लाग्रांजीय यांत्रिकी

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चिरसम्मत यांत्रिकी

न्यूटन का गति का द्वितीय नियम
इतिहास · समयरेखा
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लाग्रांजीय यांत्रिकी अथवा लाग्रांजियन यांत्रिकी स्थिर प्रक्रिया द्वारा हेमिल्टन विधि द्वारा चिरसम्मत यांत्रिकी का एक पुनःसूत्रिकरण है।[1]

वैचारिक ढांचा[संपादित करें]

व्यापकीकृत निर्देशांक[संपादित करें]

अवधारणा एवं शब्दावली[संपादित करें]

यदि किसी कण पर बाह्य बल कार्य करते हैं तो न्यूटन के गति के नियमानुसार तीनों विमाओं के लिए तीन साधारण द्विघात अवकल समीकरण प्राप्त होंगी। अतः कण की पूर्ण अवस्था का वर्णन करने के लिए ६ स्वतंत्र चर (तीन प्रारम्भिक निर्देशांक और तीन वेग) प्रर्याप्त हैं।

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. गोल्डस्टीन, एच॰ (2001). चिरसम्मत यांत्रिकी (तीसरा सं॰). Addison-Wesley. प॰ 35.