राजीव मल्होत्रा
राजीव मल्होत्रा | |
|---|---|
| जन्म | 15 सितम्बर 1950 |
| राष्ट्रीयता | भारतीय |
| मातृ संस्था | सेंट स्टीफ़न कॉलेज, सिराक्यूज विश्वविद्यालय |
| विधा | धर्म, विज्ञान, सभ्यता |
| उल्लेखनीय कृतियाँ | विभिन्नता, (2011) भारत विखण्डन, (2011) |
| वेबसाइट | |
| http://rajivmalhotra.com/ | |
राजीव मल्होत्रा (जन्म : सितम्बर, 1950) भारतीय मूल के अमेरिकी लेखक, विचारक तथा प्रखर वक्ता हैं। वे 'इनफिनिटी फाउण्डेशन' के संस्थापक हैं। ‘इनफिंटी फाउंडेशन’ ने पिछले कई वर्षों में बहुत-से विद्वानों और परियोजनाओं को आर्थिक सहायता देकर विश्वविद्यालयों में भारतीय ज्ञान परम्परा को स्थापित करने का प्रयास किया है, उदाहरण के लिये उन्होंने कोलम्बिया विश्वविद्यालय में तिब्बती बौद्ध तेंग्युर के अनुवाद के प्रकल्प को वित्तपोषित किया है।
इन्फिनिटी फाउन्डेशन के अलावा राजीव मल्होत्रा भारतीय संस्कृति के राष्ट्रवादी दृष्टिकोण को भी आगे बढ़ाने के लिये भी प्रयत्नशील हैं। भारतीय संस्कृति और भारतीय समाज पर उन्होंने जमकर लिखा है जो कि पश्चिमी अकादमिक अध्ययनों से प्रायः विपरीत है।
परिचय
[संपादित करें]राजीव मल्होत्रा 1971 में दिल्ली के सेंट स्टीफन्स कालेज से स्नातक बनकर भौतिक शास्त्र एवं कम्प्यूटर विज्ञान में उच्च अध्ययन हेतु अमरीका गये। अमरीका में अनेक बहुराष्ट्रीय कम्पनियों में वरिष्ठ एक्जीक्यूटिव व मैनेजमैंट कन्सलटेंट के पदों पर कार्य किया। स्वतंत्र उपक्रम भी चलाये। सन १९९४ में ४४ वर्ष की आयु में इन सबसे निवृत्त होकर 1995 में उन्होंने प्रिन्स्टन के न्यू जर्सी में 'इन्फिनिट फाउंडेशन' नामक एक लाभ-शून्य संस्था की स्थापना की। विभिन्न सभ्यताओं के बीच सद्भाव पैदा करने और भारत के प्रति अमरीका में सही दृष्टि देने के लिए उन्होंने इस संस्था के माध्यम से अनेक शोधवृत्तियां दीं, सम्मेलन व संगोष्ठियों का आयोजन किया।
इनफिनिटी फॉउन्डेशन
[संपादित करें]राजीव मल्होत्रा ने १९९४ में इनफिनिटी फाउन्डेशन की स्थापना की।[1] इसके बाद सन २००० में उन्होंने 'एजुकेशनल काउन्सिल ऑफ इंडिक ट्रेडिशन्स' (ECIT) की स्थापना की।[2][3][note 1] इस फाउण्डेशन में केवल राजीव मल्होत्रा ही ऐसे व्यक्ति हैं जो पूरे समय के लिये इसके कार्यकर्ता हैं।[2] इस फाउण्डेशन का उद्देश्य प्राचीन भारतीय धर्मों की कुतर्कपूर्ण व्याख्या से लड़ना तथा भारत की शेष विश्व को योगदान को लिखित रूप में प्रस्तुत करना है।[2] इसके सलाहकार मण्डल का कोई भी सदस्य अकादमिक पृष्ठभूमि से नहीं था बल्कि अधिकांश सॉफ्टवेयर उद्यमी थे।[2]
इन्फिनिटी फाउण्डेशन ने 'भारतीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी का इतिहास' (History of Indian Science and Technology/ HIST) नाम से पुस्तकों की एक शृंखला प्रकाशित कर रहे हैं जिनमें के भारत प्राचीन युग से अब तक के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के विकास का स्रोत सहित विस्तृत विवरण दिया जा रहा है।
प्रकाशन
[संपादित करें]इनकी प्रेरणा से एक बड़ी पुस्तक अभी हाल में प्रकाशित हुई है। इस पुस्तक का शीर्षक है, "इन्वेडिग दि सेक्रेड : एन एनालिसिस ऑफ हिन्दुइज्म स्टडीज इन अमरीका" (पवित्र पर हमला: अमरीका में हिन्दुइज्म सम्बंधी अध्ययनों का विश्लेषण)। इस पुस्तक का एक पूरा खंड राजीव मल्होत्रा के लेखों पर आधारित है। इस पुस्तक में अनेक अमरीकी प्रवासी भारतीय विद्वानों के लेखों का संकलन है। प्रत्येक लेख में विकृत अमरीकी शोध-दृष्टि की गम्भीर समीक्षा दी गई है। गणेश, शिव, काली आदि श्रद्धा केन्द्रों का कितना वीभत्स व विद्रूप चित्रण अमरीकी विद्वानों द्वारा किया गया है, यह इस पुस्तक में बताया गया है। इस पुस्तक का कहना है कि लगभग 8000 विश्वविद्यालयी प्रोफेसर भारत पर शोध कार्य में लगे हुए हैं और इन सबका सूत्र संचालन अमरीकन एकेडमी ऑफ रिलीजन (ए.ए.आर.) व उसका एक घटक "रिलीजन इन साउथ एशिया" (रीसा) नामक संस्थायें करती हैं।
श्री राजीव मल्होत्रा के प्रमुख प्रकाशन निम्नलिखित हैं-
पुस्तकें
[संपादित करें]- ब्रेकिंग इंडिया : व्वेस्टर्न इंटर्वेन्सन्स इन द्रविडियन ऐण्ड दलित फाल्टलाइन्स (2011) (प्रकाशक : Amaryllis, An imprint of Manjul Publishing House Pvt. Ltd.; ISBN 978-8191067378).
- राजीव मल्होत्रा (2011), Being Different: An Indian Challenge to Western Universalism (publisher: HarperCollins India; ISBN 978-9-350-29190-0).
- राजीव मल्होत्रा (2014), Indra's Net: Defending Hinduism's Philosophical Unity (publisher: HarperCollins India; ISBN 978-9-351-36244-9).
- राजीव मल्होत्रा (2016), Battle for Sanskrit: Dead or Alive, Oppressive or Liberating, Political or Sacred? (publisher: HarperCollins India; ISBN 978-9351775386).
- राजीव मल्होत्रा और सत्यनारायण दास बाबाजी (2020), संस्कृत नॉन-ट्रान्सलेटेबुल : द इम्पोर्टन्स ऑफ संस्कृताइजिंग इंग्लिश (publisher: Amaryllis, An imprint of Manjul Publishing House Pvt. Ltd.; ISBN 978-93-90085-48-4).
- राजीव मल्होत्रा और विजय विश्वनाथन (2022), Snakes in the Ganga: Breaking India 2.0, (publisher: Occam, An imprint of BluOne Ink, LLP; ISBN 978-9392209093). ISBN 9789392209093.
लिखित प्रकाशन
[संपादित करें]- Malhotra, Rajiv (2005). "India and Globalization". In Nagendra Rao (ed.). Globalization, pre modern India. Daya Books.
- Malhotra, Rajiv (2007). "The axis of neo-colonialism". Indian Journals. 11 (3). आईएसएसएन 0971-8052. मूल से से 14 दिसंबर 2013 को पुरालेखित।. अभिगमन तिथि: 22 मई 2014.
- Malhotra, Rajiv (2009). "American Exceptionalism and the Myth of the Frontiers". In Rajani Kannepalli Kanth (ed.). The Challenge of Eurocentrism: Global Perspectives, Policy, and Prospects. Palgrave Macmillan. ISBN 978-0-230-61227-3.
- Malhotra, Rajiv (2013), Vivekananda's Ideas and the Two Revolutions in Western Thought. In: Vivekananda as the Turning Point. The Rise of a New Spiritual Wave. Pp. 559-583 (PDF), Advaita Ashrama, मूल से (PDF) से 30 दिसंबर 2014 को पुरालेखित।, अभिगमन तिथि: 22 मई 2014
प्रमुख आनलाइन लेख
[संपादित करें]इन्हें भी देखें
[संपादित करें]बाहरी कड़ियाँ
[संपादित करें]| विकिसूक्ति पर राजीव मल्होत्रा से सम्बन्धित उद्धरण हैं। |
- इन्फिनिटी फाउन्डेशन का जालघर
- विभिन्नता का लघु-संस्करण ('बीइंग डिफरेन्ट' का हिन्दी सारांश)
- डब्बावाले या कुंभ मेला से सीखें मैनेजमेंट
- भारत की विघटनकारी बाहरी शक्तियाँ (ब्रेकिंग इंडिया - लेखक राजीव मल्होत्रा)
- पश्चिमी सभ्यता के मापदण्डों का तुलनात्मक अध्ययन
- List of articles
- Was the US Senate Attack on Hinduism an isolated Instance?
- Panel Discussion held at the Annual Meeting of the American Academy of Religion in Denver, Nov 17, 2001
- Outlook India
- Rediff
सन्दर्भ
[संपादित करें]- ↑ उद्धरण त्रुटि:
<ref>का गलत प्रयोग;Stensvoldनाम के संदर्भ में जानकारी नहीं है। - 1 2 3 4 उद्धरण त्रुटि:
<ref>का गलत प्रयोग;:0नाम के संदर्भ में जानकारी नहीं है। - ↑ Kurien 2007, pp. [, page needed], .
- ↑ Kurien 2007, p. 155.
- ↑ Nussbaum 2009, p. 247.
- ↑ Taylor 2011, pp. 153–154.
- ↑ On the Infinity Foundation:
- Kurien: "The next Indic studies organisation established in the United States was the Educational Council of Indic Traditions (ECIT), which was founded in 2000 (along with an associated Indictraditions Internet discussion group) under the auspices of the Infinity Foundation, based in New Jersey. The Infinity Foundation was formed in 1995 by the wealthy Indian American entrepreneur Rajiv Malhotra, who, after a career in the software, computer, and telecom industries had taken an early retirement to pursue philanthropic and educational activities. As Indic studies gradually became the main focus of the Infinity Foundation, the ECIT was disbanded (the Indictraditions group was also closed down later, in the summer of 2003)."[4]
- Nussbaum: "The chief antagonist behind these attacks is Rajiv Malhotra, a very wealthy man who lives in New Jersey and heads the Infinity Foundation, which has made grants in the area of Hinduism studies."[5]
- Taylor: "... Rajiv Malhotra, a self-described Indian-American entrepreneur, philanthropist and community leader. Malhotra had graduated from St Stephen's College, Delhi, in 1971, and came to the US to pursue degrees in physics and computer science, where his subsequent career spanned the software, telecom and media industries (Ramaswamy, de Nicolas and Banerjee, 2007, p. 472, n.5). He left the business world in 1995 to establish the Infinity Foundation, a non-profit organisation that seeks to promote East-West dialogue and a proper understanding of the Indian civilizational experience in the world, particularly in the United States and India."[6]
<ref> टैग्स हैं मगर कोई संबंधित <references group="note"/> टैग नहीं मिला।