रेकी

मुक्त ज्ञानकोश विकिपीडिया से
Jump to navigation Jump to search
रेकी उपचार चल रहा है


Reiki (霊気 or レイキ?, आईपीए: /ˈreɪkiː/)मिकाओ उसुई के द्वारा सन् 1926 में विकसित की गई एक आध्‍यामिक क्रिया[1] है। जापान के माउंट कुरामा में तीन सप्ताह तक उपवास करने और ध्‍यान लगाने के बाद उसुई ने "ऊर्जा गंवाए बिना उपचार करने" की क्षमता प्राप्त करने का दावा किया।[2]इस क्रिया के ही एक भाग, टेनोहिरा या हथेली के द्वारा किए जाने वाले उपचार को एक पूरक और वैकल्‍पिक उपचार यानी कॉम्‍प्‍लिमेंट्री एंड ऑल्‍टरनेटिव मेडिसिन (कैम) के रूप में उपयोग किया जाता है।[3][4] टेनोहिरा एक ऐसी तकनीक है जिसमें चिकित्सक यह मानते हैं वे हथेलियों के माध्यम से "उपचार करने वाली ऊर्जा"(ki के एक रूप) को हथेलियों से भेजते हैं।[5][6]


रेकी के अस्‍तित्‍व का या इसके क्रियान्‍वयन की प्रक्रिया का कोई वैज्ञानिक प्रमाण मौजूद नहीं है और सन् 2008 में संचालित यादृच्‍छिक चिकित्‍सीय परीक्षणों की एक प्रक्रियाबद्ध समीक्षा ने रेकी के प्रभाव या किसी भी परिस्‍थिति में उपचार के दौरान इसके उपयोग की अनुशंसा का समर्थन नहीं किया।[7][8] साँचा:Energy therapy


इतिहास[संपादित करें]

Reiki
चीनी नाम
पारम्परिक चीनी:
सरलीकृत चीनी:
जापानी नाम
हीरागना: れいき
क्यूजिताइ: 靈氣
शिन्जिताइ:
कोरियाई नाम
हांगुल: 령기
Hanja: 靈氣
वियतनामी नाम
Quốc ngữ: linh khí

नाम की व्युत्पत्ति[संपादित करें]

"रहस्यमय वातावरण, आध्यात्मिक शक्ति" रेकी 霊気 एक जापानी शब्‍द है जो चीनी भाषा के लिंग्‍की 靈氣 शब्‍द से उद्धृत है, कुछ चीनी-अंग्रेज़ी शब्‍दकोशों के हिसाब से इसका अर्थ है: "(सुन्‍दर पहाड़ों का) आध्‍यात्‍मिक प्रभाव और वातावरण";[9]"① बुद्धिमत्ता; समझने की शक्ति ② परी कथाओं में मौजूद अलौकिक शक्ति या ताकत; चमत्कारी शक्ति या ताकत";[10]"① (पहाड़ों/आदि का) आध्‍यात्‍मिक प्रभाव ② चतुराई, चालाकी"।[11] यह जापानी यौगिक दो भिन्‍न एकल शब्‍दों,रे "भूत, परमात्‍मा, आत्‍मा; अलौकिक, ईश्‍वरीय, वायव्‍य शरीर" और की "गैस, वायु; श्वास; ऊर्जा; ताकत; वातावरण; मूड; इरादा; भावना; ध्‍यान" यहां जिसका अर्थ qi "आध्‍यात्‍मिक ऊर्जा; महत्‍वपूर्ण ऊर्जा; जीवन शक्ति; जीवन की ऊर्जा" से है" से मिलकर बना है।[12] जापानी-अंग्रेज़ी शब्‍दकोशों में से रेकी के कुछ समकक्षी अनुवाद हैं: "रहस्य का अनुभव",[13] "रहस्‍ययुक्त वातावरण (का अनुभव होना)",[14] और 'एक वायव्‍य वातावरण (जो किसी मंदिर के पवित्र परिसर में मौजूद है); किसी (ईश्‍वरीय) आत्‍मा की मौजूदगी (का अनुभव, एहसास) होना।"[15]


अंग्रेज़ी शब्‍द रेकी (reiki) या रेकी (Reiki) जापानी भाषा के मूल शब्‍द का ही लिप्‍यंतरण है। रेकी शब्‍द का उपयोग व्‍याकरण की दृष्टि से संज्ञा ("कल्‍पित ऊर्जा" या "इस पर आधारित एक उपचार पद्धति"),क्रिया या विशेषण के रूप में किया जाता है। कुछ पश्चिमी लेखक रेकी का हल्‍के ढंग से अनुवाद करते हुए उसे सांसारिक जीवन ऊर्जा कह देते हैं।[16] इस तुक्का से अनुवाद आंशिक रूप से ग़लत हो जाता है: की का अर्थ तो "जीवन ऊर्जा" है -लेकिन रे का अर्थ "सांसारिक" नहीं है।


उत्पत्ति[संपादित करें]

सन् 1922 में मिकाओ उसुई(臼井瓮男) ने माउंट कुरामा पर 21 दिनों तक साधना करके, जिस दौरान उन्होंने ध्‍यान लगाया, उपवास किया और प्रार्थना की, रेकी की उत्‍पत्ति की।[2] उसुई का कहना था कि रहस्‍य का रहस्‍योद्घाटन करके जिसे हम रेकी कहते हैं उसके लिए उसने दूसरों पर लागू करने और उन्‍हें अनुकूल बनाने के लिए आवश्‍यक ज्ञान और आध्‍यात्‍मिक शक्ति प्राप्त कर ली थी।


सन् 1922 के अप्रैल महीने में, उसुई टोक्‍यो चले गए और वहां उन्होंने उसुई रेकी रियोहो गक्‍कई (उसुई रेकी उपचार समाज) की स्‍थापना की।[17]


उसुई सम्राट मीजी की साहित्‍यिक कृतियों को एक प्रशंसक था और अपनी रेकी प्रणाली को विकसित करने की प्रक्रिया में उसने सम्राट की कुछ साहित्‍यिक कृतियों को नीतियुक्त सिद्धांतों के रूप में ढाल लिया, जो आगे चलकर रेकी के सिद्धांत कहलाए। (जापानी में "गोकाई") रेकी के अनेक शिक्षक और उसका अभ्‍यास करने वाले इन पांच सिद्धांतों का पालन करने का लक्ष्‍य रखते हैं,[18] इनमें से एक का अनुवाद निम्‍नलिखित है:


"सौभाग्य को बुलाने का एक गोपनीय तरीका.
सभी रोगों की उत्तम दवा
सिर्फ़ आज भर के लिए:
गुस्सा न हों
चिंता न करें
कृतज्ञ बनें
निष्ठा के साथ कार्य करें
दूसरों के प्रति दयालु बनें।
हर सुबह और हर रात, गैशो स्थिति [दोनों हाथों की हथेलियों जोड़कर नमस्‍कार मुद्रा] में बैठें और अपने हृदय में इन शब्‍दों का उच्‍चारण ऊंची आवाज़ में करें।
शरीर और आत्मा के विकास के लिए, उसुई रेकी रियोहो" - मिकाओ उसुई, संस्‍थापक।[19]


उसुई ने 2000 से अधिक शिष्‍यों को रेकी का उपयोग करना सिखाया। उन शिष्‍यों में से सोलह ने शिनपिडेन स्‍तर तक पहुंचने तक अपना प्रशिक्षण जारी रखा, यह स्‍तर पश्चिमी देशों की थर्ड डिग्री, या स्‍नातकोत्तर स्‍तर के बराबर होता है।[20]


उसुई का देहावसान सन् 1926 में हुआ।


प्रारंभिक विकास[संपादित करें]

उसुई के देहावसान के बाद, चुजिरो हयाशी नामक उसुई के एक पूर्व शिष्‍य ने उसुई रेकी रियोहो गकई को छोड़कर अपना एक अलग संगठन बना लिया। हयाशी ने शारीरिक उपचार पर ज़ोर देकर और रेकी तकनीकों के एक अधिक कोड बनाए हुए और सरल समूह का उपयोग करके रेकी के पाठों को सरल बना दिया।[21]


हयाशी ने शुरूआत की और हवायो तकाता को प्रशिक्षण दिया,[22]जो रेकी क्रिया का अभ्‍यास करता और दूसरों को पहले दो स्‍तर पढ़ाता हुआ संयुक्त राज्‍य अमेरिका में खूब घूमा।[23]


तकाता ने रेकी के द्वारा उपचार करने और उसे सिखाने के लिए शुल्‍क लेने की महत्ता पर बल दिया। सन् 1976 में, तकाता ने शिनपिडेन चरण पढ़ाना शुरू कर दिया और पहली बार इस स्तर को रेकी मास्‍टर नाम दिया।[24] उसने मास्‍टर प्रशिक्षण के लिए $10000 का मूल्‍य भी निर्धारित किया।[तथ्य वांछित]


तकाता की मृत्‍यु सन् 1980[25] में हुई थी। तब तक वह 22 रेकी मास्‍टरों को प्रशिक्षित कर चुकी थी।[26] जापान के बाहर जितना भी रेकी सिखाया गया उसमें से अधिकतर का श्रेय उसके कार्य को जाता है।[27]


रेकी की प्रणालियां[संपादित करें]


आज, कई रेकी प्रणालियां मौजूद हैं, लेकिन प्रमुख प्रणालियां की संख्‍या केवल 2 है, जिन्‍हें क्रमश:परंपरागत जापानी रेकी और पश्चिमी रेकी के नाम से जाना जाता है।


परंपरागत जापानी रेकी[संपादित करें]

परंपरागत जापानी रेकी शब्‍द का उपयोग सामान्‍यत: केवल उस विशेष प्रणाली का वर्णन करने के लिए किया जाता है जिसका निर्माण उसुई की शिक्षाओं से हुआ था और जिसका प्रसार जापान से बाहर नहीं हुआ था। लगभग 1990 के दशक में, कुछ पश्चिमी शिक्षक रेकी की इस विशेष प्रणाली की खोज करने के लिए जापान की यात्रा पर गए, हालांकि उन्‍हें वहां कुछ नहीं मिला। अत: उन्‍होंने रेकी स्‍कूलों को स्‍थापित करना और जापानियों को रेकी सिखाना शुरू कर दिया। ऐसा होने के तुरंत बाद, जापानी जो रेकी क्रिया का अभ्‍यास कर रहे थे और जिन्‍होंने इस बात को एक राज़ बनाकर रखा हुआ था, दुनिया के सामने आए और उन्‍होंने अपने ज्ञान का प्रसार करना शुरू कर दिया। तब से लेकर आज तक, परंपरागत जापानी रेकी की कई प्रणालियां अस्‍तित्‍व में आ चुकी हैं, इनमें कुछ प्रमुख प्रणालियां नीचे सूचीबद्ध की गई हैं।


उसुई रेकी रियोहो गकई शिक्षकों के उस समाज का नाम है जिन्‍होंने अपने स्‍वयं के उसुई की स्‍थापना की। यह शैली केवल उशीदा की वजह से आधुनिक समय तक बची हुई है क्‍योंकि उशीदा ही वे शख्‍स थे, जिन्‍होंने अपनी मृत्‍यु के समय, संघ के अध्‍यक्ष का उत्तराधिकारी उसुई को बना दिया था। यह समाज कई वर्षों तक एक राज़ बना रहा था और वर्तमान में, मसाकी कोन्‍दोह नामक शिक्षक गकई के अध्‍यक्ष हैं। उनकी अनेक शिक्षाएं आज भी एक रहस्‍य हैं, हालांकि आजकल थोड़ा थोड़ा करके, इस संघ के सदस्‍य संसार के बाकी हिस्‍सों के साथ अपने ज्ञान को साझा कर रहे हैं, इन सदस्‍यों में एक नाम है मास्‍टर हिरोशी दोई का। इन सबके बावजूद, यह समाज आज भी एक ऐसा बंद समाज बना हुआ है जहां तक पहुंच पाना मुश्‍किल है।


रीडो रेकी गकई नाम एक ऐसी प्रणाली को दिया गया है जो गकई के मास्‍टरों के द्वारा बनाया गया है और इसका नेतृत्‍व फ़ुमिनोरी आओकी कर रहे हैं। फ़ुमिनोरी आओकी ने गकई की शिक्षा में अपनी बातें जोड़ीं, हालांकि शिक्षण में अंतर बहुत कम है। इस प्रणाली में, फ़ुमिनोरी आओकी से प्रेरित चिह्न कोरिकी को आत्‍मसात किया गया था।


कोम्‍यो रेकी काई का नाम उस प्रणाली को दिया गया जिसने जापानी परंपरागत रेकी के एक स्‍कूल का नाम ले रखा है और जो ह्याकुतेन इनामोतो (稲本百天) सेन्‍सेई द्वारा स्थापित किया गया था। यह अन्‍य प्रणालियों से इस तरह से अलग है कि इसका उद्गम गकई से नहीं, बल्‍िक चियोको यागामुची (山口千代子) के द्वारा हयाशी वंश से हुआ था जो जापान में ही रहा था। इसके अंतर्गत अधिक ज्ञान और विशिष्ट कौशल शामिल है और साथ ही उसुई के मौलिक चिह्न ज़ुई-उन, फ़ुकुयु, होंजा-ज़े-शोनेन और दाई-को-म्‍यो शामिल हैं। वर्तमान में, मिकाओ उसुई का उत्तराधिकारी ह्याकुतेन इनामोतो सेन्‍सेई को माना जाता है क्‍योंकि उसकी आध्‍यात्‍मिक विकास स्‍तर काफ़ी ऊंचा है।


जिकिदेन रेकी का नाम उस प्रणाली को दिया गया जो कोम्‍यो रेकी काई से मिलती जुलती है और जिसका विकास सुश्री यामागुची के पुत्र तादाओ यामागुची (山口忠夫) द्वारा किया गया था।


पश्चिमी रेकी[संपादित करें]

पश्चिमी रेकी, या ऑक्‍सीडेंटल रेकी, एक ऐसी प्रणाली है जिसका विकास सुश्री हवायो तकाता ने किया था। इस प्रणाली का प्रसार हवाई से कैलिफ़ोर्निया तक हुआ और फिर इसका प्रसार बाकी पश्चिमी देशों में हुआ। दूसरे विश्व युद्ध के परिणामस्वरूप, श्रीमती तकाता ने प्रणाली में ऐसे संशोधन करने का निर्णय किया जिससे यह प्रणाली पश्चिमी देशों की मानसिकता के हिसाब से समझने में अधिक सरल और विश्वसनीय बन जाए। जैसा परंपरागत जापानी रेकी के साथ हुआ था, श्रीमती तकाता की शैली से भी कई विभिन्‍न प्रणालियां अस्‍तित्‍व में आईं, उनमें से प्रमुख प्रणालियां नीचे सूचीबद्ध हैं


रेकी उसुई शिकी रियोहो रेकी की पश्चिमी प्रणाली को दिया गया नाम है, जिसका अर्थ है "प्राकृतिक उपचार की उसुई की प्रणाली," और यह एक ऐसी प्रणाली है जिसने हवायो तकाता की मौलिक क्रियाओं को बनाए रखने का ईमानदारी से प्रयास किया है। यह श्रीमती तकाता द्वारा स्‍थापित एक मूल प्रणाली है और आज भी इसका प्रशिक्षण दिया जाता है, जैसे रेकी एलायंस के साथ है, जिसका नेतृत्‍व श्रीमती तकाता की पोती फ़िलिस ली फ़ुरुमोतो कर रही है। जैसे रेकी की अधिकतर पश्चिमी प्रणालियों में है वैसे ही इस प्रणाली में भी स्‍तर मौजूद हैं, इस प्रणाली में इन स्‍तरों की संख्‍या तीन है, इनके नाम क्रमश: इस प्रकार हैं पहली डिग्री, दूसरी डिग्री और मास्‍टर। इस प्रणाली में चार मौलिक प्रतीकों का उपयोग किया है हालांकि ये प्रतीक तकाता संस्‍करण के हैं, इनके नाम हैं चो-कु रे, से-ही-काई, हॉन्-शा-ज़े-शो-नेन और दाई-कू-म्‍यो उसुई।


तिब्बती रेकी उस प्रणाली को दिया गया नाम है, जिसे विलियम एल. रैंड नामक एक अमेरिकी सज्‍जन द्वारा विकसित किया गया था। यह तकाता की शिक्षाओं पर आधारित एक और प्रणाली है, हालांकि इस प्रणाली में और भी अधिक प्रतीक मौजूद हैं और रैंड ने इस प्रणाली में मानसिक अर्थात आध्‍यात्‍मिक सर्जरी के दर्शन को जोड़ा- और ऐसा किसी प्रणाली में हुआ हो, यह पहली बार हुआ था। यह नाम प्रणाली में ही मौजूद दो तिब्बती प्रतीकोंख्‍ और कुछ बौद्ध शिक्षाओं से उद्धृत है, हालांकि, रेकी उसुई शिकी रियोहो के तीन स्‍तरों की बजाय इसमें चार स्‍तर हैं, जिन्‍हें क्रमश/पहली डिग्री, दूसरी डिग्री, तीसरी डिग्री और मास्‍टर कहते हैं। इस प्रणाली में कुल सात प्रतीक मौजूद हैं (हालांकि प्रणाली के आगे के संस्‍करणों में यह संख्‍या नौ हो जाती है)। इसमें बाकी सब कुछ पश्चिमी रेकी के जैसा ही है, हालांकि इसमें निम्‍नलिखित अतिरिक्त प्रतीक मौजूद हैं; तिब्‍बती दाई-को-म्‍यो, राकू, अग्‍नि सर्प, आग का ड्रैगन और टुमो।


इसके अलावा, ऐसे स्‍वतंत्र शिक्षक और छोटे संगठन भी हैं जिन्‍होंने रेकी के प्रसार की जैसी आवश्‍यकता महसूस की, वैसा ही उसका प्रसार किया और इस तरह से तकाता की प्रणाली जारी है, ये शिक्षक आज भी उन बंदिशों से आज़ाद हैं जिनसे रेकी से संबंधित बड़े संगठन बंधे रहते हैं। कुछ वर्षों तक रेकी के कुछ स्‍कूलों में इसके उत्तराधिकारी होने को लेकर विवाद रहा, यह विवाद इसीलिए था कि उनमें से हर स्‍कूल यह कहता था कि वे ही रेकी के असली वंशज हैं और बाकियों के दावे मनगढ़ंत हैं, हालांकि अधिकतर जगहों पर यह माना जाता है कि रेकी की विश्वव्‍यापी क्रिया किसी एक स्‍कूल की बपौती नहीं हो सकती।


जेन्‍डाई रेकी हो नाम उस प्रणाली को दिया गया है जो उपर्युक्त दोनों प्रणालियों का मिश्रण है। चूंकि हिरोशी दोई उपचार के कई कौशलों में पहले से ही निपुण था और सुश्री मीको मित्‍सुई, जो "तेजस्‍विता तकनीक" की एक मास्‍टर थीं, के द्वारा प्रशिक्षित पहला शिष्‍य था, अत: उसने इस प्रणाली की स्‍थापना की। उसे उसुई रेकी रियोहो गकई की सदस्‍यता सन् 1993 में प्रदान की गई थी। यह प्रणाली परंपरागत जापानी रेकी और पश्चिमी प्रणाली को एक दूसरे की पूरक बताती है, लेकिन मूलत: यह अभी भी एक पश्चिमी रेकी ही है, क्‍योंकि दोई सेन्‍सेई किसी परंपरागत जापानी मास्‍टर की उपयुक्त योग्‍यता नहीं रखता।


पारंपरिक जापानी रेकी और ऑक्‍सिडेंटल रेकी में सिद्धांतत: अंतर मौजूद हैं, उदाहरण के लिए रेकी क्रिया के दौरान हाथों की मुद्रा; पश्चिमी रेकी में हयाशी सेन्‍सेई और सुश्री तकाता के हाथों की मुद्रा एक विशेष स्‍थान रखती है, परंपरागत जापानी रेकी में संपूर्ण उपचारों को लागू करने के लिए हाथों की इन मुद्राओं का कोई अस्‍तित्‍व नहीं है। इसके बजाय, परंपरागत जापानी रेकी में उपचार का सत्र रेकी-हो से शुरू होता है, जो ऐसा सहज कौशल है जिसके अंतर्गत "यह जाना जाता है कि हाथों को कहां रखना है।" इसके अलावा परंपरागत जापानी रेकी में शरीर के निश्चित क्षेत्रों में हल्‍की मालिश, थपकियां और हल्‍के मुक्‍के मारे जाते हैं, इसके साथ ही हाथों की मुद्राओं को केवल कठिन रोगों का उपचार करने के लिए ही प्रयोग किया जाता है।


इसके विपरीत, परंपरागत जापानी रेकी की पकड़ ऊर्जा की चरणबद्धता, व्‍यक्तिगत विकास और आध्‍यात्‍मिक परिवर्तन में प्रकाश, गैशो ध्‍यान और श्वसन तकनीकों के संबंध के रूप में सुधार की अनुमति देती है। दूसरी ओर, रेकी की पश्चिमी परंपराएं रोगों के उपचार पर अधिक ज़ोर देती हैं। इसके अतिरिक्त, एक ओर जहां पश्चिमी शैली में शिष्‍य कोर्सों को पूरा करते हुए और आगे शुरूआत करते करते स्‍तरों की सीढ़ी चढ़ता जाता है, वहीं दूसरी ओर परंपरागत जापानी रेकी में, तरक्‍की की यह सीढ़ी क्रमानुसार और धीरे धीरे चढ़ी जाती है और इस तरक्‍की का यह निर्णय रेकी मास्‍टर लेते हैं कि अगले समायोजन प्राप्त करने का उपयुक्त समय कौन सा होगा।


अन्य प्रणालियां[संपादित करें]

वर्तमान में, पश्चिमी रेकी के कुछ शिक्षकों ने जानकारी और प्रतीकों से अपने स्‍वयं की प्रणालियां विकसित कर ली हैं और प्रतीक का उपयोग करने के साथ-साथ हाथ की उन मुद्राओं का उपयोग किया है जिनका प्रशिक्षण रेकी में अथवा कार्य के रूप में दिया जाता है।


पश्चिमी प्रणालियों में से कुछ की स्‍थापना पिछले कुछेक वर्षों में ही हुई है और वे मिकाओ उसुई की प्रणालियों की वंशज नहीं है। इन प्रणालियों में करुणा रेकी, सेचिम या SKHM, रेकी सातोरी, रेन्‍बो रेकी, सैल्टिक रेकी, कुंडलिनी रेकी, करुणा काई, नौवीं काई की रेकी, बायोरेकी, शंबाला रेकी, तेरा माई रेकी और तिब्बती-तांत्रिक रेकी शामिल हैं।


मजे की बात यह है कि उपर्युक्त प्रणालियों में से अधिकांश रेकी उसुई से बेहतर ऊर्जा का उपयोग करने का दावा करती हैं और अधिक शक्तिशाली प्रतीकों का उपयोग करती हैं। यह बात ध्‍यान में रखनी बहुत ज़रूरी है कि रेकी की प्रणालियों को विकसित करने वाले सभी मास्‍टरों के बीच, केवल मिकाओ उसुई ही एक ऐसा ज्ञात नाम है जिसके बारे में माना जाता है कि वो सातोरी (प्रकाशयुक्त) स्‍थिति तक पहुंचा था। उसने अहं, आध्‍यात्‍मिक विकास और उपचार के बारे में एक नि:शुल्‍क प्रणाली बनाई, जो एक सरल प्रणाली है, जिसमें अत्‍यंत उपयोगी उपकरणों की एक सरणी है और साथ ही प्रेम और आदर पर आधारित एक दर्शन है।


रेकी की उपर्युक्त सभी प्रणालियों में से सर्वाधिकार व्‍यापक और विश्व स्‍तर पर मान्‍यता पाने वाली पांच प्रणालियां निम्‍नलिखित हैं; उसुई रेकी रियोहो गकई (परंपरागत जापानी उसुई), तिब्‍बती रेकी, करुणा रेकी, रेकी सेचिम-सेखेम और कॉम्‍यो रेकी और इन अन्‍य प्रणालियों में से व्‍यापक रूप से मान्‍यता प्राप्त अन्‍य तीन का विवरण नीचे दिया गया है।


करुणा रेकी

करुणा एक संस्कृत शब्द है जिसका उपयोग हिंदू, तिब्‍बती बौद्ध और ज़ैन बौद्ध धर्मों में किया गया है और इसका अर्थ किसी भी प्रकार का दया-सहानुभूतियुक्त कार्य है। यह प्रणाली कैथरीन मिलनर के द्वारा संयुक्त राज्‍य अमेरिका में स्‍थापित की गई थी और इसे आज "तेरा माई" के नाम से जाना जाता है। इस प्रणाली का स्‍पेन से परिचय सन् 1995 में एंटोनियो मोरागा ने करवाया था, उसने भारत में शोध करने के बाद, अन्‍य प्रतीकों और तकनीकों को इसमें शामिल किया और इस तरह से करुणा-प्रकृति (करुणा का जन्‍म हुआ स्‍पेन में यह एंटोनियो Moraga ने स्पेन के लिए 1995 में शुरू की, जो भारत में अपने शोध के बाद, शामिल अन्य प्रतीकों और तकनीक, इस प्रकार निधि बनाने-प्रकृति करूणानिधि (करुणा का अर्थ है 'करुणा' और रूप के बिना प्रकृति ऊर्जा ब्रह्मांडीय या भगवान हो गया है). इस प्रणाली में प्रकृति-करुणा रेकी प्रतीक मौजूद हैं जिन्‍हें विभिन्‍न समयों पर विभिन्‍न रेकी मास्‍टरों के लिए चरणबद्ध किया गया है। उसकी प्रणाली ने शुरूआतों को चरणबद्ध किया है और यह एंटोनियो मोरागा के द्वारा विकसित की गई है और इसमें शक्ति के 21 नए प्रतीकों का अद्वितीय मान शामिल है, जिसे उसुई प्रणाली और जापनी-तिब्‍बती तांत्रिक के साथ जोड़ा जा सकता है।

प्रकृति ऊर्जा के भाग प्रतीक स्‍वामी प्रेम आनन्‍द द्वारा दिए गए थे, जिन्‍होंने बदले में उन्‍हें प्रतीकों को मास्‍टर किरम को सौंपा, जिसने उन्‍हें एंटोनियो मोरागा को सौंप दिया।


करुणा-प्रकृति के प्रतीकों ने, अपनी तीव्र ऊर्जा के कारण रहस्‍यमयी उपचार करने के अतिरिक्त, प्रेम और मित्रता, स्‍वाभिमान में वृद्धि, भावनात्‍मक संतुलन को फिर से कायम करना, कर्म का त्‍याग करना, जागरूकता और शुद्धता में वृद्धि करना, चक्रों को एकरूप बनाना, हमारे अस्‍तित्‍व के बारे में स्‍पष्टता प्रदान करना और शांति और परम शांति की रचना करना, जैसे गुणों को भी विकसित किया।


तिब्‍बती-तांत्रिक रेकी

तिब्बती-तांत्रिक रेकी, जिसे तिब्बती रेकी भी कहा जाता है, एक ऐसी प्रणाली है कि जिसमें शक्ति के 11 प्रतीक शामिल हैं। शिक्षाओं के अनुसार इन प्रतीकों का उपयोग किए जाने पर उन रोगों का निदान किया जा सकता है जो कर्मों के कारण हुए हैं। इन दावों में कुछ में कैंसर और एड्स का निदान करने का दावा किया गया है और चैतन्‍य के विभिन्‍न भागों और स्‍तरों के बीच अनुरूपता को भी फिर से स्‍थापित करने का दावा किया गया है। इनमें से चार प्रतीकों को "तिब्बती प्रतीक" का नाम दिया गया है और अन्‍य सात प्रतीकों को "तांत्रिक प्रतीक" कहा गया है। शिक्षा के अनुसार, ये प्रतीक पद्मसंभव (गुरु रिनपोचे) नामक शाक्‍यमुनि बुद्ध के एक गुप्त उत्तरवर्ती अवतार की शिक्षाओं से आए हैं, इन्‍होंने तिब्‍बत का बौद्ध धर्म से परिचय कराया था। प्रतीकों और तिब्बती तांत्रिक का उद्देश्य साधक को महत्वपूर्ण शक्ति प्रदान करना और उसकी कुंडलिनी शक्ति जागृत करना है। ये प्रतीक चक्रों पर भी काम करते हैं।

रेकी सेखेम-सेचिम

रेकी सेखेम-सेचिम (जिसका उच्‍चारण "सेकिम" और संक्षिप्त "SKHM" किया जाता है) मिस्र के सेखेम शब्‍द से उद्धृत है, जिसका अर्थ "शक्तियों की शक्ति"। इसकी स्‍थापना पैट्रिक ज़ीग्‍लर द्वारा हुई थी। SKHM उस विधि का द्योतक है जिसमें आज पैट्रिक ऊर्जा के साथ अपने काम को सन्दर्भित करता है।

सन् 1979 में, पैट्रिक ज़ीग्‍लर का शियोप्‍स के पिरामिडों में SKHM की त्‍वरित ऊर्जा में प्रवेश हुआ और इसके बाद उसने शेख मोहम्‍मद उस्‍मान ब्रहनी के साथ शिक्षा ग्रहण की। सन् 1984 में, ज़ीग्‍लर क्रिस्‍टीन गर्बर जिसने मरात, जो एक 2500 साल पुरानी आत्‍मा थी और साथ ही मास्‍टर सेचिम भी थी जिसने जानकारी आगे सौंपी, को सौंपा, जिससे ज़ील्‍गर सेचिम रेकी में शुरुआत कर सका। सन् जील्‍गर ने सन् 1984 में टॉम सीमैन को सेचिम रेकी सिखाई, जिसका आज खासकर इस प्रणाली के विस्‍तार में मुख्‍य योगदान है। सन् 1985 में, फ़ीनिक्स समरफ़ील्‍ड ने सात अतिरिक्त प्रतीकों की रचना की और सेचिम का प्रशिक्षण देने लगा। सन् 1985 से लेकर सन् 1987 के बीच समरफ़ील्‍ड ऑस्‍ट्रेलिया में सेचिम का प्रशिक्षण देना शुरू कर चुका था, औश्र यह प्रणाली विश्व में फैलती चली गई। सन् 1995 में, श्‍यूमेकर रेकी का मास्‍टर बन गया और उसने शेचिम के रूप में अपना पहला चरण प्राप्त किया। सन् 1996 में श्‍यूमेकर एक शेचिम मास्‍टर बन गया और उसने सेचिम रेकी का प्रशिक्षण देना शुरू कर दिया। सन् 1997 में एक आकस्‍मिक शुरूआत दिए जाने के बाद श्‍यूमेकर ने सेखेम का दूसरे पक्ष प्रदान करना शुरू कर दिया और सेखेम-सेचिम रेकी का निर्माण किया। श्‍यूमेकर और मार्शा बुरैक ऐसे ही प्रशिक्षणों के सदस्‍य हैं और अंत में।


शिक्षाएं[संपादित करें]

रेकी शिक्षाओं का दावा है कि एक अटूट, सार्वजनिक "जीवन शक्ति" आध्यात्मिक ऊर्जा का अस्‍तित्‍व है,[28][29] जिसका पउपयोगउपचार का प्रभाव डालने के लिए किया जा सकता है।[30] इस पर विश्चास करने वाले कहते हैं कि रेकी मास्‍टर द्वारा कराई जाने वाली समायोजन प्रक्रिया[31] के माध्‍यम से इस ऊर्जा[32] तक कोई भी पहुंच सकता है।[33] ऐसी ऊर्जा के लिए किए गए दावों का कोई सैद्धांतिक या जैवभौतिक आधार नहीं होता।[5][34][35]


रेकी के अनुगामियों ने इसका वर्णन एक ऐसी पवित्र चिकित्‍सा के रूप में किया है जिसमें शारीरिक, मानसिक, भावनात्‍मक और आध्‍यात्‍मिक स्‍तरों पर उपचार होता है।[36] ऐसा माना जाता है कि जब भी चिकित्‍सक के हाथ किसी संभावित प्राप्तकर्ता पर रखे जाएंगे या उसके समीप रखे जाएंगे, जिसे वस्‍त्र पहनाए जा सकते हैं, तब ऊर्जा का संचार उसके हाथों के माध्‍यम से होगा।[37] कुछ शिक्षाओं में चिकित्‍सक की मंशा या इस प्रक्रिया में उसकी उपस्‍थिति की महत्ता पर ज़ोर दिया गया है, जबकि बाकि अन्‍य यह दावा करती हैं कि रेकी प्राप्तकर्ता के घाव से ऊर्जा निकाल ली जाती है ताकि प्राकृतिक उपचार की प्रक्रियाएं सक्रिय अथवा गतिमान हो सकें[38] इन सबके साथ ही यह भी माना जाता है कि ऊर्जा "बुद्धिमान" है,[39] अत: रोग की पहचान करना आवश्‍यक नहीं होता।


यह कहा जाता है कि प्रशिक्षण के दूसरे स्‍तर में, एक अन्‍य शुरूआत के साथ चिकित्‍सक को इस प्रकार से तैयार किया जाता है कि वह दूर से रेकी उपचारों का निष्‍पादन कर सके।[40] यह कहा गया है कि इस विधि में चिकित्‍सक और प्राप्तकर्ता के बीच, स्‍थानो की विभिन्‍नता के बावजूद एक अस्‍थायी कनेक्‍शन बनाने और रेकी ऊर्जा भेजने के लिए विशेष प्रतीकों का उपयोग किया जाना शामिल है।[41] ऐसी तकनीकें भी सिखाई जाती हैं जिनसे रेकी को समय के एक निश्चित बिंदु पर, या भूत में अथवा भविष्‍य में भेजा जा सके।[42]


क्रिया[संपादित करें]

संपूर्ण शरीर का उपचार[संपादित करें]

किसी संपूर्ण शरीर के रेकी उपचार में[43] चिकित्‍सक प्राप्तकर्ता को, अक्‍सर किसी मालिश की मेज़ पर, लेटकर आराम करने को कहता है। उपचार के दौरान अमूमन ढीले, आरामदायक कपड़े पहने जाते हैं। चिकित्सक को अपने मस्‍तिष्क को एक शांत और ध्‍यानयुक्त स्‍थिति में पहुंचाने और स्‍वयं को उपचार हेतु मानसिक रूप से तैयार करने में कुछ क्षण लग सकते हैं,[44] और यह अक्‍सर बिना किसी अनावश्‍यक बातचीत के किया जाता है।[45]


उपचार चिकित्‍सक द्वारा अपने हाथों को प्राप्तकर्ता पर विभिन्‍न मुद्राओं में रखने से आगे बढ़ता है। हालांकि, हो सकता है कि चिकित्सक ऐसी स्‍पर्शरहित तकनीक का उपयोग करें, जिसमें हाथ कुछ या सभी स्‍थानों के लिए प्राप्तकर्ता के शरीर से कुछ सेंटीमीटर दूर रखे जाते हैं। अगले स्‍थान पर हाथों को ले जाने से पहले उसे 3 से लेकर 5 मिनट तक स्‍थिर रखा जाता है। समग्रता में, हाथ के स्‍थान सामान्‍य रूप से सिर, धड़ के अग्र भाग और पीठ, घुटनों और पैरों तक अक्‍सर होते हैं। लगभग 12 से लेकर 20 स्‍थानों का उपयोग किया जाता है, जिसके साथ पूरा उपचार 45 से लेकर 90 मिनट तक चलता है।[46]


कुछ चिकित्सक हाथ के स्‍थानों के एक निश्चित समूह का उपयोग करते हैं। अन्‍य यह जानने के लिए कि कहां उपचार की आवश्‍यकता है अपने अंतर्ज्ञान का उपयोग करते हैं,[47] कभी-कभी ऐसे क्षेत्रों का पता करने के लिए प्राप्तकर्ता का स्‍कैन करके उपचार की शुरुआत की जाती है। अपने अंतर्ज्ञान के उपयोग की विधि के कारण अलग अलग स्‍थानों के उपचार में बहुत कम या बहुत अधिक समय भी लग सकता है।


यह सूचित किया गया है कि प्राप्तकर्ता स्‍पर्शरहित विधि के उपयोग के बावजूद अक्‍सर उस स्‍थान पर तपिश या गुदगुदी महसूस करता है, जहां उपचार किया जा रहा होता है। उपचार के फ़ौरन बाद अक्‍सर इन प्रभावों को सबसे अधिक महसूस किया गया है पूर्ण आराम की स्‍थिति के साथ ठीक होने जैसा महसूस करना, हालांकि इससे भावनात्‍मक निर्गमन भी हो सकता है।[48] जैसा कि रेकी उपचार को उत्तेजनावर्धक प्राकृतिक उपचार प्रक्रियाएं कहा जाता है, अत: इसमें विशिष्ट स्‍वास्‍थ्‍य समस्‍याओं का तुरंत इलाज होता हुआ आमतौर पर देखने में नहीं आता है। यदि किसी पुराने रोग का उपचार हो रहा है तो उसके लिए तीन या अधिक उपचारों की शृंखला की अनुशंसा की जाती है जिसमें इन उपचारों के बीच 1 से 7 दिन के विराम होते हैं।[49] अच्‍छा स्‍वास्‍थ्‍य बनाए रखने के उद्देश्‍य से निरंतर रूप से चलने वाले नियमित उपचारों का उपयोग किया जा सकता है। ऐसे उपचारों के बीच अंतराल विशेषकर 1 से 4 सप्ताहों के बीच रहता है, यह अंतराल केवल उसी परिस्‍थिति में नहीं होता, जब स्‍वयं का उपचार हो रहा होता है और जब दैनिक क्रिया सामान्‍य बात होती है।[50]


विशेष क्षेत्र का उपचार[संपादित करें]

विशेष क्षेत्र के रेकी उपचारों में चिकित्‍सक द्वारा अपने हाथों को शरीर के विशिष्ट क्षेत्र या उसके नज़दीक रखना शामिल है। ताज़ा ज़ख्‍मों का इलाज अक्‍सर इसी तरह किया जाता है,[51] और हाथों को ज़ख्‍म के स्‍थान पर रखा जाता है। ऐसे उपचारों की अवधियां बिल्‍कुल अलग-अलग होती हैं, हालांकि 20 मिनट की अवधि आम हो सकती है।


कुछ चिकित्‍सक निश्चित रोगों के लिए इन विशेष क्षेत्र के उपचारों का उपयोग करते हैं और कुछ प्रकाशनों ने हाथ के उपयुक्त स्‍थानों को तालिकाबद्ध किया है।[52] हालांकि, अन्य चिकित्सक सभी पुराने रोगों के लिए संपूर्ण शरीर का उपचार करने को प्राथमिकता देते हैं, इसका आधार ये है कि इसका प्रभाव अधिक पवित्र है।[53] एक और तरीका यह है कि पूरे शरीर का उपचार करने के बाद, विशेष क्षेत्रों का उपचार किया जाए।[54]


प्रशिक्षण[संपादित करें]

जापान से बाहर रेकी के प्रशिक्षण को सामान्‍यत: तीन स्‍तरों, या डिग्रियों में विभाजित किया जाता है।[55]


पहली डिग्री[संपादित करें]

रेकी कोर्स की पहली डिग्री[56] में बुनियादी सिद्धांत और प्रक्रियाएं सिखाई जाती हैं। चार "attunements" शिक्षक ने छात्र को दी हैं[57] इसके अंतर्गत शिष्‍यों को प्राप्तकर्ता के शरीर पर हाथों को रखने के उन स्‍थानों के बारे में सिखाया जाता है जिन्‍हें संपूर्ण शरीर उपचार की प्रक्रिया का सर्वोत्तम सहायक समझा जाता है।[58] पहली डिग्री पूरी करने के बाद इसका सहभागी अपना और अन्‍य लोगों का रेकी के ज़रिए उपचार कर सकता है। परंपरागत रूप से इस पाठ्यक्रम की अवधि चार सत्रों की होती है, जिन्‍हें अक्‍सर लगातार 2,3 या 4 दिनों तक प्रस्‍तुत किया जाता है।[59]


दूसरी डिग्री[संपादित करें]

रेकी के दूसरे डिग्री कोर्स में,[60] शिष्‍यों को उन तीन प्रतीकों का उपयोग करना सिखाया जाता है जिनके बारे में यह माना जाता है कि वे ताकत बढ़ाते हैं और उस दूरी को बढ़ाते हैं जिससे प्रभाव पर ज़ोर लगाया जा सकता है।[61] शिष्‍य को एक और समायोजन दिया जाता है, जिसके बारे में कहा जाता है कि इससे शिष्‍य के ज़रिए रेकी के संचार की क्षमता में और वृद्धि हो जाती है और साथ ही प्रतीकों का उपयोग करने में भी वह सक्षम हो जाता है।[62] दूसरा स्‍तर पार करने के बाद, शिष्‍य प्राप्तकर्ता के पास शारीरिक रूप से उपस्‍थित न रहते हुए भी अपना काम कर सकता है।[63]


तीसरी डिग्री या मास्‍टर प्रशिक्षण[संपादित करें]

तीसरी डिग्री या "मास्‍टर प्रशिक्षण"[64] के माध्यम से छात्र एक रेकी मास्टर बन जाता है। (रेकी की शब्दावली में, "मास्टर" शब्‍द का अर्थ आध्‍यात्‍मिक प्रबोधन से नहीं होता।) एक या अधिक समायोजन किए जाते हैं और शिष्‍य दाई को म्‍यो नामक एक अगले मास्‍टर-स्‍तरीय प्रतीक के बारे में सीखता है।[65] मास्‍टर प्रशिक्षण पूर्ण करने के बाद नया रेकी मास्‍टर अन्‍य लोगों को रेकी से समायोजित कर सकता है और रेकी की तीन डिग्रियों को सिखा सकता है। मास्‍टर प्रशिक्षण की अवधि, रेकी के स्‍कूल और उस रेकी मास्‍टर के दर्शन पर निर्भर जो यह प्रशिक्षण दे रहा है, एक दिन से लेकर एक साल या उससे अधिक कुछ भी हो सकती है।

भिन्‍नताएं[संपादित करें]

प्रशिक्षण विधियों, गतियों और लागतों में बहुत भिन्‍नता हैं। न तो रेकी का कोई आधिकारिक संगठन है और न ही इस क्रिया का कोई नियम मौजूद है। रेकी पाठ्यक्रम को इंटरनेट पर भी लिया जा सकता है, हालांकि परंपरावादी मानते हैं कि प्रभाव पाने के लिए समायोजन व्‍यक्तिगत रूप से किया जाना चाहिए, क्‍योंकि रेकी समायोजन करने वाले मास्‍टर/शिक्षक के लिए समायोजनयोग्‍य व्‍यक्ति के ऊर्जा क्षेत्र को स्‍पर्श करने में समर्थ होना आवश्‍यक होता है। कुछ परंपरावादियों का यह मानना है कि प्रत्‍येक विधि जो रेकी को "जल्‍दी" सिखाती है, वह उतना अधिक प्रभाव नहीं छोड़ सकती, क्‍योंकि अनुभव और इस कला की रोगी मास्‍टरी का कोई विकल्‍प मौजूद नहीं है।[66]


वैज्ञानिक शोध[संपादित करें]

रेकी के वैज्ञानिक अध्ययन इस तथ्य से जटिल हो जात है कि एक प्‍लेसबो-नियंत्रित अध्‍ययन करने के लिए, प्‍लेसबो को ऐसा बनाना आवश्‍यक है जिससे वह हर तरह से उपचार की तरह दिखे।[67]


सन् 2008 में किया गया सबसे बड़ा शोध रेकी को सभी परिस्‍थितियों में एक प्रभावी उपचार के रूप में दर्शाने में विफल रहा है। इस व्यवस्थित समीक्षा ने इस प्रमाण आधार का मूल्‍यांकन किया और नौ अध्‍ययन ऐसे पाए जो उनके चयन मानदंडों पर खरे उतरे।[7] आंखे बंद किए हुए चिकित्‍सकों की कठिनाई को ध्‍यान में रखते हुए विधियुक्त गुणवत्ता के एक संशोधित जाडड स्‍कोर का उपयोग किया गया था। जो अध्‍ययन यादृच्छिक नहीं थे, उन्‍हें अध्ययन से बाहर रखा गया था, क्‍योंकि इस तरह के अध्‍ययनों में जानबूझकर या अनजाने में पूर्वाग्रह होने की संभावना अधिक होती है, जिससे परिणामों का विश्लेषण करना नामुमकिन हो जाता है। कुल मिलाकर, प्रमाण आधार की विधियुक्त गुणवत्ता की इच्‍छा महसूस की गई थी, क्‍योंकि उच्‍च-स्‍तरीय अध्‍ययन भी प्‍लेसबो प्रभावों को नियंत्रित करने में पूर्ण रूप से विफल रहे और अधिकांश अध्‍ययनों में "छोटे आकार के नमूने अध्‍ययन हेतु अपर्याप्त डिज़ाइन और गैरस्‍तरीय रिपोर्टिंग जैसी विधियुक्त त्रुटियां" पाई गईं।[7] ऐसी त्रुटियों से भरे परीक्षणों में अतिशययुक्त उपचार प्रभाव दिखने की संभावना अधिक होती है, अत: यह संकेत देने के लिए प्रमाण अपर्याप्त हैं कि रेकी प्रत्‍येक डॉक्‍टरी स्‍थिति के लिए एक स्‍वयंनिर्भर या सहायक उपचार के रूप में प्रभावकारी है अथवा इसमें संभावित प्‍लेसबो प्रभावों से परे भी कोई लाभ मौजूद हैं।[7][8]


सुरक्षा और प्रभाव[संपादित करें]

रेकी में सुरक्षा के बारे में चिंताएं अन्य अप्रमाणित वैकल्‍पिक औषधियों के समान ही हैं। चिकित्सा के डॉक्टरों और संबद्ध स्वास्थ्यकर्मियों का मानना है कि रोगी गंभीर परिस्‍थितियों में अप्रमाणित वैकल्‍पिक औषधियों के पक्ष में आधिकारिक प्रमाणित उपचारों से दूर रह सकते हैं।[68] रेकी चिकित्सक यह कहते हुए अपने ग्राहकों को गंभीर परिस्‍थितियों में मेडिकल डॉक्‍टर से मिलने के लिए प्रोत्‍साहित कर सकते हैं कि रेकी को एक परंपरागत पूरक चिकित्‍सा के रूप में प्रयोग किया जा सकता है।[69] नैदानिक परीक्षणों में रेकी के उपयोग से किसी भी प्रकार के महत्वपूर्ण प्रतिकूल प्रभाव की सूचना नहीं मिली है।[7]


स्‍वास्‍थ्‍य के नाम पर जालसाजी के विरुद्ध संचालित राष्‍ट्रीय परिषद नेशनल काउंसिल अगेंस्‍ट हैल्‍थ फ़्रॉड ने यह सुझाव दिया है कि रेकी का प्रत्‍येक नैदानिक प्रभाव (प्‍लेसबो प्रभाव) सुझाव के कारण आया हो सकता है,[70] और रेकी को एक "फ़ील-गुड" उपचार का नाम दिया जाए, जिससे प्राप्तकर्ता स्‍वयं ही किसी महत्‍वपूर्ण उपचार प्रभाव की अपेक्षा न करें।[71]


आंतरिक विवाद[संपादित करें]

चूंकि रेकी को सिखाने के कई विभिन्‍न तरीके हैं, अत: विभिन्‍न समूहों, शिक्षकों और चिकित्‍सकों के बीच विवादों के उभरे हुए बिंदु मौजूद हैं। विषयों जैसे रेकी ऊर्जा की प्रकृति, पाठ्यक्रमों और उपचारों के लिए लिया जाने वाला शुल्‍क, प्रशिक्षण विधियों, प्रतीकों की गोपनीयता और समायोजन विधियां, पर विवाद मौजूद हैं।[72][73]


हवायो तकाता की मृत्‍यु के बाद से लेकर 1990 के दशक के मध्‍य तक इसके लिए परस्‍पर विरोधी दावे किए जाते रहे कि रेकी के "ग्रैंडमास्‍टर" का पद किसने बनाया। बहरहाल, जब यह पाया गया कि तकाता ने स्‍वयं ही इस शब्‍द की रचना की थी, तब यह विवाद बहुत हद तक समाप्त हो गया।[74]


कैथोलिक चर्च की चिंताएं[संपादित करें]

मार्च सन् 2009 में, कैथोलिक बिशपों की संयुक्त राज्‍य अमेरिका कान्‍फ़्रेंस के सिद्धांत पर बनी समिति ने एक आदेश (रेकी को एक वैकल्‍पिक उपचार के रूप में मूल्‍यांकन करने सबंधी मार्गदर्शिका, 25 मार्च 2009) जारी किया, जिसके तहत कैथोलिकों द्वारा रेकी क्रिया पर रोक लगा दी गई, इनमें कुछ कैथोलिक एकल केंद्रों और अस्‍पतालों में रेकी उपचार का उपयोग रोकना भी शामिल था। आदेश के निष्‍कर्ष में कहा गया था "चूंकि रेकी उपचार न तो ईसाई शिक्षाओं से संगत है और न ही इसका कोई वैज्ञानिक प्रमाण मौजूद है, अत: कैथोलिक संस्‍थाओं जैसे कैथोलिक स्‍वास्‍थ्‍य सेवा सुविधाओं और एकल केंद्रों, अथवा चर्च का प्रतिनिधित्‍व करने वाले व्‍यक्तियों जैसे कैथोलिक पादरियों के लिए यह उपयुक्‍त नहीं है कि वे रेकी उपचार का प्रचार करें या उसे समर्थन दें।"


इन्‍हें भी देखें[संपादित करें]


सूचनाएं[संपादित करें]

  1. ल्‍युबैक, पैटर, 2001 ch14,pp108 110; एल्‍यार्ड 2004 p79; मेकैंज़ी 1998 pp19,42,52; ल्‍युबैक 1996 p22; बोरैंग 1997 p57; वैल्‍थीम, वैल्‍थीम 1995 p72
  2. उसुई का 21 दिन का एकांतवास: (ल्‍युबैक, पैटर, रैंड 2001 p14); रेकी का इतिहास क्‍या है?
  3. राष्ट्रीय पूरक और वैकल्पिक चिकित्सा केंद्र। "रेकी: एन इन्‍ट्रोडक्‍शन", nccam.nih.gov/health/reiki/। 13 नवम्बर 2008 को एक्‍सेस किया गया।
  4. पूरक और प्राकृतिक चिकित्सा संस्थान। "बीआरसीपी डिविज़ंस एंड प्रैक्‍टिसेज़", i-c-m.org.uk। 12 नवम्बर 2008 को एक्‍सेस किया गया।
  5. राष्ट्रीय पूरक और वैकल्पिक चिकित्सा केंद्र। एन इंट्रोडक्‍शन टू रेकी
  6. रेकी का संचार हाथों से होता है: (मेकैंज़ी 1998 p18); (एल्‍यार्ड 2004 p27); (बोरैंग 1997 p9); (वैल्‍थीम, वैल्‍थीम 1995 p33)
  7. Lee, MS (2008). "Effects of reiki in clinical practice: a systematic review of randomized clinical trials". International Journal of Clinical Practice. 62: 947. डीओआइ:10.1111/j.1742-1241.2008.01729.x. अभिगमन तिथि 2 मई 2008. नामालूम प्राचल |coauthors= की उपेक्षा की गयी (|author= सुझावित है) (मदद)
  8. हैंडरसन, मार्क। "वैकल्‍पिक चिकित्‍सा की प्रिंस ऑफ़ वेल्‍स गाइड 'ग़लत'", दि टाइम्‍स। अप्रैल 17, 2008। 13 नवम्बर 2008 को एक्‍सेस किया गया।
  9. लिन युटांग, 1972,"लिन युटांग का आधुनिक उपयोग का चीनी-अंग्रेज़ी शब्‍दकोश", हांगकांग प्रेस का चीनी विश्वविद्यालय।
  10. लिंग युआन,2002, दि कॉन्‍टेंपोरेरी चाइनीज़ डिक्‍शनरी, चाइनीज़-इंग्‍लिश एडिशन, विदेशी भाषा शिक्षण एवं शोध प्रेस।
  11. डीफ़्रांसिस, जॉन, 2003, एबीसी चाइनीज़-इंग्‍लिश कॉम्‍प्रीहैंसिव डिक्‍शनरी, हवाई प्रेस विश्चविद्यालय।
  12. डेरिवेशन ऑफ़ नेम्‍स:(ल्‍युबैक, पैटर, रैंड 2001 ch 6)
  13. एम. स्‍पान और डब्ल्यू. हैडामिट्ज़ी, 1989, जैपनीज़ कैरेक्‍टर डिक्‍शनरी विद कम्‍पाउंड लुकअप वाया एनी कांजी, निशिगई।
  14. जे. एच. हेग, एड. 1997, दि न्‍यू नेल्‍सन जैपनीज़-इंग्‍लिश कैरेक्‍टर डिक्‍शनरी, टटल।
  15. टी. वाटानाबे, ई., आर. स्‍क्रीपज़ैक, पी. स्‍नोडैन, 2003, कैनकुशाज़ न्‍यू जैपनीज़-इंग्‍लिश डिक्‍शनरी
  16. लुबैक, पैटर, रैंड 2001 p302; मेकैंज़ी 1998 p18; शफ़्रे 1998 p1
  17. उसुई रेकी रियोहो गकई की स्‍थापना:(ल्‍युबैक, पैटर, रैंड 2001 p14)
  18. 5 सिद्धांतों के व्‍यवहार:रेकी संघ सदस्यता अनुबंध का अंश
  19. रेकी के 5 सिद्धांत:रेकी के सिद्धांत;(पैटर 1998 p29; (ल्‍युबैक, पैटर, रैंड 2001 p95)
  20. उसुई ने कई लोगों को सिखाया:(ल्‍युबैक, पैटर, रैंड 2001 p16)
  21. हयाशी की शिक्षाएं:(ल्‍युबैक, पैटर, रैंड 2001 p17,ch19)
  22. हयाशी ने तकाता को प्रशिक्षण दिया:(एल्‍यार्ड 2004 p13)
  23. संयुक्‍त राष्ट्र अमेरिका में तकाता की रेकी क्रिया और प्रशिक्षण:(एल्‍यार्ड 2004 p15)
  24. रेकी मास्टर्स के बारे में तकाता की शिक्षाओं की शुरुआत (एल्‍यार्ड 2004 p15)
  25. (पैटर 1997 p21), (वैल्‍थीम, वैल्‍थीम 1995 p26)
  26. तकाता ने 22 रेकी मास्‍टरों को प्रशिक्षण दिया:(एल्‍यार्ड 2004 p14), (वैल्‍थीम, वैल्‍थीम 1995 p26), (पैटर 1997 p20)
  27. रेकी को जापान से बाहर निकालने में तकाता की महत्ता:(एल्‍यार्ड 2004 pp14,16), (वैल्‍थीम, वैल्‍थीम 1995 p26)
  28. रेकी का कोई अंत नहीं। मेकैंज़ी 1998 p18; बोरैंग 1997 p9
  29. रेकी एक सार्वजनिक जीवन शक्ति ऊर्जा के रूप में: ल्‍युबैक, पैटर, रैंड 2001 p62; मेकैंज़ी 1998 p18; एल्‍यार्ड 2004 p75; (ल्‍युबैक 1994 p13); (बोरैंग 1997 p8)
  30. मेकैंज़ी 1998 p18; ल्‍युबैक, पैटर, रैंड 2001 pp14,68; वैल्‍थीम, वैल्‍थीम 1995 p30; एल्‍यार्ड 2004 p27
  31. नोट: रेकी के संबंध में समायोजन और शुरुआत शब्‍द आमतौर पर परस्‍पर परिवर्तन के साथ उपयोग किए जाते हैं। व्‍यक्तिगत (या आध्‍यात्‍मिक) विकास के पक्ष की चर्चा करते वक्त रेकी ऊर्जा और शुरुआत तक पहुंच प्राप्त करने के बारे में चर्चा करते समय कभी-कभी समायोजन के उपयोग के साथ दिए गए दबाव में थोड़ा सा अंतर होता है। दोनों ही पक्ष समान शारीरिक विधियों से संबंध रखते हैं।
  32. किसी को भी रेकी से समायोजित किया जा सकता है: ल्‍युबैक, पैटर, रैंड 2001 p8);(वैल्‍थीम, वैल्‍थीम 1995 p35);(एल्‍यार्ड 2004 p77)
  33. समायोजन के माध्‍यम से पहुंच मिलती है:(एल्‍यार्ड 2004 pp27,31); (ल्‍युबैक, पैटर, रैंड 2001 p22);(मेकैंज़ी 1998 pp18,19);(गोलाघेर 1998 p26); (बोरैंग 1997 p12)
  34. The 'National Center for Complementary and Alternative Medicine (अक्टूबर 13 2006). "Energy Medicine: An Overview". |date= में तिथि प्राचल का मान जाँचें (मदद) "
  35. Stenger, Victor J. (1999). "The Physics of 'Alternative Medicine' Bioenergetic Fields". Scientific Review of Alternative Medicine. 3 (1): 1501. PMID 14471768. डीओआइ:10.1126/science.134.3489.1501. अभिगमन तिथि 30 मार्च 2008.
  36. रेकी पवित्र है, यह शारीरिक, मानसिक, भावनात्‍मक और आध्‍यात्‍मिक स्‍तरों पर उपचार करता है:(बैगिंस्‍की, शैरामोन 1988 p35);(गोलाघेर 1998 p44);(बोरैंग 1997 p10);(मेकैंज़ी 1998 p81)
  37. प्राप्तकर्ता को वस्त्र पहनाए जा सकते हैं:(ल्‍युबैक 1994 p48);(मेकैंज़ी 1998 p81);(बोरैंग 1997 pp10 pp10,36)
  38. रेकी प्राकृतिक उपचार को सक्रिय करता है अथवा उसे बढ़ाता है:(मेकैंज़ी 1998 p18);(वैल्‍थीम, वैल्‍थीम 1995 pp78,93);(गोलाघेर 1998 p24)
  39. रेकी "बुद्धिमान" है। (एल्‍यार्ड 2004 pp28,29); (बोरैंग 1997 p10)
  40. दूसरा स्‍तर दूरस्‍थ उपचार की अनुमति देता है:(एल्‍यार्ड 2004 p107);(मेकैंज़ी 1998 p56);(ल्‍युबैक 1994 p155);(वैल्‍थीम, वैल्‍थीम 1995 p119)
  41. दूरस्‍थ उपचार के दौरान जुड़ाव के लिए प्रतीकों का उपयोग:(मेकैंज़ी 1998 p39); (एल्‍यार्ड 2004 p110)
  42. रेकी को अतीत या भविष्य में भेजा जा सकता है (मेकैंज़ी 1998 p39); (एल्‍यार्ड 2004 p115);(ल्‍युबैक 1994 p155)
  43. संपूर्ण शरीर का उपचार: (ल्‍युबैक 1994 ch4,ch5);(मेकैंज़ी 1998 p84); (एल्‍यार्ड 2004 p45);(ल्‍युबैक, पैटर, रैंड 2001 ch20);(वैल्‍थीम, वैल्‍थीम 1995 p79);(पैटर 1997 pp50,55);(बोरैंग 1997 p36)
  44. उपचार की शुरुआत में चिकित्‍सक द्वारा मानसिक तैयारी: (एल्‍यार्ड 2004 p46)
  45. औपचारिक उपचार के दौरान कम से कम बात करना: (एल्‍यार्ड 2004 p45)
  46. संपूर्ण शरीर के उपचार की अवधि: (एल्‍यार्ड 2004 p41)
  47. अंतर्ज्ञान का उपयोग (उसुई, पैटर 2003 p17)
  48. उपचार के तत्‍काल प्रभाव:(एल्‍यार्ड 2004 p44)
  49. अन्‍यों के उपचार की बारंबारता (एल्‍यार्ड 2004 p41)
  50. स्‍वयं के उपचार की बारंबारता: (एल्‍यार्ड 2004 p41)
  51. चोटों का उपचार: (मेकैंज़ी 1998 p110);(एल्‍यार्ड 2004 p70); (वैल्‍थीम, वैल्‍थीम 1995 p77)
  52. विशिष्ट रोगों के लिए हाथ रखने के स्‍थान:(उसुई, पैटर 2003 pp49-67); (ल्‍युबैक 1994 pp173-184)
  53. गंभीर स्‍थितियों में संपूर्ण शरीर का उपचार:(मेकैंज़ी 1998 p108);(वैल्‍थीम, वैल्‍थीम 1995 p81)
  54. संपूर्ण शरीर का उपचार करने के बाद विशेष क्षेत्र का उपचार:(मेकैंज़ी 1998 p105)
  55. रेकी को 3 स्‍तरों में पढ़ाया जाता है (मेकैंज़ी 1998 p54);(वैल्‍थीम, वैल्‍थीम 1995 p117);(पैटर 1997 p38)
  56. पहली डिग्री कोर्स सामग्री: (मेकैंज़ी 1998 p54);(वैल्‍थीम, वैल्‍थीम 1995 p118);(पैटर 1997 p38)
  57. स्‍तर 1 पर 4 समायोजनों का प्रभाव:(एल्‍यार्ड 2004 p37)
  58. पहली डिग्री कोर्स के दौरान हाथ के स्‍थानों का शिक्षण:(बैगिंस्‍की, शैरामॉन 1988 p48), (पैटर 1997 p39)
  59. पहली डिग्री कोर्स की अवधि:(बैगिंस्‍की, शैरामॉन 1988 p46), (पैटर 1997 p38)
  60. दूसरे डिग्री कोर्स की सामग्री:(मेकैंज़ी 1998 p56);(वैल्‍थीम, वैल्‍थीम 1995 p119);(पैटर 1997 p43)
  61. दूसरी डिग्री में प्रतीकों का शिक्षण: (एल्‍यार्ड 2004 p81)
  62. 2सरे स्‍तर के समायोजन का प्रभाव:(एल्‍यार्ड 2004 p81)
  63. दूसरे डिग्री कोर्स में पढ़ाया जाने वाला दूरस्‍थ उपचार:(पैटर 1997 p43)
  64. मास्टर प्रशिक्षण: (मेकैंज़ी 1998 p58);(वैल्‍थीम, वैल्‍थीम 1995 pp120-124);(पैटर 1997 pp47-49)
  65. मास्‍टर प्रशिक्षण की सामग्री:(एल्‍यार्ड 2004 ch16, ch17)
  66. रेकी के स्‍तर
  67. एह्लाम ए. मंसूर, मैरियॉन बॉश, गेल लेंग, एनी लीस, जूडी नर्स, "एक नियोजित रेकी प्रभाव अध्‍ययन के लिए विकसित प्‍लेसबो रेकी मानकीकरण विधियों की प्रभावशक्ति का परीक्षण करने के लिए अध्‍ययन","जर्नल ऑफ़ ऑल्‍टरनेटिव एंड कॉम्‍प्‍लिमेंट्री मेडिसिन", अप्रैल 1999, 5(2): 152-164। doi:10.1089/acm.1999.5.153
  68. Lilienfeld, Scott O. (2002). "Our Raison d'Être". The Scientific Review of Mental Health Practice. 1 (1). अभिगमन तिथि 28 जनवरी 2008.
  69. रेकी पारंपरिक चिकित्‍सा का स्‍थान नहीं लेता बल्‍कि उसका पूरक है (मेकैंज़ी 1998 pp7,18,104)
  70. रेकी का संशयात्‍मक मूल्‍यांकन: स्‍वास्‍थ्‍य जालसाज़ी के विरुद्ध राष्ट्रीय काउंसिल का लेख
  71. "कैम" मान्‍यताओं के बारे में कुछ विचार
  72. "Charging for Reiki Healing". Indobase. अभिगमन तिथि 5 फरवरी 2009.
  73. Ray, Barbara (1995). "The Radiance Technique, Authentic Reiki: Historical Perspectives". The Radiance Technique International Association Inc. अभिगमन तिथि 2 अप्रैल 2008.
  74. "ग्रैंडमास्टर" विवाद:(वैल्‍थीम, वैल्‍थीम 1995 p106), (एल्‍यार्ड 2004 pp21,23)

सन्दर्भ[संपादित करें]

  • बी.जे. बैगिंस्‍की, एस शैरामॉन। रेकी: यूनिवर्सल लाइफ़ एनर्जी (अंग्रेज़ी प्रिंट: लाइफ़ रिदम,1988), ISBN 0-940795-02-7
  • डेनियल जे.बेनर, एम.डी.स्‍पिरिचुअल हीलिंग: साइंटिफ़िक वैलिडेशन ऑफ़ ए रिवॉल्‍यूशन (विज़न पब्‍लिकेशंस-दिसंबर 2000) ISBN 1-886785-11-2
  • काज्‍सा कृष्‍नी बोरैंग। रेकी (प्रिंसिपल्‍स ऑफ़) (थॉरसंस, 1997) ISBN 0-7225-3406-X
  • एल. एल्‍यार्ड। रेकी हीलर: ए कम्‍प्‍लीट गाइड टू दि पाथ एंड प्रैक्‍टिस ऑफ़ रेकी (लोटस प्रेस,2004) ISBN 0-940985-64-0
  • ट्रेवर गोल्‍लाघेर। रेकी: ए गिफ़्ट फ़्रॉम दि यूनीवर्स (प्रकाशन अज्ञात 1998)।
  • मार्क होसैक और वॉल्‍टर ल्‍यूबैक। बिग बुक ऑफ़ रेकी सिंबल्‍स (लोटस प्रेस,2006) ISBN 0-914955-64-0
  • डब्ल्यू.ल्यूबेक। कंप्‍लीट रेकी हैंडबुक (लोटस प्रेस, 1994) ISBN 0-941524-87-6
  • डब्ल्यू. ल्यूबेक। रेकी: वे ऑफ़ दि हार्ट (लोटस प्रेस, 1996) ISBN 0-941524-91-4
  • डब्ल्यू ल्यूबेक, एफ.ए.पैटर और डब्‍ल्‍यू. एल.रैंड। स्‍पिरिट ऑफ़ रेकी (लोटस प्रेस, 2001, 5वां प्रिंट: 2004)ISBN 0-914955-67-5
  • ऑलिवर क्‍लैट आदि रेकी सिस्‍टम्‍स ऑफ़ दि वर्ल्‍ड (लोटस प्रेस,2007) ISBN 0-914955-79-9
  • एल्‍यानोर मेकैंज़ी हीलिंग रेकी (हेमलिन, 1998) ISBN 0-600-59528-5
  • पामेला माइल्‍स। रेकी: ए कॉम्‍प्रिहेंसिव गाइड (टार्चर/पेंग्‍विन,2006)ISBN 1-58542-474-9
  • नीना एल. पॉल पीएचडी रेकी फ़ॉर डम्‍मीज़ (विले पब्‍लिशिंग इंक. 2005) ISBN 0-7645-9907-0
  • एफ़. ए. पैटर। रेकी फ़ायर (लोटस प्रेस,1997)ISBN 0-914955-50-0
  • एफ़. ए. पैटर। रेकी: दि लेगेसी ऑफ़ डॉ॰ उसुई (लोटस प्रेस, 1998) ISBN 0-914955-56-X
  • एफ़.ए.पैटर। टी.यामागुची और सी. हयाशी। हयाशी रेकी मैन्‍युअल: ट्रेडिशनल जैपनीज़ हीलिंग टेक्‍निक्‍स फ़्रॉम दि फ़ाउंडर ऑफ़ दि वेस्‍टर्न रेकी सिस्‍टम (लोटस प्रेस (2004) ISBN 0-914955-75-6
  • डॉ॰ बारबरा रे। दि 'रेकी' फ़ैक्‍टर इन दि रेडियंस टेक्‍निक (आर) (रेडियंस एसोसिएट्स, 1983-मौजूदा विस्‍तृत संस्‍करण (सी) 1992) ISBN 0-933267-06-1
  • सैंडी लीयर शफ़्रे। रेकी: ए बिगिनर्स गाइड (हैडवे [हॉडर एंड स्‍टॉटन], 1998) ISBN 0-340-72081-6
  • ब्रॉनवेन और फ़्रांस स्‍टीन। दि रेकी सोर्सबुक (ओ बुक्‍स, 2003) ISBN 1-903816-55-6
  • ब्रॉनवेन और फ़्रांस स्‍टीन। दि जैपनीज़ आर्ट ऑफ़ रेकी (ओ बुक्‍स, 2005)ISBN 1-905047-02-9
  • ब्रॉनवेन और फ़्रांस स्‍टीन। ए-ज़ेड ऑफ़ रेकी (ओ बुक्‍स (2006) ISBN 1-905047-89-4
  • एम.उसुई और एफ़.ए. पैटर। ऑरिजिनल रेकी हैंडबुक ऑफ़ डॉ॰ मिकाओ उसुई (लोटस प्रेस,2003) ISBN 0-914955-57-8
  • डॉ॰ जॉन और एस्‍थर वेल्‍थीम। रेकी: दि साइंस, मेटाफ़ीज़िक्‍स एंड फ़िलॉसफ़ी (परामा,1995) ISBN 0-9645944-0-4
  • "एन इंट्रोडक्‍शन टू रेकी" नेशनल सेंटर फ़ॉर कॉम्‍प्‍लिमेंट्री एंड ऑल्‍टरनेटिव मेडिसिन (3 जुलाई 2007 को पुनर्प्राप्त)
  • "एबीसी ऑफ़ कॉम्प्‍लिमेंट्री मेडिसिन" कैथरीन ज़ोलमैन और एंड्र्यू विकर्स, बीएमजे 1999;319:693-696, 11 सितंबर 1999 (3 जुलाई 2007 को पुनर्प्राप्त)
  • "बीआरसीपी डिविज़ंस एंड प्रैक्‍टिसेज़" इंस्‍टिट्युट फ़ॉर कॉम्‍प्‍लिमेंट्री मेडिसिन (3 जुलाई 2007 को पुनर्प्राप्त)
  • माइल्‍स, पी. ट्रयू, जी.रेकी: रीव्‍यू ऑफ़ ए बायोफ़ील्‍ड थैरेपी (ऑल्‍टरनेटिव थैरेपीज़ इन हैल्‍थ एंड मेडिसिन, मार्च/अप्रैल 2003, 9(2) pp62-72)।
  • ह्यूमन हीमोग्‍लोबिन लेवल्‍स एंड रेकी (जर्नल ऑफ़ होलिस्‍टिक नर्सिंग, 1989, 7(1)pp47-54)
  • वार्डेल, डी. डब्‍ल्‍यू., एंजब्रेट्सन, जे. बायोलोजिकल कोरिलेट्स ऑफ़ टच हीलिंग, (जे.एडवांस्‍ड नर्सिंग, 2001, 33(4): 439-445)


बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]