहाते बगीचे में स्थित है.
दर्शनीय स्थल [संपादित करें]
नाग्गर किला, जो मनाली के दक्षिण में स्थित है, पाल साम्राज्य का स्मारक है. चट्टानों, पत्थरों और लकड़ियों के विस्तृत कढ़ाईयों से बना यह हिमाचल के समृद्ध और सुरुचिपूर्ण कलाकृतियों का सम्मिश्रण है. इस किले को बाद में एक होटल में परिवर्तित कर दिया गया.[तथ्य वांछित]
हिडिम्बा देवी मंदिर, 1553 में स्थापित, पांडव राजकुमार भीम की पत्नी हिडिम्बा, जो स्थानिय देवी है, उनको समर्पित हैं. यह मंदिर अपने चार मंजिला शिवालय एवं विलक्षण काठ की कढ़ाई के लिए जाना जाता है.
रहला झरनें , रोह्तंग मार्ग की चढाई के आरम्भ में मनाली से कुछ 27 कि.मी. (17 मील) पड़ते हैं, ये 2,501 मी. (8,210 फुट) की ऊंचाई पर स्थित खूबसूरत रहला झरनें हैं.
सोलंग घाटी जिसे लोकप्रिय रूप से बर्फ बिंदु (स्नो पॉइंट) के रूप में जाना जाता है, मनाली के 13 किमी उत्तर पश्चिम में है.
मानिकरण कुल्लू से करीब 45 किमी दूर मनाली जाने वाले रास्ते में स्थित है, और पार्वती नदी के नजदीक अपने[गर्म बसं] के लिए जाना जाता है.
अग्रगामी पठन/अध्ययन [संपादित करें]
- वर्मा, वी. 1996. गद्दिस ऑफ़ धौलाधार : ए ट्रांशुमेंट ट्राइब ऑफ़ द हिमालयास. इंडस पब्लिशिंग कं., नई दिल्ली.
- हंडा, O.C. 1987. बुद्धिस्ट मोनास्टेरीज़ इन हिमाचल प्रदेश . इंडस पब्लिशिंग कं., नई दिल्ली. ISBN 81-85182-03-5.
संदर्भ [संपादित करें]
- ↑ फौलिंग रेन जेनोमिक्स, इंक. (इनकोरपोरेशन) - मनाली
- ↑ "भारत की जनगणना २००१: २००१ की जनगणना के आँकड़े, महानगर, नगर और ग्राम सहित (अनंतिम)". भारतीय जनगणना आयोग. http://web.archive.org/web/20040616075334/www.censusindia.net/results/town.php?stad=A&state5=999. अभिगमन तिथि: 2007-09-03.
- ↑ 3.0 3.1 टाइमएशिया पत्रिका (TIMEasia Magazine): एशिया के सर्वश्रेष्ठ - ऐक्सट्रीम यॉक स्पोट्स
बाह्य लिंक्स [संपादित करें]
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