लॉर्ड मेयो

मुक्त ज्ञानकोश विकिपीडिया से
Jump to navigation Jump to search

लॉर्ड मेयो भारत के गवर्नर जनरल रहे थे।

मृत्यु 8 फरवरी 1872

शेर अली खान ने गवर्नर जनरल को मौत के घाट उतारा था। गर्वनर जनरल लॉर्ड मेयो ने अंडमान निकोबार के पोर्ट ब्लेयर में सेलुलर जेल के कैदियों के हालात जानने और सिक्योंरिटी इंतजामों की समीक्षा करने के लिए वहां का दौरा करने का मन बनाया। शायद मेयो का काम पूरा हो भी चुका था। शाम सात बजे का वक्त था, लॉर्ड मेयो अपनी बोट की तरफ वापस आ रहा था। लेडी मेयो उस वक्त बोट में ही उसका इंतजार कर रही थीं।

गवर्नर जनरल का कोर सिक्योरिटी दस्ता जिसमें 12 सिक्योरिटी ऑफिसर शामिल थे, वो भी साथ साथ चल रहे थे। इधर शेर अली अफरीदी खुद चूंकि इसी सिक्योरिटी दस्ते का सदस्य रह चुका था, इसलिए बेहतर जानता था कि वो कहां चूक करते हैं और कहां लापरवाह हो जाते हैं। हथियार उसके पास था ही, उसके नाई वाले काम का खतरनाक औजार उस्तरा या चाकू। उसके साथ था।

लार्ड मेयो जैसे ही बोट की तरफ बढ़े, उनका सिक्योरिटी दस्ता थोड़ा बेफिक्र हो गया कि चलो पूरा दिन ठीकठाक गुजर गया। वैसे भी गवर्नर जनरल तक पहुंचने की हिम्मत कौन कर सकता है,गवर्नर की सिक्योरिटी बेधने की कौन सोचेगा! लेकिन उनकी यही बेफिक्री उनकी जिंदगी की सबसे बड़ी भूल हो गई। पोर्ट पर अंधेरा था, उस वक्त रोशनी के इंतजामात बहुत अच्छे नहीं होते थे।

फरवरी के महीने में वैसे भी जल्दी अंधेरा हो जाता है, बिजली की तरह एक साया छलावे की तरह वायसराय की तरफ झपटा, जब तक खुद लार्ड मेयो या सिक्योरिटी दस्ते के लोग कुछ समझते इतने खून में सराबोर हो चुका था लॉर्ड मेयो कि उन्होने मौके पर ही दम तोड़ दिया।

लॉर्ड मेयो की याद में उसी साल ढूंढे गए एक नए द्वीप का नाम रख दिया गया।

मेयो के द्वारा 1872 मे प्रायोगिक जनगणना करवाई गई।

मेयो द्वारा 1872 में कृषि विभाग तथा अजमेर में मेयो कॉलेज की स्थापना की गई।