परमाणु

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हीलियम परमाणु
Helium atom ground state.
हिलियम परमाणु का एक उदाहरण, नाभिक (गुलाबी) और परमाणु कक्षीय का वितरण (काला) का चित्रण। काली पट्टी एक कर्विमान है (10−10 मीटर या 100 पिकोमीटर)।
वर्गीकरण
एक रासायनिक तत्व का सबसे छोटा मान्यता प्राप्त विभाजन
गुण
परमाणु भार: 1.67 × 10−27 से 4.52 × 10−25 कि.ग्रा. तक
विद्युत आवेश: शून्य (तटस्थ), या आयन आवेश
व्यास श्रेणी: 62 पिकोमीटर (He) से 520 पिकोमीटर (Cs)
भाग: इलेक्ट्रॉन और न्यूट्रॉन और प्रोटॉन की एक सुगठित नाभिक

एक परमाणु किसी भी साधारण से पदार्थ की सबसे छोटी घटक इकाई है जिसमे एक रासायनिक तत्व के गुण होते हैं।[1] हर ठोस, तरल, गैस, और प्लाज्मा तटस्थ या आयनन परमाणुओं से बना है। परमाणुओं बहुत छोटे हैं; विशिष्ट आकार लगभग 100 pm (एक मीटर का एक दस अरबवें) हैं।[2] हालांकि, परमाणुओं में अच्छी तरह परिभाषित सीमा नहीं होते है, और उनके आकार को परिभाषित करने के लिए अलग अलग तरीके होते हैं जोकि अलग लेकिन काफी करीब मूल्य देते हैं।

परमाणुओं इतने छोटे है कि शास्त्रीय भौतिकी इसका काफ़ी गलत परिणाम देते हैं।

हर परमाणु नाभिक से बना है और नाभिक एक या एक से अधिक इलेक्ट्रॉन्स से सीमित है। नाभिक आम तौर पर एक या एक से अधिक न्यूट्रॉन और प्रोटॉन की एक समान संख्या से बना है। प्रोटान और न्यूट्रान न्यूक्लिऑन कहलाता है। परमाणु के द्रव्यमान का 99.94% से अधिक भाग नाभिक में होता है। प्रोटॉन पर सकारात्मक विद्युत आवेश होता है, इलेक्ट्रॉन्स पर नकारात्मक विद्युत आवेश होता है और न्यूट्रान पर कोई भी विद्युत आवेश नहीं होता है।

एक परमाणु के इलेक्ट्रॉन्स इस विद्युत चुम्बकीय बल द्वारा एक परमाणु के नाभिक में प्रोटॉन की ओर आकर्षित होता है। नाभिक में प्रोटॉन और न्यूट्रॉन एक अलग बल, यानि परमाणु बल के द्वारा एक दूसरे को आकर्षित करते है, जोकि विद्युत चुम्बकीय बल जिसमे सकारात्मक आवेशित प्रोटॉन एक दूसरे से पीछे हट रहे है, की तुलना में आम तौर पर शक्तिशाली है।

परमाणु के केन्द्र में नाभिक (न्यूक्लिअस) होता है जिसका घनत्व बहुत अधिक होता है। नाभिक के चारो ओर ऋणात्मक आवेश वाले एलेक्ट्रान चक्कर लगाते रहते हैं जिसको एलेक्ट्रान घन (एलेक्ट्रान क्लाउड) कहते हैं। नाभिक, धनात्मक आवेश वाले प्रोटानों एवं अनावेशित (न्यूट्रल) न्यूट्रानों से बना होता है। जब किसी परमाणु में एलेक्ट्रानों की संख्या उसके नाभिक में स्थित प्रोटानों की संख्या के समान होती है तब परमाणु वैद्युकीय दृष्टि से अनावेशित होता है; अन्यथा परमाणु धनावेशित या ऋणावेशित ऑयन के रूप में होता है।

आधुनिक रसायनशास्त्र में शताधिक मूल भूत माने गए हैं, जिनमें से कुछ तो धातुएँ हैं जैसे ताँबा, सोना, लोहा, सीसा, चाँदी, राँगा, जस्ता; कुछ और खनिज हैं, जैसे, गंधक, फासफरस, पोटासियम, अंजन, पारा, हड़ताल, तथा कुछ गैस हैं, जैसे, आक्सीजन, नाइट्रोजन, गाइड्रोजन आदि। इन्हीं मूल भूतों के अनुसार परमाणु आधुनिक रसायन में माने जाते हैं। पहले समझा जाता था कि ये अविभाज्य हैं। अब इनके भी टुकड़े कर दिए गए हैं।

नाभिक में प्रोटॉन की संख्या किसी रासायनिक तत्व को परिभाषित करता है: जैसे सभी तांबा के परमाणु में 29 प्रोटॉन होते हैं। न्यूट्रॉन की संख्या तत्व के समस्थानिक को परिभाषित करता है।[3] इलेक्ट्रॉनों की संख्या एक परमाणु के चुंबकीय गुण को प्रभावित करता है। परमाणु अणु के रूप में रासायनिक यौगिक बनाने के लिए रासायनिक आबंध द्वारा एक या अधिक अन्य परमाणुओं को संलग्न कर सकते हैं। परमाणु की संघटित और असंघटित करने की क्षमता प्रकृति में हुए बहुत से भौतिक परिवर्तन के लिए जिम्मेदार है, और रसायन शास्त्र के अनुशासन का विषय है।

संरचना[संपादित करें]

अपरमाणविक कण[संपादित करें]

शब्द परमाणु का मूल अर्थ है कि एक कण जिसे छोटे कणों में न बाटा या विभाजित किया जा सके, लेकिन आधुनिक वैज्ञानिक प्रयोग में परमाणु विभिन्न अपरमाणविक कणों से बना है। इलेक्ट्रॉन, प्रोटॉन और न्यूट्रॉन एक परमाणु के संघटक कण है; सभी तीन फर्मिऑन हैं। हालांकि, हाइड्रोजन-1 के परमाणुओं में कोई न्यूट्रॉन नहीं है।

इलेक्ट्रॉन एक ऋणात्मक विद्युत आवेश और बहुत छोटे आकार के साथ 9.11 × 10−31 कि. ग्रा. के भार पर इन कणों से बहुत हल्का या कम भारी है।[4] इलेक्ट्रान की खोज 19वी सदी से अंत में हुई, जिसका अधिकतर श्रेय जे. जे. थॉमसन को जाता हैं।

प्रोटॉन पर सकारात्मक आवेश होता है और 1.6726 × 10-27 कि.ग्रा. के भार पर इलेक्ट्रान के भार के 1,836 गुना ज्यादा है। एक परमाणु में प्रोटॉनों की संख्या परमाणु संख्या कहलाता है। जिसकी खोज अर्नेस्ट रदरफोर्ड द्वारा 1919 में किया गया था।

न्यूट्रॉन पर कोई विद्युत आवेश नहीं होता है 1.6929 × 10-27 कि.ग्रा. के भार पर इलेक्ट्रान के भार के 1,839 गुना ज्यादा है।[5] न्यूट्रॉन और प्रोटॉन का भार लगभग एक सामान होता है। न्यूट्रॉन की खोज अंग्रेजी भौतिक विज्ञानी जेम्स चैडविक के द्वारा 1932 में किया गया था।

नाभिक[संपादित करें]

एक परमाणु में सभी प्रोटॉन और न्यूट्रॉन मिलकर एक छोटा परमाणु नाभिक बनाते है, और सामूहिक रूप से न्यूक्लिऑन कहलाते है। एक नाभिक की त्रिज्या लगभग, 1.07 3√A फेम्तोमीटर (en:Femtometre) के बराबर है, जहां A न्युक्लियोन की कुल संख्या है।[6] यह परमाणु की त्रिज्या तुलना में काफी छोटा है, जो 105 फेम्तोमीटर के क्रम पर है।

इलेक्ट्रॉन बादल[संपादित करें]

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

संदर्भ[संपादित करें]

  1. "Atom". Compendium of Chemical Terminology (IUPAC Gold Book) (2nd)। IUPAC। अभिगमन तिथि: 2015-04-25
  2. Ghosh, D. C.; Biswas, R. (2002). "Theoretical calculation of Absolute Radii of Atoms and Ions. Part 1. The Atomic Radii". Int. J. Mol. Sci. 3: 87–113. doi:10.3390/i3020087. 
  3. Leigh, G. J., सं (1990). International Union of Pure and Applied Chemistry, Commission on the Nomenclature of Inorganic Chemistry, Nomenclature of Organic Chemistry – Recommendations 1990. Oxford: Blackwell Scientific Publications. प॰ 35. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 0-08-022369-9. "An atom is the smallest unit quantity of an element that is capable of existence whether alone or in chemical combination with other atoms of the same or other elements." 
  4. Demtröder, Wolfgang (2002). Atoms, Molecules and Photons: An Introduction to Atomic- Molecular- and Quantum Physics (1st सं०). Springer. pp. 39–42. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 3-540-20631-0. OCLC 181435713. 
  5. Woan, Graham (2000). The Cambridge Handbook of Physics. Cambridge University Press. प॰ 8. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 0-521-57507-9. OCLC 224032426. 
  6. Jevremovic, Tatjana (2005). Nuclear Principles in Engineering. Springer. प॰ 63. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 0-387-23284-2. OCLC 228384008. 

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]