महोबा

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महोबा
Mahoba
सूर्य मंदिर, महोबा
सूर्य मंदिर, महोबा
महोबा is located in उत्तर प्रदेश
महोबा
महोबा
उत्तर प्रदेश में स्थिति
निर्देशांक: 25°17′N 79°52′E / 25.28°N 79.87°E / 25.28; 79.87निर्देशांक: 25°17′N 79°52′E / 25.28°N 79.87°E / 25.28; 79.87
देश भारत
प्रान्तउत्तर प्रदेश
ज़िलामहोबा ज़िला
जनसंख्या (2011)
 • कुल95,216
भाषा
 • प्रचलितहिन्दी
पिनकोड210 427
दूरभाष कोड91-5281
वाहन पंजीकरणUP-95
लिंगानुपात922 /
साक्षरता76.91%[1]
वेबसाइटwww.mahoba.nic.in
महोबा के वीर ऊदल

महोबा (Mahoba) भारत के उत्तर प्रदेश राज्य के महोबा ज़िले में स्थित एक नगर है। यह ज़िले का मुख्यालय भी है। महोबा ऐतिहासिक बुन्देलखण्ड क्षेत्र में स्थित है और यहाँ का प्रचीन सूर्य मंदिर प्रसिद्ध है।[2][3]

विवरण[संपादित करें]

प्राचीन समय में महोबा बुन्देलखण्ड की राजधानी था। महोबा को बुन्देलखण्ड की वीरभूमि भी कहा जाता है। यह वीर आल्हा-ऊदल का नगर कहलाता है। महोबा जहां एक ओर विश्व प्रसिद्ध खजुराहो के लिए प्रसिद्ध है। वहीं दूसरी ओर गोरखगिरी पर्वत, ककरामठ मंदिर, सूर्य मंदिर, चित्रकूट और कालिंजर आदि के लिए भी विशेष रूप से जाना जाता है। महोबा झांसी से १४० किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। महोबा उत्तर प्रदेश राज्य का एक जिला है। ऐतिहासिक दृष्टि से भी यह स्थान काफी महत्वपूर्ण है। काफी समय तक चन्देलों ने यहां शासन किया है। अपने काल के दौरान चंदेल राजाओं ने कई ऐतिहासिक किलों और मंदिरों आदि का निर्माण करवाया था। इसके पश्चात् इस जगह पर परिहार(खंगार) राजाओं ने शासन किया। महोबा सांस्कृतिक दृष्टि से काफी प्रमुख माना जाता है। पहले इस जगह को महोत्सव नगर के नाम से जाना जाता था, लेकिन बाद में इसका नाम बदल कर महोबा रख दिया गया।

भूगोल[संपादित करें]

महोबा की स्थिति 25°17′N 79°52′E / 25.28°N 79.87°E / 25.28; 79.87 पर है। यहां की औसत ऊंचाई 214 मीटर (702 फीट) है।

प्रमुख आकर्षण[संपादित करें]

गोरखगिरी पर्वत[संपादित करें]

महोबा स्थित गोरखगिरी पर्वत एक खूबसूरत पर्यटक स्थल है। इसी पर्वत पर गुरू गोरखनाथ कुछ समय के लिए अपने शिष्य सिद्धो दीपक नाथ के साथ ठहरें थे। इसके अलावा यहां भगवान शिव की नृत्य करती मुद्रा में एक मूर्ति भी है। प्रत्‍येक पूर्णिमा के दिन यहां गोरखगिरि की परिक्रमा की जाती है ।

सूर्य मंदिर[संपादित करें]

इन्हें भी देखें: सूर्य मंदिर, महोबा

सूर्य मंदिर राहिला सागर के पश्चिम दिशा में स्थित है। इस मंदिर का निर्माण राहिला के शासक चंदेल ने अपने शासक काल ८९० से ९१० ई. के दौरान नौवीं शताब्दी में करवाया था। इस मंदिर की वास्तुकला काफी खूबसूरत है।

खजुराहो[संपादित करें]

महाबो से खजुराहो ६१ किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। विश्व प्रसिद्ध मंदिर खजुराहो महाबो के प्रमुख व प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों में से एक है। इस मंदिर का निर्माण ९५० ई. और १०५० ई. में चन्देलों द्वारा करवाया गया था। इस मंदिर के आस-पास २५ अन्य मंदिर भी है। इस मंदिर की वास्तुकला बहुत आकर्षक है। यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है।

कालिंजर[संपादित करें]

महोबा से १०९ किलोमीटर की दूरी पर स्थित कालिंजर किलों के लिए काफी प्रसिद्ध है। १५वीं और १९वीं शताब्दी के मध्य में इस किले का विशेष महत्व रहा है। किले के भीतर कई अन्य जगह जैसे नीलकंठ मंदिर, सीता सेज, पटल गंगा, पांडु खुर्द, कोटि तीर्थ और भैरों की झरिद आदि स्थित है।

चित्रकूट[संपादित करें]

महोबा से १२७ किलोमीटर की दूरी पर स्थित चित्रकूट की प्राकृतिक सुंदरता काफी अद्भुत है। चित्रकूट अपनी प्राकृतिक सुंदरता के साथ-साथ धार्मिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। माना जाता है कि भगवान राम और सीता ने अपने चौदह वर्ष यहीं पर बिताए थे। कालिञर वह प्रसिद्ध स्थान है जहा शेर शाह सूरी नामक शाषक की म्रत्यु हुई थी।

कजली मेला[संपादित करें]

837 साल पहले महोबा के चंदेल राजा परमाल के शासन से कजली मेले की शुरुआत हुई थी। राजा परमाल की पुत्री चंद्रावल अपनी 14 सखियों के साथ भुजरियां विसर्जित करने कीरत सागर जा रही थीं। तभी रास्ते में पृथ्वीराज चौहान के सेनापति चामुंडा राय ने आक्रमण कर दिया था। पृथ्वीराज चौहान की योजना चंद्रावल का अपहरण कर उसका विवाह अपने बेटे सूरज सिंह से कराने की थी। उस समय कन्नौज में रह रहे आल्हा और ऊदल को जब इसकी जानकारी मिली तो वे चचेरे भाई मलखान के साथ महोबा पहुंच गए और राजा परमाल के पुत्र रंजीत के नेतृत्व में चंदेल सेना ने पृथ्वीराज चौहान की सेना से युद्ध किया। 24 घंटे चली लड़ाई में पृथ्वीराज का बेटा सूरज सिंह मारा गया। युद्ध में पृथ्वीराज चौहान को पराजय का सामना करना पड़ा। युद्ध के बाद राजा परमाल की पत्नी रानी मल्हना, राजकुमारी चंद्रावल व उसकी सखियों ने कीरत सागर में भुजरियां विसर्जित कीं। इसके बाद पूरे राज्य में रक्षाबंधन का त्योहार मनाया गया। तभी से महोबा क्षेत्र के ग्रामीण रक्षाबंधन के एक दिन बाद अर्थात भादों मास की परीवा को कीरत सागर के तट से लौटने के बाद ही बहने अपने भाइयों को राखी बांधती हैं। आल्हा-ऊदल की इस वीरभूमि में आठ सदी बीतने के बाद भी लाखो लोग कजली मेले में आते हैं।

शिव तांडव मंदिर[संपादित करें]

शिव तांडव मंदिर गोरखगिरी पर्वत के करीब ही स्थित है, जैसा कि नाम से ही पता चलता है, एक मंदिर जो भगवान शिव को समर्पित है। यहां भगवान शिव की प्रतिमा नटराज स्वरूप में स्थापित है, यह मूर्ति एक काले ग्रेनाइट पत्थर से बनाई गई है! नटराज रूप में शिव की मूर्ति इस क्षेत्र में सबसे दुर्लभ मूर्तियों में से एक है।

आवागमन[संपादित करें]

वायु मार्ग

सबसे निकटतम हवाई अड्डा खजुराहो विमानक्षेत्र है। खजुराहो से महोबा ६५ किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।

रेल मार्ग

महोबा ग्‍वालियर, दिल्ली और मुम्बई आदि जगहों से रेलमार्ग द्वारा जुड़ी हुई है।

सड़क मार्ग

महोबा कई प्रमुख शहरों से सड़कमार्ग द्वारा जुड़ा हुआ है। राष्ट्रीय राजमार्ग 34 यहाँ से गुज़रता है।

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. "Mahoba Religion Data 2011". Census 2011 - Census of India.
  2. "Uttar Pradesh in Statistics," Kripa Shankar, APH Publishing, 1987, ISBN 9788170240716
  3. "Political Process in Uttar Pradesh: Identity, Economic Reforms, and Governance Archived 2017-04-23 at the Wayback Machine," Sudha Pai (editor), Centre for Political Studies, Jawaharlal Nehru University, Pearson Education India, 2007, ISBN 9788131707975