प्राण

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प्राण हिन्दू दर्शनों, जैसे योगदर्शन और आयुर्वेद इत्यादि में जीवनी शक्ति को कहा गया है।[1] कुछ प्रसंगों में इसे सूर्य से उत्पन्न और पूरे ब्रह्माण्ड में व्याप्त शक्ति के रूप में भी वर्णित किया गया है।[2]

आयुर्वेद, तन्त्र इत्यादि में पाँच प्रकार के प्राण बताये गये हैं:

  1. प्राण
  2. अपान
  3. उदान
  4. समान
  5. व्यान

संदर्भ[संपादित करें]

  1. "Prana | Define Prana at Dictionary.com". Dictionary.reference.com. http://dictionary.reference.com/browse/prana. अभिगमन तिथि: 2015-04-22. 
  2. Swami Satyananda Saraswati (September 1981). "Prana: the Universal Life Force". Bihar School of Yoga. http://www.yogamag.net/archives/1982/emay82/prana582.shtml. अभिगमन तिथि: 31 July 2015.