गतिज ऊर्जा

गतिज ऊर्जा (Kinetic Energy) किसी पिण्ड की वह अतिरिक्त ऊर्जा है जो उसके रेखीय वेग अथवा कोणीय वेग अथवा दोनो के कारण होती है। इसका मान उस पिण्ड को विरामावस्था से उस वेग तक त्वरित करने में किये गये कार्य के बराबर होती है। यदि किसी पिण्ड की गतिज ऊर्जा E हो तो उसे विरामावस्था में लाने के लिये E के बराबर ऋणात्मक कार्य करना पड़ेगा।[1]
गतिज ऊर्जा (रेखीय गति) = (1/2) * m * v * v ; m = द्रव्यमान, v = रेखीय वेग
गतिज ऊर्जा (घूर्णन गति) = (1/2) * I * w * w ; I = जड़त्वाघूर्ण, w = कोणीय वेग
चिरसम्मत यांत्रिकी में गतिज ऊर्जा
[संपादित करें]जहाँ m द्रव्यमान और v गति है।
उदाहरण के लिए यदि हमें किसी 80 किलोग्राम द्रव्यमान की वस्तु का जो कि 18 मीटर प्रति सेकंड (65 किलोमीटर प्रति घंटा) की गति से चल रही है, उसकी गतिज ऊर्जा का मान ज्ञात करने हेतु हमें इस सूत्र की आवश्यकता होगी। :-
आपेक्षिकीय यांत्रिकी में गतिज ऊर्जा
[संपादित करें]जहाँ,
- तथा c निर्वात में प्रकाश का वेग है।
या,
या,
इतिहास तथा व्युत्पत्तिशास्त्र
[संपादित करें]गतिज उर्जा की जड़ें यूनानी शब्द κίνησις (किनेसिस) में हैं, जिसका अर्थ है "गति"। गतिज ऊर्जा तथा स्थितिज ऊर्जा के बीच द्वैधीकरण का पता अरस्तु की वास्तविकता तथा क्षमता की अवधारणाओं से लगाया जा सकता है।[2]
इन्हें भी देखें
[संपादित करें]सन्दर्भ
[संपादित करें]- ↑ Judith P. Zinsser (2007). Emilie du Chatelet: Daring Genius of the Enlightenment. Penguin. ISBN 0-14-311268-6.
- ↑ Brenner, Joseph (2008). Logic in Reality (illustrated ed.). Springer Science & Business Media. p. 93. ISBN 978-1-4020-8375-4. मूल से से 2020-01-25 को पुरालेखित।. अभिगमन तिथि: 2016-02-01. Extract of page 93 Archived 2020-08-04 at the वेबैक मशीन