मंगलयान

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मंगल कक्षित्र मिशन
भारतीय मंगलयान : कलाकार की अवधारणा
भारतीय मंगलयान : कलाकार की अवधारणा
मिशन प्रकार मंगल कक्षीयान
संचालक इसरो
वेबसाइट मार्स ऑर्बिटर मिशन
मिशन अवधि 300 दिन
अंतरिक्ष यान के गुण
निर्माता भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन उपग्रह केन्द्र
लॉन्च वजन 1,350 किग्रा (2,980 पाउन्ड)[1]
पेलोड वजन 15 किग्रा (33 पाउन्ड)[2]
ऊर्जा सौर सेल
मिशन का आरंभ
प्रक्षेपण तिथि 5 नवम्बर 2013, 09:08 यूटीसी[3]
रॉकेट पी एसएलवी-एक्सएल सी25[1]
प्रक्षेपण स्थल सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र एफएलपी
ठेकेदार इसरो
कक्षीय मापदण्ड
निर्देश प्रणाली मंगलकेंद्रिक
परिधि 377 किमी (234 मील)
उपसौर 80,000 किमी (50,000 मील)
झुकाव 17.864 डिग्री[4]
युग योजनाबद्ध
मंगल कक्षीयान
कक्षीय निवेशन 24 सितम्बर 2014[5]
(योजनाबद्ध)
उपकरण
मीथेन सेंसर, थर्मल इंफ्रारेड स्पेक्ट्रोमीटर, मार्स कलर कैमरा, लमेन अल्फा फोटोमीटर, मंगल बहिर्मंडल उदासीन संरचना विश्लेषक

मंगलयान, (औपचारिक नाम- मंगल कक्षित्र मिशन, अंग्रेज़ी: Mars Orbiter Mission; मार्स ऑर्बिटर मिशन), भारत का प्रथम मंगल अभियान है। वस्तुत: यह भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन की एक महत्वाकांक्षी अन्तरिक्ष परियोजना है। इस परियोजना के अन्तर्गत 5 नवम्बर 2013 को 2 बजकर 38 मिनट पर मंगल ग्रह की परिक्रमा करने हेतु छोड़ा गया एक उपग्रह आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान (पीएसऍलवी) सी-25 के द्वारा सफलतापूर्वक छोड़ा गया। इसके साथ ही भारत भी अब उन देशों में शामिल हो गया है जिन्होंने मंगल पर अपने यान भेजे हैं। वैसे अब तक मंगल को जानने के लिये शुरू किये गये दो तिहाई अभियान असफल भी रहे हैं परन्तु 24 सितंबर 2014 को मंगल पर पहुँचने के साथ ही भारत विश्व में अपने प्रथम प्रयास में ही सफल होने वाला पहला देश बन गया है। इसके अतिरिक्त ये मंगल पर भेजा गया सबसे सस्ता मिशन भी है । [6] [7][8]

वस्तुतः यह एक प्रौद्योगिकी प्रदर्शन परियोजना है जिसका लक्ष्य अन्तरग्रहीय अन्तरिक्ष मिशनों के लिये आवश्यक डिजाइन, नियोजन, प्रबन्धन तथा क्रियान्वयन का विकास करना है।[9] ऑर्बिटर अपने उपकरणों के साथ कम-से-कम 6 माह तक कक्षा में दीर्घ वृत्ताकार पथ पर मंगल की परिक्रमा करता रहेगा तथा आंकड़े व तस्वीरें पृथ्वी पर भेजेगा।[7]

प्रमुख उपकरण[संपादित करें]

मंगलयान के साथ पाँच प्रयोगात्मक उपकरण भेजे गये हैं जिनका कुल भार १५ किलोग्राम है।[9] -

  • मीथेन सेंसर (मीथेन संवेदक) - यह मंगल के वातावरण में मिथेन गैस की मात्रा को मापेगा तथा इसके स्रोतों का मानचित्र बनाएगा। मिथेन गैस की मौजूदगी से जीवन की संभावनाओं का अनुमान लगाया जाता है।[7]
  • थर्मल इंफ्रारेड स्पेक्ट्रोमीटर (TIS) (ऊष्मीय अवरक्त स्पेक्ट्रोमापक) - यह मंगल की सतह का तापमान तथा उत्सर्जकता (emissivity) की माप करेगा जिससे मंगल के सतह की संरचना तथा खनिजकी (mineralogy) का मानचित्रण करने में सफलता मिलेगी।
  • मार्स कलर कैमरा (MCC) (मंगल वर्ण कैमरा)- यह दृष्य स्पेक्ट्रम में चित्र खींचेगा जिससे अन्य उपकरणों के काम करने के लिए सन्दर्भ प्राप्त होगा।
  • लमेन अल्फा फोटोमीटर (Lyman Alpha Photometer (LAP)) (लिमैन अल्फा प्रकाशमापी) - यह ऊपरी वातावरण में ड्यूटीरियम तथा हाइड्रोजन की मात्रा मापेगा।
  • मंगल इक्सोस्फेरिक न्यूट्रल संरचना विश्लेषक (MENCA) (मंगल बहिर्मंडल उदासीन संरचना विश्लेषक) - यह एक चतुःध्रुवी द्रव्यमान विश्लेषक है जो बहिर्मंडल (इक्सोस्फीयर) में अनावेशित कण संरचना का विश्लेषण करने में सक्षम है।

लागत[संपादित करें]

इस मिशन की लागत 450 करोड़ रुपये (करीब 6 करोड़ 90 लाख डॉलर) है।[10] यह नासा के पहले मंगल मिशन का दसवां और चीन-जापान के नाकाम मंगल अभियानों का एक चौथाई भर है।[11]

अभियान कालक्रम[संपादित करें]

मंगलयान की परिभ्रमण कक्षा (ठीक-ठीक पैमाने से नहीं है)
  • 3 अगस्त 2012 - इसरो की मंगलयान परियोजना को भारत सरकार ने स्वीकृति दी। इसके लिये 2011-12 के बजट में ही धन का आबण्टन कर दिया गया था।[10]
  • 5 नवम्बर 2013 - मंगलयान मंगलवार के दिन दोपहर भारतीय समय 2:38 अपराह्न पर श्रीहरिकोटा (आंध्र प्रदेश) के सतीश धवन अन्तरिक्ष केन्द्र से ध्रुवीय प्रक्षेपण यान पीएसएलवी सी-25 द्वारा प्रक्षेपित किया गया।[6] 3:20 अपराह्न के निर्धारित समय पर पीएसएलवी-सी 25 के चौथे चरण से अलग होने के उपरांत यान पृथ्वी की कक्षा में पहुँच गया और इसके सोलर पैनलों और डिश आकार के एंटीना ने कामयाबी से काम करना शुरू कर दिया था।[12]
  • 5 नवम्बर से 01 दिसम्बर 2013 तक यह पृथ्वी की कक्षा में घूमेगा तथा कक्षा (ऑर्बिट) सामंजस्य से जुड़े 6 महत्वपूर्ण ऑपरेशन होंगे। इसरो की योजना पृथ्वी की गुरुत्वीय क्षमता का भरपूर इस्तेमाल करके मंगलयान को पलायन वेग देने की है। यह काफी धैर्य का काम है और इसे छह किस्तों में 01 दिसम्बर 2013 तक पूरा कर लिया जायेगा।[11]
  • 7 नवम्बर 2013 - भारतीय समयानुसार एक बजकर 17 मिनट पर मंगलयान की कक्षा को ऊँचा किया गया। इसके लिए बैंगलुरू के पी‍न्‍या स्थित इसरो के अंतरिक्ष यान नियंत्रण केंद्र से अंतरिक्ष यान के 440 न्‍यूटन लिक्विड इंजन को 416 सेकेंडों तक चलाया गया जिसके परिणामस्वरूप पृथ्‍वी से मंगलयान का शिरोबिन्‍दु (पृथ्‍वी से अधिकतम दूरी पर‍ स्थित बिन्‍दु) 28,825 किलोमीटर तक ऊँचा हो गया, जबकि पृथ्‍वी से उसका निकटतम बिन्‍दु 252 किलोमीटर हो गया।[12]
  • 11 नवम्बर 2013 को नियोजित चौथे चरण में शिरोबिन्‍दु को 130 मीटर प्रति सेकंड की गति देकर लगभग 1 लाख किलोमीटर तक ऊँचा करने की योजना थी, किंतु लिक्विड इंजिन में खराबी आ गई। परिणामतः इसे मात्र 35 मीटर प्रति सेकंड की गति देकर 71,623 से 78,276 किलोमीटर ही किया जा सका। इस चरण को पूरा करने के लिए एक पूरक प्रक्रिया 12 नवम्बर 0500 बजे IST के लिए निर्धारित की गई।[13]
  • 12 नवम्बर 2013 - एक बार फिर मंगलवार मंगलयान के लिए मंगलमय सिद्ध हुआ। सुबह 05 बजकर 03 मिनट पर 303.8 सेकंड तक इंजन दागकर यान को 78,276 से 118,642 किलोमीटर शिरोबिन्‍दु की कक्षा पर सफलतापूर्वक पहुंचा दिया गया।[14]
  • 16 नवम्बर 2013 : पांचवीं और अंतिम प्रक्रिया में सुबह 01:27 बजे 243.5 सेकंड तक इंजन दागकर यान को 1,92,874 किलोमीटर के शिरोबिंदु तक उठा दिया। इस प्रकार यह चरण भी पूरा हुआ।[15]
  • 01 दिसम्बर 2013 - 31 नवंबर- 1 दिसंबर की मध्यरात्रि को 00:49 बजे मंगलयान को मार्स ट्रांसफर ट्रेजेक्‍टरी में प्रविष्‍ट करा दिया गया, इस प्रक्रिया को ट्रांस मार्स इंजेक्शन (टीएमआई) ऑपरेशन का नाम दिया गया।[16]

यह इसकी 20 करोड़ किलोमीटर से ज्यादा लम्बी यात्रा शुरूआत थी जिसमें नौ महीने से भी ज्यादा का समय लगना था और वैज्ञानिकों के समने सबसे बड़ी चुनौती इसके अन्तिम चरण में यान को बिल्कुल सटीक तौर पर धीमा करने की थी ताकि मंगल ग्रह अपने छोटे गुरुत्व बल के जरिये इसे अपने उपग्रह के रूप में स्वीकार करने को तैयार हो जाये।[11][17], [18]
इसरो प्रमुख डॉ० के राधाकृष्णन ने कहा कि मंगल अभियान की परीक्षा में हम पास हुए या फेल, यह 24 सितम्बर को ही पता चलेगा।

  • 4 दिसंबर 2013: मंगलयान 9.25 लाख किलोमीटर के दायरे वाले पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण प्रभाव क्षेत्र से बाहर निकला।[8]
  • 11 दिसंबर 2013 : पहली दिशा संशोधन प्रक्रिया संपन्न।[8]
  • 11 जून 2014 : दूसरी दिशा संशोधन प्रक्रिया संपन्न।[8]
  • 14 सितंबर 2014 : अंतिम चरण के लिए आवश्यक कमांड्स अपलोड की गई। [19]
  • 22 सितंबर 2014 : एमओएम ने मंगल के गुरुत्वीय क्षेत्र में प्रवेश किया । लगभग 300 दिन की संपूर्ण यात्रा के दौरान सुषुप्ति में पड़े रहने के बाद मंगलयान के मुख्य इंजन 440 न्यूटन लिक्विड एपोजी मोटर को 4 सेकंड्स तक चलाकर अंतिम परीक्षण एवं अंतिम पथ संशोधन कार्य सफलतापूर्वक पूरा किया गया।[19]
  • 24 सितम्बर 2014 : सुबह 7 बज कर 17 मिनट पर 440 न्यूटन लिक्विड एपोजी मोटर (एलएएम) यान को मंगल की कक्षा में प्रवेश कराने वाले थ्रस्टर्स के साथ सक्रिय की गई जिससे यान की गति को 22.1 किमी प्रति सेकंड से घटा कर 4.4 किमी प्रति सेकंड करके मंगलयान को मंगल ग्रह की कक्षा में सफलतापूर्वक प्रविष्ट किया गया । यह कार्य संपन्न होते ही सभी वैज्ञानिक खुशी से झूम उठे। इस क्षण का सीधा प्रसारण दुरदर्शन द्वारा राष्ट्रीय टेलीविज़न पर किया गया तथा भारत के इस गौरवमयी क्षण को देखने के लिए भारत के प्रधानमंत्री स्वयं वहाँ उपस्थित रहे।[7]

जिस समय यान मंगल की कक्षा में प्रविष्ट हुआ उस समय पृथ्वी तक इसके संकेतों को पहुंचने में लगभग 12 मिनट 28 सेकंड का समय लगा। ये संकेत नासा के कैनबरा और गोल्डस्टोन स्थित डीप स्पेस नेटवर्क स्टेशनों ने ग्रहण किए और आंकड़े रीयल टाइम पर यहां इसरो स्टेशन भेजे गए।[7]

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. "12 must-know facts about India's mission to Mars". इकोनोमिक टाइम्स. 11 अक्टूबर 2013. http://economictimes.indiatimes.com/slideshows/science-technology/12-must-know-facts-about-indias-mission-to-mars/will-enter-into-mars-orbit/slideshow/23965837.cms. अभिगमन तिथि: 5 नवम्बर 2013. 
  2. "Mars Orbiter MIssion - Payloads" (अंग्रेज़ी में) (पीडीएफ). इसरो. इसरो. अक्टूबर 2013. http://www.isro.org/pslv-c25/pdf/mom-payloads.pdf. अभिगमन तिथि: 5 नवम्बर 2013. 
  3. "India to launch Mars Orbiter Mission on November 5". एनडीटीवी. 22 अक्टूबर 2013. http://timesofindia.indiatimes.com/india/India-to-launch-Mars-Orbiter-Mission-on-November-5/articleshow/24548060.cms. अभिगमन तिथि: 5 नवम्बर 2013. 
  4. Mars Orbiter Mission (MOM) - Manglayaan (15 अक्टूबर 2013)
  5. "NASA findings won't affect Mars mission, say ISRO officials". एक्सप्रेस न्यूज़ सर्विस. 4 अक्टूबर 2013. http://www.indianexpress.com/news/nasa-findings-won-t-affect-mars-mission-say-isro-officials/1178170/0. अभिगमन तिथि: 5 नवम्बर 2013. 
  6. "मंगल के सफर पर निकला भारत". नवभारतटाइम्स.कॉम. Nov 5, 2013. http://hindi.economictimes.indiatimes.com/india/national-india/indias-mars-orbiter-mission-lifts-off-from-sriharikota/articleshow/25258222.cms. 
  7. "पहली ही कोशिश में मंगल तक पहुंचा भारत". नवभारत टाईम्स. 24 सितंबर 2014. http://hindi.economictimes.indiatimes.com/india/national-india/India-makes-history-Mangalyaan-enters-Mars-orbit/articleshow/43300180.cms. अभिगमन तिथि: 24 सितंबर 2014. 
  8. "मार्स ऑर्बिटर मिशन: महत्वपूर्ण घटनाओं का क्रम". नवभारत टाईम्स. 24 सितंबर 2014. http://hindi.economictimes.indiatimes.com/india/national-india/Mars-orbiter-mission-important-dates/articleshow/43312385.cms. अभिगमन तिथि: 24 सितंबर 2014. 
  9. "All you need to know about Mangalyan - India's first mission to Mars". Business Standard. 30-10-2013. http://www.business-standard.com/article/current-affairs/all-you-need-to-know-about-mangalyan-india-s-first-mission-to-mars-113103000754_1.html. 
  10. सुरेश उपाध्याय (5-11-2013). "आज शुरू होगा मंगल पर विजय का अभियान". नवभारत टाइम्स. http://hindi.economictimes.indiatimes.com/india/national-india/Mars-mission-prepares-for-launch/articleshow/25244676.cms. 
  11. विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय, date = 7-11-13. "मंगलयान की कक्षा को ऊँचा किया गया". पत्र सूचना कार्यालय, भारत सरकार. http://pib.nic.in/newsite/hindirelease.aspx?relid=25110. 
  12. "Supplementary Orbit Raising Manoeuvre Planned for Mars Orbiter Spacecraft". पत्र सूचना कार्यालय, भारत सरकार. 11 नवम्बर 2013. http://pib.nic.in/newsite/erelease.aspx?relid=100503. अभिगमन तिथि: 18 नवम्बर 2013. 
  13. "मार्स ऑर्बिटर ने हासिल की 1.18 लाख किमी की ऊंचाई". नवभारत टाईम्स. 13 नवम्बर 2013. http://hindi.economictimes.indiatimes.com/state/others/other-states/1-18-lakh-kms-of-Mars-orbiters-achieved/articleshow/25656977.cms. अभिगमन तिथि: 13 नवम्बर 2013. 
  14. "धरती की कक्षा के कोने पर पहुंचा मंगलयान". नवभारत टाईम्स. 16नवंबर2013. http://hindi.economictimes.indiatimes.com/state/others/bangalore/chennai/mars-mission-isro-performs-last-orbit-raising-manoeuvre/articleshow/25889642.cms. अभिगमन तिथि: 18 नवम्बर 2013. 
  15. "पृथ्वी की कक्षा से बाहर निकला मंगलयान". नवभारत टाईम्स. 1 दिसम्बर 2013. http://hindi.economictimes.indiatimes.com/state/others/bangalore/chennai/Isros-Mars-Orbiter-Mission-successfully-placed-in-Mars-transfer-trajectory/articleshow/26676972.cms. अभिगमन तिथि: 2 दिसम्बर 2013. 
  16. "आज मंगल हो". नवभारत टाइम्स. 5-11-2013. http://hindi.economictimes.indiatimes.com/india/national-india/today-is-tue/articleshow/25221895.cms. 
  17. "मंगल की ओर पहला कदम कामयाब". नवभारत टाइम्स. 6-11-2013. http://hindi.economictimes.indiatimes.com/india/national-india/tue-first-step-toward-successful/articleshow/25271649.cms. 
  18. "मंगलयान के इंजन का टेस्ट फायर कामयाब". नवभारत टाईम्स. 22 सितंबर 2014. http://hindi.economictimes.indiatimes.com/india/national-india/Indias-Mars-Orbiter-Mangalyaan-clears-crucial-test/articleshow/43151983.cms. अभिगमन तिथि: 24 सितंबर 2014. 

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