मानक प्रतिमान

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मूलभूत कणों का, आमान बोसॉनों (सबसे दायां स्तम्भ) के साथ मानक प्रतिमान।

मानक प्रतिमान या मानक मॉडल, भौतिकशास्त्र का एक सिद्धान्त है जिसका संबंध विद्युत्-चुम्बकीय, दुर्बल तथा प्रबल नाभिकीय अन्तःक्रियाओं से है। ये ऐसी अन्तःक्रियाएँ हैं, जो कि ज्ञात उपपारमाण्विक कणों की गतिकी की व्याख्या करती हैं। इसका विकास बीसवीं सदी के मध्य से लेकर देर-सदी तक हुआ। ये कई हाथों से बुना हुआ एक पट है, जो कि कभी तो नई प्रायोगिक खोजों से आगे बढ़ा तो कभी सैद्धान्तिक प्रगतियों से। इसका विकास सही अर्थों में सहकार के साथ हुआ है, जो महाद्वीपों और दशकों में विस्तृत है।[1] इसका आज का प्रारूप 1970 के दशक के मध्य में बना, जबकि क्वार्क का अस्तित्व सुनिश्चित किया गया। उसके बाद तो तल क्वार्क (1977), शीर्ष क्वार्क (1995) और टॉ क्वार्क (2000) की खोज ने मानक प्रतिमान की साख और बढ़ा दी। अधिक हाल की घटना के रूप में 2011-2012 में हिग्स बोसॉन की खोज ने इसके सारे अनुमानित कणों का समुच्चय पूरा कर दिया है। प्रायोगिक परिणामों की दीर्घ शृंख्ला की सफलतापूर्वक व्याख्या कररने के कारण मानक प्रतिमान को कभी कभी "लगभग सबकुछ का सिद्धान्त" भी कहा जाता है।

मानक प्रतिमान मौलिक अन्तःक्रियाओं का सम्पूर्ण सिद्धान्त होते होते रह जाता है, क्योंकि इसमें से गुरुत्वाकर्षण का समूचा सिद्धान्त ही गायब है, साथ ही यह विश्व के त्वरित विस्तार की भविष्यवाणी भी नहीं करता है (जैसा कि अन्धकार-ऊर्जा द्वारा वर्णित है)।

टिप्पणियाँ एवं सन्दर्भ[संपादित करें]

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. Oerter, Robert (2006-09-26). The Theory of Almost Everything: The Standard Model, the Unsung Triumph of Modern Physics (p. 2). Penguin Group. Kindle Edition.

आगे अध्ययन[संपादित करें]

Introductory textbooks
Advanced textbooks
Journal articles
  • E.S. Abers, B.W. Lee (1973). "Gauge theories". Physics Reports 9: 1–141. Bibcode 1973PhR.....9....1A. doi:10.1016/0370-1573(73)90027-6. 
  • Y. Hayato et al. (1999). "Search for Proton Decay through pνK+ in a Large Water Cherenkov Detector". Physical Review Letters 83 (8): 1529. arXiv:hep-ex/9904020. Bibcode 1999PhRvL..83.1529H. doi:10.1103/PhysRevLett.83.1529. 
  • S.F. Novaes (2000). "Standard Model: An Introduction". arXiv:hep-ph/0001283 |class= ignored (help).
  • D.P. Roy (1999). "Basic Constituents of Matter and their Interactions — A Progress Report". arXiv:hep-ph/9912523 |class= ignored (help).
  • F. Wilczek (2004). "The Universe Is A Strange Place". Nuclear Physics B - Proceedings Supplements 134: 3. arXiv:astro-ph/0401347. Bibcode 2004NuPhS.134....3W. doi:10.1016/j.nuclphysbps.2004.08.001. 

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]