ॐ नमः शिवाय

मुक्त ज्ञानकोश विकिपीडिया से
Jump to navigation Jump to search
देवनागरी लिपि में "ॐ नमः शिवाय" मंत्र
ॐ नमः शिवाय श्रव्य
श्री रुद्रम् चमकम् और रुद्राष्टाध्यायी में "नमः शिवाय" मंत्र (देवनागरी और लैटिन लिपि) इस रूप में प्रकट हुआ है

ॐ नमः शिवाय (IAST: Om Namaḥ Śivāya) सबसे लोकप्रिय हिंदू मंत्रों में से एक है और शैव सम्प्रदाय का महत्वपूर्ण मंत्र है। नमः शिवाय का अर्थ "भगवान शिव को नमस्कार" या "उस मंगलकारी को प्रणाम!" है। इसे शिव पञ्चाक्षर मंत्र या पञ्चाक्षर मंत्र भी कहा जाता है, जिसका अर्थ "पांच-अक्षर" मंत्र ( को छोड़ कर) है। यह भगवान शिव को समर्पित है। यह मंत्र श्री रुद्रम् चमकम् और रुद्राष्टाध्यायी में "न", "मः", "शि", "वा" और "य" के रूप में प्रकट हुआ है। श्री रुद्रम् चमकम्, कृष्ण यजुर्वेद[1] का हिस्सा है और रुद्राष्टाध्यायी, शुक्ल यजुर्वेद का हिस्सा है।

Panchakshara mantra
पञ्चाक्षर के रूप में 'नमः शिवाय' मंत्र
त्रिपुण्ड्र से सजा हुआ शिवलिंग 

मंत्र की उत्पत्ति[संपादित करें]

यह मंत्र कृष्ण यजुर्वेद के हिस्से श्री रुद्रम् चमकम् में मौजूद है।[2][3] श्री रुद्रम् चमकम्, कृष्ण यजुर्वेद की तैत्तिरीय संहिता की चौथी किताब के दो अध्यायों (टी.एस. 4.5, 4.7) से मिल कर बना है। प्रत्येक अध्याय में ग्यारह स्तोत्र या हिस्से हैं।[4] दोनों अध्यायों का नाम नमकम् (अध्याय पाँच) एवं चमकम् (अध्याय सात) है।[5] ॐ नमः शिवाय मंत्र बिना "ॐ" के नमकम् अध्याय के आठवे स्तोत्र (टी.एस. 4.5.8.1) में 'नमः शिवाय च शिवतराय च' (IAST: Namaḥ śivāya ca śivatarāya ca) के रूप में मौजूद है। इसका अर्थ है "शिव को नमस्कार, जो शुभ है और शिवतरा को नमस्कार जिनसे अधिक कोई शुभ नहीं है। [6][7][8][9][10]

यह मंत्र रुद्राष्टाध्यायी में भी मौजूद है जो शुक्ल यजुर्वेद का हिस्सा है। यह मंत्र रुद्राष्टाध्यायी के पाँचवे अध्याय (जिससे नमकम् कहते हैं) के इकतालीसवे श्लोक में 'नमः शिवाय च शिवतराय च' (IAST: Namaḥ śivāya ca śivatarāya ca) के रूप में मौजूद है। [11][12][13].

अलग-अलग भाषाओं में मंत्र[संपादित करें]

अलग अलग भाषाओं में ॐ नमः शिवाय
भाषा
कन्नड़ ಓಂ ನಮಃ ಶಿವಾಯ
मलयालम ഓം നമഃ ശിവായ
तमिल ஓம் நம சிவாய
तेलुगु ఓం నమః శివాయ
बांग्ला ওঁ নমঃ শিবায়
गुजराती ૐ નમઃ શિવાય
पंजाबी ਓਮ ਨਮਃ ਸ਼ਿਵਾਯ [14]
ओड़िया ଓଁ ନମଃ ଶିଵାୟ[15]
रूसी Ом Намах Шивайа

मंत्र का विभिन्न परंपराओं में अर्थ[संपादित करें]

नमः शिवाय का अर्थ "भगवान शिव को नमस्कार" या "उस मंगलकारी को प्रणाम!" है।

सिद्ध शैव और शैव सिद्धांत परंपरा जो शैव संप्रदाय का हिस्सा है, उनमें  नमः शिवाय को भगवान शिव के पंच तत्त्व बोध और उनकी पाँच तत्वों पर सार्वभौमिक एकता को दर्शाता मानते हैं :

  • "न" ध्वनि पृथ्वी का प्रतिनिधित्व करता है
  • "मः" ध्वनि पानी का प्रतिनिधित्व करता है
  • "शि" ध्वनि आग का प्रतिनिधित्व करता है
  • "वा" ध्वनि प्राणिक हवा का प्रतिनिधित्व करता है
  • "य" ध्वनि आकाश का प्रतिनिधित्व करता है

इसका कुल अर्थ है कि "सार्वभौमिक चेतना एक है"।


शैव सिद्धांत परंपरा में यह पाँच अक्षर इन निम्नलिखित का भी प्रतिनिधित्व करते हैं :

  • "न" ईश्वर की गुप्त रखने की शक्ति (तिरोधान शक्ति) का प्रतिनिधित्व करता है
  • "मः" दुनिया का प्रतिनिधित्व करता है
  • "शि" शिव का प्रतिनिधित्व करता है
  • "वा" उसका खुलासा करने वाली शक्ति (अनुग्रह शक्ति) का प्रतिनिधित्व करता है
  • "य" आत्मा का प्रतिनिधित्व करता है [16]

मंत्र की अलग-अलग शास्त्रों में उपस्थिति[संपादित करें]

  1. यह मंत्र "न", "मः", "शि", "वा" और "य" के रूप में श्री रुद्रम् चमकम्, जो कृष्ण यजुर्वेद का हिस्सा है, उसमे प्रकट हुआ है।
  2. यह मंत्र रुद्राष्टाध्यायी जो शुक्ल यजुर्वेद का हिस्सा है उसमे भी प्रकट हुआ है.[17]
  3. पूरा श्री शिव पंचाक्षर स्तोत्र इस मंत्र के अर्थ हेतु समर्पित है । [18][19]
  4. तिरुमंतिरम, तमिल भाषा में लिखित शास्त्र, इस मंत्र का अर्थ बताता है । [20]
  5. शिव पुराण के विद्येश्वर संहिता के अध्याय 1.2.10 और वायवीय संहिता के अध्याय 13 में 'ॐ नमः शिवाय' मंत्र लिखा हुआ है
  6. तमिल शैव शास्त्र, तिरुवाकाकम, "न", "मः", "शि", "वा" और "य" अक्षरों से शुरू हुआ है

उपयोग[संपादित करें]

यह मंत्र के मौखिक या मानसिक रूप से दोहराया जाते समय मन में भगवान शिव की अनंत व सर्वव्यापक उपस्थिति पर ध्यान केन्द्रित करना चाहिए। परंपरागत रूप से इसे रुद्राक्ष माला पर १०८ बार दोहराया जाता है। इसे जप योग कहा जाता है। इसे कोई भी गा या जप सकता है, परन्तु गुरु द्वारा मंत्र दीक्षा के बाद इस मंत्र का प्रभाव बढ़ जाता है। मंत्र दीक्षा के पहले गुरु आमतौर पर कुछ अवधि के लिए अध्ययन करता है। मंत्र दीक्षा अक्सर मंदिर अनुष्ठान जैसे कि पूजा, जप, हवन, ध्यान और विभूति लगाने का हिस्सा होता है। गुरु, मंत्र को शिष्य के दाहिने कान में बोलतें हैं और कब और कैसे दोहराने की विधि भी बताते हैं।

प्रभाव[संपादित करें]

यह मंत्र प्रार्थना, परमात्मा-प्रेम, दया, सत्य और परमसुख जैसे गुणों से जुड़ा हुआ है। सही ढंग से मंत्र जप करने से यह मन को शांत, आध्यात्मिक अंतर्दृष्टि और ज्ञान लाता है । यह भक्त को शिव के पास भी लाता है। परंपरागत रूप से, यह स्वीकार किया गया है कि इस मंत्र में समस्त शारीरिक और मानसिक बीमारियों को दूर रखने के शक्तिशाली चिकित्सकी गुण हैं। इस मंत्र के भावपूर्ण पाठ करने से दिली शांति और आत्मा को प्रसन्नता मिलती है। कई हिन्दू शिक्षकों का विचार है कि इन पाँच अक्षरों का दोहराना शरीर के लिए साउंड थैरेपी और आत्मा के लिए अमृत के भाँति है। [21] 

यह भी देखें[संपादित करें]

संदर्भ[संपादित करें]

  1. Satguru Bodhinatha, Veylanswami (2017). What Is the Namaḥ Śivāya Mantra? from the "Path to Siva" Book. USA: Himalayan Academy. पपृ॰ chapter 16. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 9781934145722.
  2. "Śrī Rudram" (PDF). sec. Introduction.
  3. "Introduction to "Rudram"". sec. What is Rudram ?.
  4. "Sri Rudram". sec. Introduction.
  5. "Sri Rudram".
  6. "Rudram" (PDF). vedaunion. पृ॰ anuvaka 8 of Namakam at page-22.
  7. "sri rudram exposition (search for "namaḥ śivāya ca śivatarāya ca" in the PDF on page 3)" (PDF). vedaunion.org. पृ॰ 3.
  8. "sri-rudram" (PDF). skandagurunatha.org. पृ॰ 4.
  9. "Sri Rudram - Introduction".
  10. "which verse of sri rudram of yajurveda has word shiva (search as "Most importantly 1st verse of 8th Anuvaka mentions the word Shiva as")". hinduism.stackexchange.com.
  11. "RUDRASTADHYAYI". www.archive.org.
  12. "Introduction to rudrashtadhyayi". www.shreemaa.org.
  13. "RUDRASTADHYAYI".
  14. "Translation".
  15. "odia translation".
  16. Veylanswami, Bodhinatha (2016). "What Is the Namaḥ Śivāya Mantra?". Path to Siva. Himalayan academy. पृ॰ 16. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 9781934145739.
  17. "rudrashtadhyayi". पृ॰ Check first verse's second line. There you can see namah shivaya written in Sanskrit.
  18. "Pachakshara stotram".
  19. "shiva panchakshara stotra".
  20. "Dancing with Siva".
  21. http://www.yogavidya.com/Yoga/ShivaSamhita.pdf