अलेक्से क्लाड क्लेरो

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फ्रांसीसी गणितज्ञ अलेक्से क्लाड क्लेरो

अलेक्से क्लाड क्लेरो (३ मई, १७१३ - १७ मई, १७६५ ई०) फ्रेंच गणितज्ञपेरिस में ७ (अथवा १३) मई, १७१३ को जन्म। पिता गणित के अध्यापक थे। पिता के शिक्षण में गणित की शिक्षा में उसकी प्रतिभा ऐसी विकसित हुई कि बारह वर्ष की अवस्था में ही अपने फ्रेंच अकादमी के सम्मुख चार वक्र रेखाओं के गुण पर किए अपने आविष्कार के संबंध में एक निबंध पढ़ा। १७२९ में उन्होंने देकोर्ट की वैश्लेषिक ज्यामिति को तीन आयामों तक विस्तृत करते हुए एक पुस्तक लिखी जो १७३१ में प्रकाशित हुई। उसके प्रकाशित होते ही १८ वर्ष आयु में ही आयु संबंधी नियमों की अवहेलना कर फ्रांस की अकादमी ऑव साइंस ने उसे अपना सदस्य मनोनीत किया। १७३६ में वह मानटियाँ के साथ मध्य रेखा के एक अंश की लंबाई की रायल सोसायटी ने उसे अपना फेलो बनाया। १७४३ ई. में उसने अपनी सुप्रसिद्ध ‘क्लेरो थियोरिम’ पुस्तक प्रकाशित की जिसमें भिन्न अक्षांशों के स्थानों पर गुरुत्वाकर्षण के नियंताक के जानने का सूत्र स्थापित किया है। १७५० में वह अपने चंद्रमा संबंधी सिद्धांत के प्रतिपादन पर सेंट केतु के चक्कर अकादमी से पुरष्कृत हुआ। १७५९ में उसने हेली केतु के चक्कर पूरा करने के समय की गणना कर ख्याति प्राप्त की। इसके अनंतर भी वह गणित संबंधी महत्वपूर्ण शोध प्राप्त करता रहा। १७ मई, १७६५ को पेरिस में उसकी मृत्यु हुई।


चिरसम्मत यांत्रिकी
\mathbf{F} = m \mathbf{a}
न्यूटन का गति का द्वितीय नियम
इतिहास · समयरेखा
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