बजरंग दल

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धरना पर बैठे बजरंग दल के सदस्य

बजरंग दल, संघ परिवार और विश्व हिंदू परिषद की कड़ी का युवा चेहरा है। इसकी शुरुआत 1 अक्टूबर 1984 में सबसे पहले भारत के उत्तर प्रदेश प्रान्त से हुई जिसका बाद में पूरे भारत में विस्तार हुआ। हिंदुत्व इस परिवार का मुख्य दर्शन है। बजरंग दल का दावा है कि अभी इसके 1,300,000 सदस्य हैं जिनमें 850,000 कार्यकर्ता शामिल हैं। संघ की तरह शाखा की तरह अखाड़े चलाती है जिनकी सँख्या लगभग ढाई हजार के आस पास है। बजरंग दल का सूत्रवाक्य "सेवा, सुरक्षा और संस्कृति" है। इनके प्रमुख शोहन सिंह सोलंकी है। हिंदू युवा शक्ति को समाज के प्रति संस्कारयुक्त सकारात्मक भूमिका की ओर प्रेरित करना भी बजरंग दल का मुख्य कार्य है l अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए ने विश्व हिंदू परिषद (VHP) और बजरंग दल को धार्मिक उग्रवादी संगठन भी बताया है। बजरंग दल देशभर मैं अपने कामो की वजह से अक्सर विवादों में रहता हैlबजरंग दल ने हाल ही में देश में अपना भर्ती अभियान चलाया था जिसमे देशभर से लगभग 38 लांख हिन्दू युवाओ ने बजरंग दल की सदस्यता ग्रहण की। वर्तमान समय मे इतनी बड़ी संख्या में बजरंग दल में भर्ती की संख्या होना एक रोचक तथ्य है । कहा जाता है कि जब विहिप द्वारा देशभर में अयोध्या में स्थित बाबरी मस्जिद को विवादित बताकर रामजानकी यात्राओं का आयोजन किया था एवम जब बाबरी मस्जिद को तोड़ा गया था तो उस समय अयोध्या में उपस्थित लोगों में 90 प्रतिशत लोग बजरंग दल के सक्रिय कार्यकर्ता थे जिन्होंने इस काम मे अपना अहम किरदार निभाया था। बजरंग दल प्रतिवर्ष देश के विभिन स्थानों पर अपने कार्यकर्ताओं को ट्रेनिंग देने के लिए शौर्य प्रशिक्षण वर्गो का आयोजन करता है जो हर बार विवादों के घेरे में आते है। बजरंग दल के कार्यकर्ता कहते है की उनका हर काम राष्ट्र व धर्म के लिए होता है जिसमे विवाद का कोई विषय नही है। जब आतंकियों द्वारा अमरनाथ यात्रा को बंद करा दिया गया था तो उस समय भी बजरंग दल के लाखों कार्यकर्ता मौत के साये के बीच अमरनाथ यात्रा करने कश्मीर पहुच गए थे। बजरंग दल कहता है व भारत देश से लव जिहाद, गौ हत्या, व धर्मांतरण जैसी गतिविधियों को पूर्णत समाप्त कर ही चेन लेंगे उनका एकमात्र उद्देश्य भारत देश को पुनः विश्वगुरु बनाना है। बजरंग दल अपने कार्य का विस्तार करने के लिए देशभर के मंदिरों में साप्ताहिक मिलन के कार्यक्रम के आयोजन भी करता है जिसमे बजरंग दल के कार्यकर्ता देव भक्ति के साथ साथ देशभक्ति भी करते है एवम हिन्दू समाज की सभी समस्याओं को दूर करने का प्रयत्न करते है। युवाओ से संपर्क साधने के लिए बजरंग दल खेल प्रतियोगिता व अखाड़े भी संचालित करता है जिसमे व युवाओ को शारीरिक रूप से मज़बूत करने का कार्य करता है गोर देने वाली बात यह है कि बजरंग दल अपने किसी भी कार्यकर्ता या पदाधिकारी को किसी भी प्रकार का पहचान पत्र उपलब्ध नही कराता है[1] सीआईए द्वारा जारी वर्ल्ड फैक्ट बुक में विहिप और बजरंग दल को 'राजनीतिक दवाब समूह' की श्रेणी में शामिल किया गया हैl [2]

उद्भव[संपादित करें]

अक्टूबर 1984 में विश्व हिंदू परिषद ने अयोध्या में नियमित रूप से शोभायात्रा निकालनी शुरु की। इन झाँकियों को राम जानकी रथयात्रा के नाम से जाना जाता है जिसका उद्देश्य हिंदू समाज में साँस्कृतिक चेतना पैदा करना है। समाज के कुछ तबकों ने इसे हिंदू समर्थक आंदोलन के रूप में प्रचारित करना शुरु किया जिसके फलस्वरूप सांप्रदायिक तनाव पैदा हुआ। ऐसी परिस्थितियों में साधु-संतो ने युवाओं से इस झाँकी को निर्विघ्न रूप से जारी रखने का आहवान किया राम जानकी रथ यात्रा का अराजक तत्वों से रक्षा के लिए एक दल की स्थापना हुई जिसे बजरंग दल के नाम से जाना गया। वर्तमान में मध्यप्रदेश के मनोज वर्मा बजरंग दल के राष्ट्रीय सयोंजक है।

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]

  1. https://m.timesofindia.com/india/vhp-a-militant-religious-outfit-rss-nationalist-cia-factbook/amp_articleshow/64594295.cms
  2. https://aajtak.intoday.in/story/cia-classifies-vhp-bajrang-dal-as-militant-organization-rss-nationalist-dat-1-1009679.html