विश्व हिंदू परिषद

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विश्व हिन्दू परिषद
संस्थापक केशवराम काशीराम शास्त्री
स्वामी चिन्मयानंद
जयचमराजा वोडेयार बहादुर[1]
मास्टर तारासिंह
एस.एस. आप्टे
सतगुरु जगजीत सिंह
प्रकार हिन्दू राष्ट्रवादी
स्थापना वर्ष 29 अगस्त 1964 (1964-08-29)
कार्यालय नई दिल्ली
अक्षांश-रेखांश 28°20′N 77°06′E / 28.33°N 77.10°E / 28.33; 77.10
मुख्य लोग न्यायमूर्ति विष्णु सदाशिव कोकजे (president)[2]
आलोक कुमार (executive president)[2]
सेवाक्षेत्र भारत
सदस्य 6.8 करोड़[3]
उप-संस्थाएँ बजरंग दल (youth wing)
दुर्गा वाहिनी (women's wing)
आदर्श वाक्य धर्मो रक्षति रक्षितः
वेबसाइट vhp.org

विश्व हिन्दू परिषद एक हिन्दू संगठन है, जो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ यानी "आरएसएस" की एक अनुषांगिक संगठन है।[4] विश्व हिन्दू परिषद् वीएचपी और विहिप के नाम से भी जाना जाता है। विहिप का चिन्ह बरगद का पेड़ है यानी वृट वृक्ष है और इसका ध्येय वाक्य, "धर्मो रक्षति रक्षित:" यानी जो धर्म की रक्षा करता है, धर्म उसकी रक्षा करता है।[5][6]विश्व हिन्दू परिषद् पूर्वी उत्तर प्रदेश के क्षेत्रीय संगठन मन्त्री अम्बरीष सिंह है, कानपुर प्रान्त के प्रान्तीय अध्यक्ष राजीव महाना, प्रान्तीय सहमन्त्री दीनदयाल गौड़ है। [7]

इतिहास[संपादित करें]

विश्व हिन्दू परिषद की स्थापना 1964 में हुई। इसके संस्थापकों में स्वामी चिन्मयानंद, एसएस आप्टे, मास्टर तारा हिंद थे। पहली बार 21 मई 1964 में मुंबई के संदीपनी साधनाशाला में एक सम्मेलन हुआ। सम्मेलन आरएसएस सरसंघचालक माधव सदाशिव गोलवलकर ने बुलाई थी। इस सम्मेलन में हिंदू, सिख, जैन और बौद्ध के कई प्रतिनिधि मौजूद थे। सम्मेलन में गोलवलकर ने कहा कि भारत के सभी मताबलंवियों को एकजुट होने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि हिंदू हिंदूस्तानियों के लिए प्रयुक्त होने वाला शब्द है और यह धर्मों से ऊपर है।[8]

प्रकल्प[संपादित करें]

विश्व हिन्दू परिषद का हरिद्वार का स्थानीय कार्यालय
  • बालवाडया
  • पाठशाला
  • महाविद्यालय
  • अस्पताल
  • आरोग्य सल्ला केंद्रे
  • गाव सेवा आरोग्यरक्षक
  • गोशाला गोमूत्र व गोमयसे विविध औषधी निर्माण उद्योग
  • खेती विकास प्रकल्प
  • ग्रामविकास योजना
  • रोजगार प्रशिक्षण उपक्रम

= जाती परस्पर समन्वय =,विजय कुमार सिंह[संपादित करें]

सम्मेलन में तय हुआ कि प्रस्तावित संगठन का नाम विश्व हिंदू परिषद होगा और 1966 के प्रयाग के कुंभ मेले में एक विश्व सम्मेलन के साथ ही इस संगठन का स्वरूप सामने आया। आगे यह फैसला किया गया कि यह गैर-राजनीतिक संगठन होगा और राजनीतिक पार्टी का अधिकारी विश्व हिंदू परिषद का अधिकारी नहीं होगा। संगठन के उद्देश्य और लक्ष्य कुछ इस तरह तय किए गए:

  1. हिंदू समाज को मजबूत करना
  2. हिंदू जीवन दर्शन और आध्यात्म की रक्षा, संवर्द्धन और प्रचार
  3. विदेशों में रहनेवाले हिंदुओं से तालमेल रखना, हिंदू और हिंदुत्व की रक्षा के लिए उन्हें संगठित करना और मदद करना

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. Ikegame, Aye (2013). Princely India Re-imagined: A Historical Anthropology of Mysore from 1799 to the present. Routledge. पृ॰ 67. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 978-1-136-23909-0. मूल से 3 दिसंबर 2013 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 20 अगस्त 2014.
  2. "VHP President Raghava Reddy". मूल से 7 दिसंबर 2013 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 20 अगस्त 2014.
  3. "VHP mebership count". मूल से 25 फ़रवरी 2013 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 20 अगस्त 2014.
  4. "संग्रहीत प्रति". मूल से 17 जून 2018 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 17 जून 2018.
  5. Jelen, Ted Gerard; Wilcox, Clyde (2002). Religion and Politics in Comparative Perspective: The One, The Few, and The Many. Cambridge University Press. पृ॰ 253. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 0-521-65031-3. मूल से 14 अगस्त 2014 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 20 अगस्त 2014.
  6. DP Bhattacharya, ET Bureau Aug 4, 2014, 06.38AM IST (2014-08-04). "Communal skirmishes rising after Narendra Modi's departure from Gujarat - Economic Times". Articles.economictimes.indiatimes.com. मूल से 14 अगस्त 2014 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 2014-08-14.सीएस1 रखरखाव: एक से अधिक नाम: authors list (link)
  7. "संग्रहीत प्रति". मूल से 17 जून 2018 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 17 जून 2018.
  8. A lethal cocktail of religion & politics Archived 14 अप्रैल 2009 at the वेबैक मशीन. हिन्दुस्तान टाइम्स – 27 जुलाई 2007

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]