सबरिमलय

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शबरिमला
—  तीर्थ  —
समय मंडल: आईएसटी (यूटीसी+५:३०)
देश Flag of India.svg भारत
राज्य केरल
ज़िला पत्तनमत्तिट्टा जिला
क्षेत्रफल
ऊँचाई (AMSL)

• 1,260 मीटर (4,134 फी॰)

निर्देशांक: 9°16′N 77°02′E / 9.26°N 77.04°E / 9.26; 77.04 शबरीमाला, केरल के पेरियार टाइगर अभयारण्य में स्थित एक प्रसिद्ध हिन्दू मन्दिर है। यहाँ विश्व का सबसे बड़ा वार्षिक तीर्थयात्रा होती है जिसमें प्रति वर्ष लगभग २ करोड़ लोग श्रद्धालु सम्मिलित होते हैं।[1][2]

केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम से १७५ किमी की दूरी पर पंपा है और वहाँ से चार-पांच किमी की दूरी पर पश्चिम घाट से सह्यपर्वत शृंखलाओं के घने वनों के बीच, समुद्रतल से लगभग १००० मीटर की ऊंचाई पर शबरीमला मंदिर स्थित है।

शबरीमला शैव और वैष्णवों के बीच की अद्भुत कड़ी है। मलयालम में 'शबरीमला' का अर्थ होता है, पर्वत। वास्तव में यह स्थान सह्याद्रि पर्वतमाला से घिरे हुए पथनाथिटा जिले में स्थित है। पंपा से सबरीमला तक पैदल यात्रा करनी पड़ती है। यह रास्ता पांच किलोमीटर लम्बा है।

शबरी मला में भगवान अयप्पन का मंदिर है। शबरी पर्वत पर घने वन हैं। इस मंदिर में आने के पहले भक्तों को ४१ दिनों का कठिन व्रत का अनुष्ठान करना पड़ता है जिसे ४१ दिन का 'मण्डलम्' कहते हैं। यहाँ वर्ष में तीन बार जाया जा सकता है- विषु (अप्रैल के मघ्य में), मण्डलपूजा (मार्गशीर्ष में) और मलरविलक्कु (मकर संक्रांति में)।

पौराणिक सन्दर्भ[संपादित करें]

कम्बन रामायण, महाभागवत के अष्टम स्कंध और स्कन्दपुराण के असुर काण्ड में जिस शिशु शास्ता का उल्लेख है, अयप्पन उसी के अवतार माने जाते हैं। कहते हैं, शास्ता का जन्म मोहिनी वेषधारी विष्णु और शिव के समागम से हुआ था। उन्हीं अयप्पन का मशहूर मंदिर पूणकवन के नाम से विख्यात 18 पहाडि़यों के बीच स्थित इस धाम में है, जिसे सबरीमला श्रीधर्मषष्ठ मंदिर कहा जाता है। यह भी माना जाता है कि परशुराम ने अयप्पन पूजा के लिए सबरीमला में मूर्ति स्थापित की थी। कुछ लोग इसे रामभक्त शबरी के नाम से जोड़कर भी देखते हैं।

कुछ लोगों का कहना है कि करीब 700-800 साल पहले दक्षिण में शैव और वैष्णवों के बीच वैमनस्य काफी बढ़ गया था। तब उन मतभेदों को दूर करने के लिए श्री अयप्पन की परिकल्पना की गई। दोनों के समन्वय के लिए इस धर्मतीर्थ को विकसित किया गया। आज भी यह मंदिर समन्वय और सद्भाव का प्रतीक माना जाता है। यहां किसी भी जाति-बिरादरी का और किसी भी धर्म का पालन करने वाला व्यक्ति आ सकता है।

पंपा पहुंचकर हमने पैदल ही सबरीमला तक की यात्रा करने का फैसला किया। यह मार्ग दुर्गम है, पर प्रकृति के बीच होने का अहसास ऐसा जोखिम उठाने के लिए मन को तैयार कर देता है। मकर संक्रांति और उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र के संयोग के दिन, पंचमी तिथि और वृश्चिक लग्न के संयोग के समय ही श्री अयप्पन का जन्म माना जाता है। इसीलिए मकर संक्रांति के दिन भी धर्मषष्ठ मंदिर में उत्सव मनाया जाता है। हम मकर संक्रांति के दिन ही वहां पहुंचे।

मंदिर स्थापत्य[संपादित करें]

शबरीमाला मन्दिर परिसर

यह मंदिर स्थापत्य के लिहाज से तो खूबसूरत है ही, यहां एक अजीब किस्म की शांति का अहसास भी होता है। जिस तरह यह 18 पहाडि़यों के बीच स्थित है, उसी तरह मंदिर के प्रांगण में पहुंचने के लिए भी 18 सीढि़यां पार करनी पड़ती हैं। मंदिर में अयप्पन के अलावा मालिकापुरत्त अम्मा, गणेश और नागराजा जैसे उप देवताओं की भी मूर्तियां हैं।

उत्सव के दौरान अयप्पन का घी से अभिषेक किया जाता है। मंत्रों का जोर-जोर से उच्चारण हो रहा था। परिसर के एक कोने में सजे-धजे हाथी खड़े थे। पूजा के बाद सबको चावल, गुड़ और घी से बना प्रसाद 'अरावणा' बांटा गया।

मकर संक्रांति के अलावा नवंबर की 17 तारीख को भी यहां बड़ा उत्सव मनाया जाता है। मलयालम महीनों के पहले पांच दिन भी मंदिर के कपाट खोले जाते हैं। इनके अलावा पूरे साल मंदिर के दरवाजे आम दर्शनार्थियों के लिए बंद रहते हैं।

मान्यता[संपादित करें]

तीर्थयात्रियों की भीड़

यहां एक और बात पर गौर किया। यहां ज्यादातर पुरुष भक्त मौजूद थे। महिला श्रद्धालु बहुत कम थीं। अगर थीं भी, तो बूढ़ी औरतें। मंदिर के एक पुरोहित से इसके बारे में पूछा तो पता चला कि श्री अयप्पन ब्रह्माचारी थे। इसलिए यहां वे छोटी बच्चियां आ सकती हैं, जो रजस्वला न हुई हों या बूढ़ी औरतें, जो इससे मुक्त हो चुकी हैं। जाति-धर्म का बंधन न मानने के बावजूद यह बंधन श्रद्धालुओं को मानना होता है। बाकी, धर्म निरपेक्षता की अद्भुत मिसाल यह देखने को मिलती है कि यहां से कुछ ही दूरी पर एरुमेलि नामक जगह पर श्री अयप्पन के सहयोगी माने जाने वाले मुसलिम धर्मानुयायी वावर का मकबरा भी है, जहां मत्था टेके बिना यहां की यात्रा पूरी नहीं मानी जाती।

दो मतों के समन्वय के अलावा धार्मिक सहिष्णुता का एक निराला ही रूप यहां देखने को मिला। धर्म इंसान को व्यापक नजरिया देता है, इसकी भी पुष्टि हुई। व्यापक इस लिहाज से कि अगर मन में सच्ची आस्था हो, तो भक्त और ईश्वर का भेद मिट जाता है।

चित्र:Aravana Payasam.png
अरवन पायसम

यह भी कहा जाता है कि अगर कोई व्यक्ति तुलसी या रुद्राक्ष की माला पहनकर, व्रत रखकर, सिर पर नैवेद्य से भरी पोटली (इरामुडी) लेकर यहां पहुंचे, तो उसकी मनोकामना जरूर पूरी होती है। माला धारण करने पर भक्त स्वामी कहलाने लगता है और तब ईश्वर और भक्त के बीच कोई भेद नहीं रहता। वैसे श्री धर्मषष्ठ मंदिर में लोग जत्थों में आते हैं। जो व्यक्ति जत्थे का नेतृत्व करता है, उसके हाथों में इरामुडी रहती है। पहले पैदल मीलों यात्रा करने वाले लोग अपने साथ खाने-पीने की वस्तुएं भी पोटलियों में लेकर चलते थे। तीर्थाटन का यही रिवाज था। अब ऐसा नहीं। पर भक्ति भाव वही है। उसी भक्ति भाव के साथ यहां करोड़ों की संख्या में लोग आते हैं। पिछले साल नवंबर से जनवरी के बीच यहां आने वाले लोगों की संख्या पांच करोड़ के करीब आंकी गई। यहां की व्यवस्था देखने वाले ट्रावनकोर देवासवम बोर्ड के मुताबिक, इस अवधि में तीर्थस्थल ने केरल की अर्थव्यवस्था को 10 हजार करोड़ रुपये प्रदान किए हैं।

बोर्ड श्रद्धालुओं की सुरक्षा की जिम्मेदारी भी लेता है। वह तीर्थयात्रियों का निःशुल्क दुर्घटना बीमा करता है। इस योजना के तहत चोट लगने या मृत्यु होने पर श्रद्धालु या उसके परिजनों को एक लाख रुपये तक दिए जाते हैं। इसके अलावा बोर्ड के या सरकारी कर्मचारियों के साथ अगर कोई हादसा होता है, तो उन्हें बोर्ड उन्हें डेढ़ लाख रुपये तक देता है।

कैसे पहुंचे[संपादित करें]

उत्तर दिशा से आनेवाले यात्री एरणाकुलम से होकर कोट्टयम या चेंगन्नूर रेलवे स्टेशन से उतरकर वहां से क्रमश: ११६ किमी और ९३ किमी तक किसी न किसी साधन से पंपा पहुंच सकते है। पंपा से पैदल चार-पांच किमी वन मार्ग से पहाडियां चढकर ही शबरिमला मंदिर में अय्यप्प के दर्शन का लाभ उठाया जा सकता है।

तिरुअनंतपुरम सबरीमला का सबसे समीपी हवाई अड्डा है, जो यहां से ९२ किलोमीटर दूर है। वैसे तिरुअनंतपुरम, कोच्चि या कोट्टायम तक रेल मार्ग से भी पहुंचा जा सकता है। सबरीमला का सबसे समीपी रेलवे स्टेशन चेंगन्नूर है। ये सभी नगर् देश के दूसरे बडे़ नगरों से जुडे़ हुए हैं।

कहां ठहरें?[संपादित करें]

अगर सबरीमला में कई दिन रुकने का मन हो तो यहां पंपा और सन्निधानम में कई कमरे उपलब्ध हैं, जिसके लिए बोर्ड को पहले से सूचित करना होता है। यहां के नंबर हैं: 91-471-2315156, 2316963, 2317983। इसके अलावा सन्निधानम में कई दूसरे गेस्ट हाउस भी हैं।

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. "Why millions throng Sabarimala shrine". DailyBhaskar. 2011-01-15. Retrieved 2016-12-02.
  2. "Indo-Americans shocked at Sabarimala tragedy". Sify. Retrieved 2016-12-02.

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]